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फ्रांस से समझौता पर अपने ही सहयोगी असहमत

जैतापुर परमाणु बिजली संयंत्र परियोजना को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस से बातचीत करने की खबर के साथ ही सभी की निगाहें शनिवार को शिवसेना की प्रतिक्रिया पर लगी थी। फ्रांस के साथ परमाणु समझौते की खबर आने के बाद भी शिवसेना ने स्पष्ट कर दिया कि इस संयंत्र के विरोध […]
Author April 12, 2015 09:21 am
’जैतापुर परमाणु संयंत्र के विरोध पर शिवसेना अडिग, पवार ने कहा कि सत्ता छोड़कर विरोध करे सेना (फोटो: भाषा)

जैतापुर परमाणु बिजली संयंत्र परियोजना को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस से बातचीत करने की खबर के साथ ही सभी की निगाहें शनिवार को शिवसेना की प्रतिक्रिया पर लगी थी। फ्रांस के साथ परमाणु समझौते की खबर आने के बाद भी शिवसेना ने स्पष्ट कर दिया कि इस संयंत्र के विरोध को लेकर वह अपनी भूमिका पर अडिग है। शनिवार को शिवसेना नेता संजय राऊत कहा कि उनकी पार्टी जैतापुर परमाणु परियोजना का विरोध करती रहेगी। दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने शिव सेना के विरोध को गलत बताया है।

संजय राऊत ने कहा कि शिवसेना जैतापुर परमाणु बिजलीघर के खिलाफ है और वह अभी भी अपनी भूमिका पर अडिग है। जैतापुर के लोग इस परियोजना के खिलाफ हैं और शिवसेना ने इसी मुद्दे पर चुनाव जीता है। लिहाजा वह अपनी भूमिका नहीं छोड़ सकती।

शिवसेना के इस विरोध से असहमति जताते हुए शरद पवार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि सत्ता में रहते हुए सरकार का विरोध करना गलत है। उसे सत्ता से बाहर निकल कर सरकार का विरोध करना चाहिए।

शिवसेना इस परियोजना का शुरू से ही विरोध करती आ रही है। शुक्रवार को महाराष्ट्र में संपन्न हुए बजट सत्र के दौरान ही शिवसेना ने जैतापुर में इस परियोजना के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। उनके आंदोलन को देखते हुए सरकार को बड़ी संख्या में पुलिस का इंतजाम करना पड़ा था।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस परियोजना को जैतापुरवासियों के सिर पर लटकती तलवार बताते हुए कहा था कि जो लोग इस परियोजना को अच्छी बता रहे हैं, वे चाहें तो इसे गुजरात ले जा सकते हैं।

फ्रांस की अरेवा कंपनी के सहयोग से यह परमाणु परियोजना रत्नागिरी जिले के जैतापुर गांव में लगाई जा रही है। इस परियोजना के तहत छह इकाइयां लगाई जानी है जिनकी प्रत्येक की क्षमता 1650 मेगावाट होगी। मोदी सरकार 2024 तक देश में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को तीन गुना करना चाहती है। यह परियोजना उसी का एक हिस्सा है मगर सूबे की सत्ता में भागीदार होने के बावजूद शिवसेना 9900 मेगावाट की जैतापुर परमाणु योजना के खिलाफ कमर कस चुकी है।

हालांकि शुक्रवार को संपन्न बजट सत्र में विपक्ष ने जैतापुर परियोजना के बारे में सरकार की भूमिका पर सवाल खड़ा किया था। सदन में ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बाबनकुले ने जानकारी दी थी कि इस परियोजना में राज्य सरकार की भूमिका सिर्फ जमीन अधिग्रहण करने तक सीमित है।

इसी के मुताबिक 22 जनवरी 2010 को भूमि अधिग्रहण का काम सरकार ने शुरू किया। इस परियोजना के लिए 2336 किसानों की 938 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई है। चूंकि यह परियोजना केंद्र सरकार की है इसलिए इसे शुरू करना या पूरा करना केंद्र सरकार पर है।

विधान परिषद में विरोधी दल के नेता धनंजय मुंडे ने सवाल उठाया था कि शिवसेना के इस परियोजना के विरोध को देखते हुए यह किस तरह पूरी होगी। इस पर भाजपा नेता और राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने कहा कि शिवसेना स्वतंत्र पार्टी है और उसकी भूमिका अलग हो सकती है। समन्वय के आधार पर इस मुद्दे का हल निकाला जाएगा। खड़से ने कहा कि यह परियोजना केंद्र सरकार की नहीं बल्कि देश की है।

 

गणेश नंदन तिवारी

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