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भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व BCI पर चलेगा केस

बार काउंसिल आॅफ इंडिया (बीसीआइ) के एक पूर्व उपाध्यक्ष और एक पूर्व सदस्य समेत पांच के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालती सुनवाई शुरू की गई है।
Author नई दिल्ली | November 27, 2015 03:25 am

बार काउंसिल आॅफ इंडिया (बीसीआइ) के एक पूर्व उपाध्यक्ष और एक पूर्व सदस्य समेत पांच के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालती सुनवाई शुरू की गई है। विशेष सीबीआइ न्यायाधीश मनोज कुमार नागपाल ने पूर्व बीसीआइ उपाध्यक्ष राजू धनपाल राज, उसके पूर्व सदस्य राजिंदर सिंह राणा और तीन अन्य को यह कहते हुए अभ्यारोपित किया कि उनके विरूद्ध प्रथमदृष्टया धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश समेत भादंसं के तहत विभिन्न अपराधों और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला बनता है।

उन पर रोहतक के एक कॉलेज से रिश्वत लेकर उसके बारे में अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट देने का आरोप है। राज और राणा व वैश्य एजूकेशन सोसायटी के अध्यक्ष राम भरोसे गोयल, उसके सदस्य अजय सिंघानिया और कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य सुभाष गुप्ता ने जब खुद को निर्दोष बताया और उन पर सुनवाई की मांग की तब अदालत ने उन्हें अभ्यारोपित किया। पांचों अरोपी फिलहाल जमानत पर हैं। अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाही के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की और सीबीआइ वकील से गवाहों को अगली तारीख पर तलब करने के लिए आवेदन देने को कहा।

ड्राइवर की हत्या के मामले में दोषी को उम्रकैद : 2008 में देहरादून के पास एक टैक्सी ड्राइवर की हत्या में दोषी करार दिए गए शख्स को दिल्ली की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रितेश सिंह ने दिल्ली के रहने वाले विपिन कुमार सलूजा (30) को आइपीसी की धारा 302 (हत्या), 392 (लूटपाट) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत दोषी करार दिया और उस पर 1.4 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। सलूजा के अलावा अदालत ने 27 साल के सुनील कुमार को भी तीन साल जेल की सजा सुनाई। सुनील पर आरोप था कि उसने चुराई गई चीज हासिल की जबकि उसे पता था कि वह चोरी की चीज है। उसे सबूत के अभाव में हत्या जैसे गंभीर आरोपों से बरी कर दिया गया।

दालत ने कहा कि चूंकि वह इस मामले में तीन साल से ज्यादा समय जेल में पहले ही बिता चुका है, लिहाजा उसे रिहा किया जाए बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो। पुलिस ने पहले तीन लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था लेकिन मुकदमे के दौरान तीसरे आरोपी को नाबालिग करार दिया गया और उसके मुकदमे को किशोर न्याय बोर्ड के हवाले कर दिया गया।

पुलिस के मुताबिक, सात जनवरी 2008 को विपिन एक ट्रैवल कंपनी के दफ्तर गया और मसूरी जाने के नाम पर एक टोयोटा इनोवा गाड़ी भाड़े पर ली जिसका ड्राइवर 25 साल का उपेंद्र आनंद था । रास्ते में सुनील और नाबालिग आरोपी भी गाड़ी में सवार हुए। मसूरी से लौटते वक्त उन्होंने देहरादून में गाड़ी रुकवाई, उपेंद्र आनंद की गला दबाकर हत्या कर दी और उसके अंगूठी, क्रेडिट कार्ड, दो मोबाइल फोन और नगद लेकर फरार हो गए।

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