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भारतीय विदेश सचिव ने सीमापार आतंकवाद पर पाकिस्तानी उच्चायुक्त से जताया आधिकारिक विरोध

भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर ने अपने प्रतिवाद में लश्कर-ए-तैयबा का विशेष जिक्र किया है।
Author नई दिल्ली | August 9, 2016 17:55 pm
भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर। (फाइल फोटो)

भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर ने मंगलवार को पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को बुलाकर सीमापार आतंकवाद पर कड़ा आधिकारिक प्रतिवाद (डिमार्शे) दर्ज कराया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि डिमार्शे में हाल ही पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी और पाकिस्तानी नागरिक बहादुर अली का विशेष जिक्र किया गया है। कश्मीर में जारी हिंसा को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। डिमार्शे एक कूटनीतिक प्रक्रिया है जिसमें संबंधित देश आधिकारिक तौर पर किसी देश को किसी घटना के बारे में कार्रवाई करने के लिए कहता है।

आतंकी बहादुर अली को पिछले महीने उत्तरी कश्मीर से भारतीय सेना की एक कार्रवाई में पकड़ा गया था, जबकि चार अन्य आतंकी मारे गए थे। अली पाकिस्तान के लाहौर का रहने वाला है। खबरों के अनुसार अली ने एनआईए की पूछताछ में खुद के लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी होने की बात स्वीकार की। आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के आठ जुलाई को एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद कश्मीर में हिंसा भड़क उठी जिसमें दो सुरक्षाबलों से समेत पचास से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान कश्मीर में हिंसा भड़का रहा है। वहीं पाकिस्तान ने कश्मीर में हुई हिंसा के लिए भारत को दोषी बताया है।

इस साल की शुरुआत में भारत के पठानकोट में हुए हमले के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता रुकी हुई है।पठानकोट हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से इस हमले के पीछे मौजूद आतंकवादियों के खिलाफ जल्द व निर्णायक कार्रवाई करने को कहा था। हमले के बाद भारत ने कहा था कि पाकिस्तान को आतंकवादी कार्य को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई के लिए पर्याप्त खुफिया जानकारी मुहैया कराई गई है। भारत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर की पहचान हमले के सरगना के तौर पर की है।

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भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह हाल ही में सार्क देशों के गृहमंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए पाकिस्तान गए थे। वहां राजनाथ पाकिस्तानी गृह मंत्री से अलग से मुलाकात नहीं की। पाकिस्तानी गृह मंत्री सार्क देशों के गृहमंत्रियों के लिए दिए गए भोज में खुद नहीं आए तो राजनाथ भी उसमें नहीं गए। जब दोनों नेता मिले तो दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ठंडे तरीके से पेश आए।

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