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मनोहर लाल खट्टर के लिए मुख्यमंत्री पद ‘कांटों भरा ताज’

पवन कुमार बंसल हरियाणा की राजनीति में लंबे समय से चल रहे बंसीलाल, देवीलाल, भजनलाल और फिर रणबीर सिंह के लाल भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवारवाद के शासन की समाप्ति के बाद एक और लाल मनोहर लाल प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालने जा रहे हैं। राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उन्हें शपथ लेने के […]
Author October 22, 2014 11:53 am
‘कांटों भरा ताज’ के समान होगा मनोहर लाल खट्टर के लिए मुख्यमंत्री पद (फोटो: भाषा)

पवन कुमार बंसल

हरियाणा की राजनीति में लंबे समय से चल रहे बंसीलाल, देवीलाल, भजनलाल और फिर रणबीर सिंह के लाल भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवारवाद के शासन की समाप्ति के बाद एक और लाल मनोहर लाल प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालने जा रहे हैं। राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उन्हें शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया है और वे रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार विधायक से मुख्यमंत्री बनने जा रहे मनोहर लाल खट्टर के लिए यह पद कांटों भरा ताज होगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा के आगे मुख्यमंत्री पद के आधा दर्जन दावेदारों ने खट्टर की नियुक्ति का स्वागत किया, लेकिन यह ऊपरी तौर पर ही है।

 

खट्टर के सामने मुख्यमंत्री पद के इन दावेदारों को संतुष्ट करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। खट्टर के लिए हुड्डा सरकार द्वारा राज्य के जिम्मे छोड़ा गया करोड़ों रुपए का कर्ज और पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में बुढ़ापा पेंशन व बेरोजगारी भत्ता जैसे वायदे पूरे करने के लिए साधन जुटाना भी बड़ी चुनौती होगी।

 

इसके अलावा हुड्डा के दस साल के कार्यकाल में अफसरशाही काफी बेलगाम हो गई थी और उस पर नियंत्रण कर उसे जनता के प्रति संवेदनशील बनाना होगा।

 

लंबे समय से राज्य में नेताओं और अफसरशाही की मिलीभगत से प्रदेश के साधनों को लूटा जा रहा है। इस लूट से चिंतित कुछ दिन पहले चर्चा के दौरान खट्टर ने कहा था कि यदि उन्हें राज्य की सेवा करने का मौका मिलता है तो वे लंबे समय से चल रही मलाई संस्कृति को खत्म कर ‘लस्सी कल्चर’ लागू करने की कोशिश करेंगे। खट्टर का कहना था कि मुख्यमंत्री सहित सभी नेता और अफसर व जनता मिल कर काम करें और दूध को बिलोएं। इससे जो मलाई निकलेगी उसका प्रयोग प्रदेश के विकास के लिए किया जाए व बची हुई लस्सी सभी अपने हिस्से के मुताबिक लें। चुनाव के दौरान पार्टी ने सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के गुडगांव में हुए सौदे की जांच करवाने का वायदा किया था, उस पर भी कार्रवाई करना बड़ी चुनौती है।

 

लंबे समय तक जाट मुख्यमंत्री रहते जाटों ने सत्ता का स्वाद चखा है और वे खट्टर का मुख्यमंत्री बनना पसंद नहीं करेंगे। वैसे खट्टर मोदी की तरह बीस घंटे काम करने वाले हैं। पिछले दिनों उन्होंने बताया था कि यदि वे मुख्यमंत्री बनते हैं तो सरकार ऐसा सॉफ्टवेयर बनाएगी जिसके माध्यम से लोग अपनी शिकायत सरकार को भेज सकेंगे। एक बार शिकायत मिलने पर उस पर कार्रवाई करके अफसर शिकायतकर्ता को सूचित करेंगे। योग्यता के आधार पर नौकरी देना भी खट्टर के लिए बड़ी चुनौती होगी।

 

 

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