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जजों की नियुक्ति पर केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट में ठनी, SC ने कहा- क्यों न कोर्ट में ताला लगा दिया जाय?

चीफ जस्टिस ठाकुर ने पूछा, केंद्र सरकार बताए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों की सूची का क्या हुआ? सरकार 9 महीने से इस सूची पर क्यों बैठी है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने मामले में खुद नोटिस लेकर अपनी पावर अॉफ रिविजन का अतिक्रमण किया है।

देशभर के हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट में ठन गई है। शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और पूछा है कि क्यों न कोर्ट में ताला लगा दिया जाय? कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रशासनिक उदासीनता इस संस्थान को खराब कर रही है। आज हालात ये हैं कि कोर्ट को ताला लगाना पड़ा है। कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट में पूरा ग्राउंड फ्लोर बंद है। क्यों ना पूरे संस्थान को ताला लगा दिया जाए और लोगों को न्याय देना बंद कर दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को ईगो का मुद्दा ना बनाए। हम नहीं चाहते कि हालात ऐसे हों कि एक संस्थान दूसरे संस्थान के आमने-सामने हों। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बचाने की कोशिश होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस ठाकुर ने कहा, हम बड़े सब्र से काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार बताए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों की सूची का क्या हुआ? सरकार 9 महीने से इस सूची पर क्यों बैठी है? अगर सरकार को इन नामों पर कोई दिक्कत है तो हमें भेजें, फिर से विचार करेंगे? कोर्ट ने कहा कि काम करने की अगर यही रफ्तार रही तो पीएमओ और कानून मंत्रालय के सचिवों को समन भेजकर यहां बुलाया जाएगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टी एस ठाकुर ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में 160 में से केवल 77 जज काम कर रहे हैं जबकि छतीसगढ़ हाईकोर्ट में 22 में से 8 जज काम कर रहे हैं। इस पर केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, हाईकोर्ट के जजों की सूची में कई नाम हैं जो सही नहीं हैं। सरकार ने 88 नाम तय किए हैं उनपर सरकार एमओपी तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि एमओपी तैयार होते ही इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस महीने के शुरुआत में केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वादा किया था कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उसे जल्द निपटाया जाएगा।

वीडियो देखिए-सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़

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  1. S
    Syed Ashish Ali Hindustani
    Oct 30, 2016 at 6:27 pm
    Chhatisghar me dusare state ke..J.J..jo.. ko bheja jaye or yaha ke ...J.J. ko... Dusare. State me take local juj local stAte me Na Rahe......
    Reply
  2. N
    Narendra Batra
    Oct 29, 2016 at 12:01 pm
    तुम जब तक जुटे नहीं खाओगे तब तक नहीं सुधरोगे अपने नाजायज बापो की कलेजियाँ के द्वारा भर्ती करते हो हरामियों जब विधि मंत्रालय ने लोकसभा और राज्य सभा से कानून बनाया और राटरपति ने उस पर सिग्नेचर किया तो तुम नीच कम्मे राष्ट्रपति से ऊपर हो जबकि भारतीय कानून में सब राष्ट्रपति के अंदर होते है तुम उसके खिल;ऑफ फैसला कैसे दे सकते जो उसके लिए जिस पीनल ने ये फैसला दिया उसे बीच इंडिया गेट पर गोलियों से क्यों न उदा दिया जाये हो और पुतानी हरमी सर्कार के पिछलगू हो ी आदमी नहीं हो तुम लोग भी
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  3. S
    sanjay
    Oct 28, 2016 at 10:59 am
    जजो की संख्या वास्तव में बहुत कम है लेकिन यह समस्या दो साल से नहीं बल्कि ७० सालो से विद्यमान है ! यहाँ यह बात कहनी होगी की मोदीजी ने मई २०१४ को संसद में कहा था की गरीबो को न्याय मिले लेकिन न्याय हेतु केस कोर्ट में इतने पेंडिंग है इसके लिए जजो को नींद कैसे आ जाती है यदि वे दो घंटे अतिरिक्त कार्य करते तो पूरा देश ही नहीं विश्व उनको सलाम करता,दूसरा मोदीजी ने कहा था की बैंको ने गरीबो को बाहर क्यों रखा जबकि सरकारी बैंको का राष्ट्रीयकरण गरीबो के लिए हुआ था !इन दो कारणों से मोदीजी बहुत दुखी है !
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  4. S
    shivshankar
    Oct 28, 2016 at 12:02 pm
    संजय जी आप दुनिया को धृतराष्ट्र समझ रहें हैं
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  5. D
    deepak shukla
    Oct 28, 2016 at 11:03 am
    What is your opinion?iय दि कार्यपालिका भ्रष्ट हो सकती है बिधायिका भ्रष्ट हो सकती है तो न्यायपालिका क्यों नहीं
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