April 29, 2017

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भारत में ही बनेंगे पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान ‘सुपरक्रूज’ और ‘स्टील्थ’

पांचवीं पीढ़ी के विमानों का निर्माण शुरू होते ही भारत अमेरिका, रूस, चीन और जापान के क्लब में शामिल हो जाएगा।

Author नई दिल्ली | October 27, 2016 03:31 am
भारतीय वायु सेना का लड़ाकू विमान। (फाइल फोटो)

भारत में पांचवी पीढ़ी के दो इंजन वाले ‘सुपरक्रूज’ और ‘स्टील्थ’ लड़ाकू विमानों के उत्पादन की तैयारी है। सबसे आधुनिक रडार, संचार और आयुध प्रणाली से लैस मैक-2ए की रफ्तार वाले ऐसे 144 विमान 2022 तक वायुसेना के बेड़े में शामिल कर लिए जाएंगे। साथ ही, भारतीय प्रोडक्शन लाइन में बने विमानों का निर्यात भी किया जाएगा। रूस के साथ संयुक्त उपक्रम अगले साथ आस्तित्व में आ जाएगा। रूसी सुखोई और रोसोबोरोनेक्सपोर्ट के साथ भारत सरकार की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड मिलकर पहली खेप में भारतीय वायुसेना के लिए 144 और रूसी वायुसेना के लिए 250 ऐसे विमान तैयार करेंगे। इन विमानों से भारत में तैयार किए गए ब्राह्मोस मिसाइल और अस्त्र (बियांड विजुअल रेंज मिसाइल- बीवीआर) समेत लंबी दूरी के हवा से हवा में, हवा से जमीन पर और हवा से पानी में मार कर सकने वाली मिसाइल दागी जा सकेंगी।

पांचवीं पीढ़ी के विमानों का निर्माण शुरू होते ही भारत अमेरिका, रूस, चीन और जापान के क्लब में शामिल हो जाएगा। ये सभी देश अपने यहां स्टील्थ विमान बना रहे हैं। भारत- रूस के संयुक्त उपक्रम वाली इस परियोजना को ‘पर्सपेक्टिव मल्टीरोल फाइटर (पीएमएफ) प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया है, जिसको लेकर रूस और भारत के बीच बातचीत अब अंतिम दौर में है। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू और वहां की रोस्टेक स्टेट कॉरपोरेशन के सीईओ सर्गेई शेमेजोव के साथ उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर आया है। आधिकारिक तौर पर इस यात्रा का मकसद पहले से घोषित एस-400 ‘ट्रायंफ’ एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली की खरीद का मसौदे पर मुहर लगाना है। लेकिन मुख्य एजंडा पीएमएफ की महात्त्वाकांक्षी परियोजना को अंतिम रूप देना है। बुधवार को भारतीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रूसी प्रतिनिधिमंडल की बातचीत शुरू हुई। इस बातचीत में भारत और रूस के बीच कार्य विभाजन, तकनीकी हस्तांतरण और प्रोटोटाइप की सप्लाई को अंतिम रूप दिया जाना है। दिसंबर में इन विमानों के एमओयू पर दस्तखत कर लिए जाने की तैयारी है।

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संयुक्त उपक्रम के लिए भारत अपनी ओर से 3.7 अरब अमेरिकी डॉलर का भुगतान करेगा, जिसके एवज में भारत सरकार की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (हॉल) को रूसी कंपनियां तकनीक का हस्तांतरण करेंगी और विमानों के तीन प्रोटोटाइप सौंपेंगी। रूस ने पहले इसके लिए छह अरब डॉलर की मांग रखी थी। रक्षा मंत्री के मॉस्को दौरे में भारत ने कीमत और वायुसेना की तकनीकी जरूरतों के बारे में बताया था, जिसपर पिछले छह महीने से बातचीत चल रही थी। इन प्रोटोटाइप को रूसी सुखोई ने भारतीय वायुसेना के द्वारा सुझाए गए 43 सुधार कर तैयार किया है।

रक्षा मंत्रालय के एक आला अधिकारी के अनुसार, इस परियोजना की दो दर्जन पेज की प्राथमिक रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिस पर फरवरी से बातचीत चल रही थी। दोनों देशों के विशेषज्ञों ने 650 पेज की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिस पर उच्चस्तरीय बातचीत चल रही है। रूस में विकसित पांचवीं पीढ़ी के ‘पीएके एफए टी-50’ की पेशकश भारत के सामने वहां के रोस्टेक कॉरपोरेशन (आयुध और उपकरण तैयार करने वाली 700 कंपनियों का समूह) की ओर से आई थी। भारतीय वायुसेना ने इसमें इंजन, मारक क्षमता, आयुध-वहन क्षमता और रडार प्रणाली में सुधार सुझाए थे।

वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका ने एफ-85 सेबर, एफ-104 स्टारफाइटर और एफ-16 फॉल्कल श्रेणी वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (एफजेएफए) की सीरीज विकसित कर रखी है। चीन ने अपने जे-31 विमानों को अपनी वायुसेना में तैनात तो किया ही है, सस्ते में पाकिस्तानी वायुसेना को बेचने की पेशकश की है। इन तैयारियों के मद्देनजर भारत में एफजेएफए को लेकर जरूरत महसूस की जा रही थी। इन विमानों में अल्टावॉयलेट वार्निंग सेंसर लगे होंगे, इंफ्रारेड मिसाइलों से बचने के लिए लेजर आधारित उपकरण होंगे, इसमें एईएसए रडार प्रणाली और बहुउद्देश्यीय रेडियो इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली (मायर्स) लगी होगी।

दो इंजन वाले इन विमानों के साथ वायुसेना के एमआइ-17वी5 हेलीकॉप्टरों में लगाने के लिए 200 सेट्स अत्याधुनिक उपकरणों के सौदे पर भी बात होगी। एमआई-17वी 5 हेलीकॉप्टरों को ‘रडार वार्निंग रिसीवर (आरडब्ल्यूआर)’, ‘मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम (मॉवज)’, ‘काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम (सीएमडीएस)’ लैस करने की योजना है, जिससे उसकी मारक क्षमता बढ़ जाएगी। इसके अलावा रूस ने अपनी ओर से छह पारंपरिक पनडुब्बियां भारत को बेचने की पेशकश की है, जिनमें ‘एयर इंडिपेंडेंस प्रोपल्शन सिस्टम’ लगा होगा। साथ ही भारत के पी 75-1 प्रोजेक्ट के तहत सुखोई-30 एमके 1 विमानों का अपग्रेडेशन किया जाना है।

 

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First Published on October 27, 2016 3:31 am

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