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आपात्काल स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय: राम नाईक

उत्तरप्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय करार देते हुए आज कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा ना आने देने के लिये निरन्तर जागरूकता की आवश्यकता है और यही लोकतंत्र की मांग भी है। नाईक ने इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग
Author June 26, 2015 18:39 pm
उत्तरप्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय करार देते हुए आज कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा ना आने देने के लिये निरन्तर जागरूकता की आवश्यकता है और यही लोकतंत्र की मांग भी है।

उत्तरप्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय करार देते हुए आज कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा ना आने देने के लिये निरन्तर जागरूकता की आवश्यकता है और यही लोकतंत्र की मांग भी है।
नाईक ने इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स द्वारा आपातकाल की 40वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आपातकाल आजादी के बाद देश के इतिहास का सबसे काला अध्याय था और उससे देश का बड़ा नुकसान हुआ।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चीजों को अपने हाथ से जाते देखकर देश पर आपातकाल थोपा था। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा ना उत्पन्न हो, इसके लिये निरन्तर जागरूकता की आवश्यकता है। यह जरूरत कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी। यही लोकतंत्र की मांग भी है।

नाईक ने एक सवाल पर कहा कि स्वाधीनता आंदोलन की तरह आपातकाल के घटनाक्रमों को भी विद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिये ताकि नयी पीढ़ियां लोकतंत्र की आजादी की दूसरी लड़ाई के इतिहास के बारे में जान सकें।

आपातकाल को लेकर गठित शाह आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किये जाने की मांग तथा लोकतंत्र के हननकारी उस घटना के लिये जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं मिलने सम्बन्धी सवालों पर राज्यपाल ने कहा कि आपातकाल के दो साल बाद जनता से लोकसभा चुनाव में अपना निर्णय सुनाकर दोषी लोगों को सजा दे दी। आरोप-प्रत्यारोप से बेहतर है कि हम सजग रहें।

आपातकाल को अपनी जिंदगी का ‘टर्निंग प्वाइंट’ बताते हुए नाईक ने कहा कि अगर वह स्थिति नहीं आती तो वह चुनावी राजनीति में नहीं आते।

राज्यपाल ने कहा कि आजकल पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं। शायद ऐसा इसलिये हो रहा है क्योंकि पत्रकार समाज की ऐसी चीजों को सामने लाते हैं, जो अक्सर कुछ लोगों को अच्छी नहीं लगतीं। पत्रकारों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, वह सरकार चाहे कहीं की भी हो।

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