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चुनाव आयुक्त की खरी-खरी: नैतिकता की परवाह बिना, किसी भी तरह चुनाव जीतने पर आमादा हैं पार्टियां

चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि पेड न्यूज को दंडनीय अपराध बनाया जाना चाहिए।
यूपी विधान सभा चुनाव के दौरान मतदान की लाइन में लगे वोटर।(photo source – Indian express)

गुजरात की तीन राज्य सभा सीटों के लिए हुए चुनाव में दो कांग्रेसी विधायकों के मत को रद्द करने के लिए अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करने के करीब 10 दिन बाद चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने गुरुवार (17 अगस्त) को “राजनीति में आ रही गिरावट के सामान्य बात होते जाने” पर बोला। रावत ने कहा, “लोकतंत्र तब फलता-फूलता है जब चुनाव पारदर्शी, निष्पक्ष और मुक्त हों। लेकिन ऐसा लगता है कि छिन्द्रान्वेषी आम आदमी सबसे ज्यादा जोर इस बात पर देता है कि उसे हर हाल में जीत हासिल करनी है और खुद को नैतिक आग्रहों से मुक्त रखता है।” चुनाव आयुक्त एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा आयोजित कार्यक्रम “कंसल्टेशन ऑन इलेक्टोरल एंड पोलिटिकल रिफॉर्म्स” में बीज-वक्तव्य दे रहे थे।

रावत ने कहा, “इसमें विधायकों-सांसदों की खरीदफरोख्त को स्मार्ट पोलिटिकल मैनेजमैंट माना जाता है, पैसे और सत्ता के दुरुपयोग इत्यादि को संसाधन माना जाता है।” रावत ने कहा, “चुनाव जीतने वाले ने कोई पाप नहीं किया होता क्योंकि चुनाव जीतते ही उसके सारे पाप धुल जाते हैं। राजनीति में अब ये “सामान्य स्वभाव” बन चुका है। जिन लोगों को भी बेहतर चुनाव और बेहतर कल की उम्मीद है उन्हें राजनीतिक दलों, राजनेताओं, मीडिया, सिविल सोसाइटी, संवैधानिक संस्थाओं के लिए एक अनुकरणीय व्यवहार का मानदंड तय करना चाहिए। ”

रावत का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गुजरात राज्य सभा चुनाव में पैसे और पॉवर के दुरुपयोग के आरोप लगे। आठ अगस्त को हुए चुनाव से पहले कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। कांग्रेस प्रत्याशी अहमद पटेल हारने से बाल-बाल बचे। कांग्रेस ने पटेल की जीत तय करने के लिए अपने बाकी बचे 44 विधायकों को कर्नाटक के एक रिसॉर्ट में भेज दिया था। उसके कुछ ही दिन बाद आयकर विभाग ने कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार की पूरे देश में स्थित 60 परिसंपत्तियों पर छापा मारा। कांग्रेसी विधायक जिस रिसॉर्ट में रुके थे उसके मालिक शिवकुमार ही थे। छापे के वक्त को देखते हुए कांग्रेस ने बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से भी संरक्षण मांगा था।

गुजरात कांग्रेस के नेता शक्ति सिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि भोलाभाई गोहिल और राघवजीभाई पटेल ने राज्य चुनाव में अपना वोट डालने से पहले मतपत्र बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को दिखाया था। अमित शाह खुद भी राज्य सभा चुनाव में प्रत्याशी थे। बीजेपी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को चुनाव आयोग भेजा था लेकिन आयोग ने कांग्रेस की याचिका स्वीकार करते हुए दोनों विधायकों के वोट रद्द कर दिए। आयोग ने माना कि आधिकारिक एजेंट को छोड़कर किसी और मतपत्र दिखाने से गोपनीयता का कानून भंग हुआ है। रावत ने अपने भाषण में पेड न्यूज का भी मुद्दा उठाया और इसे दंडनीय अपराध बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया।

एडीआर ने साल 2012 से 2016 तक राजनीतिक दलों को मिले चंदे का विश्लेषण किया है- 

 

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