ताज़ा खबर
 

कांग्रेस, भाजपा और दिल्ली सरकार नहीं बन सकती पक्षकार

आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के लाभ के पद से जुड़े मामले में कांग्रेस, भाजपा और दिल्ली सरकार की पक्षकार बनाए जाने संबंधी याचिकाओं को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है।
Author नई दिल्ली | July 28, 2016 01:32 am

आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के लाभ के पद से जुड़े मामले में कांग्रेस, भाजपा और दिल्ली सरकार की पक्षकार बनाए जाने संबंधी याचिकाओं को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। संसदीय सचिव का पद संभालने को लेकर आप विधायकों की विधानसभा सदस्यता समाप्त किए जाने की मांग से संबंधित याचिका चुनाव आयोग के समक्ष है।

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और दिल्ली सरकार की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह एक रेफरेंस केस है जिसकी कार्यवाही में उनके हस्तक्षेप की याचिका को अनुमति नहीं दी जा सकती है, लेकिन आयोग जरूरत पड़ने पर उनकी मदद ले सकता है। आयोग ने कहा है, ‘वर्तमान मामले की कार्यवाही में दिनांक 10 नवंबर, 2015 के प्रेसिडेंसियल रिफरेंस द्वारा पक्षकारों का निर्धारण हो चुका है, जिसमें एडवोकेट प्रशांत पटेल याचिकाकर्ता हैं और दिल्ली विधानसभा के 21 विधायक, जिनका नाम प्रशांत पटेल के 19 जून, 2015 के रिप्रजेंटेशन में दिया गया है, प्रतिवादी हैं’।

विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग से संबंधित याचिका दायर करने वाले प्रशांत पटेल ने कांग्रेस, भाजपा और दिल्ली सरकार को पक्षकार बनाए जाने का विरोध किया था। उनकी दलील थी कि ऐसा हुआ तो मामला राजनीतिक रंग ले जाएगा। साथ ही प्रशांत पटेल का कहना था कि दिल्ली सरकार के पक्षकार बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं क्योंकि इस मामले में सरकार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती, केवल उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है जिन्हें नियुक्त किया गया है।

इसके साथ ही विधानसभा की सदस्यता गंवाने के खतरे से जूझ रहे आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों ने भी कांग्रेस और भाजपा को पक्षकार बनाए जाने की मांग का विरोध किया था, लेकिन वे दिल्ली सरकार के पक्षकार बनाए जाने के समर्थन में थे। आप विधायक मदनलाल ने कहा, ‘राजनीतिक दलों की याचिकाएं खारिज किया जाना तो ठीक है, लेकिन दिल्ली सरकार का पक्षकार रहना जरूरी था क्योंकि सरकार ने ही संसदीय सचिव नियुक्त किए थे, सारे प्रामाणिक दस्तावेज वही प्रदान कर सकती है’।

उधर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस फैसले को अपनी जीत बताया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा, ‘आयोग ने आप विधायकों के खिलाप लाभ के पद को लेकर चल रही सुनवाई में जरूरत पड़ने पर अपना पक्ष रखने की मंजूरी दी है, यह पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए बहुत बड़ी जीत है और हम इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे और तय करेंगे कि इन 21 विधायकों की सदस्यता रद्द हो और खाली सीटों पर दोबारा चुनाव कराए जाएं’।

3 मार्च 2015 को दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को मंत्रियों के संसदीय सचिव बनाने की घोषणा की थी और इस संबंध में अधिसूचना जारी किया था। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा सदस्यता (अयोग्यता का प्रावधान खत्म करने) अधिनियम, 1997 में संशोधन करके संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से बाहर निकालने का भी प्रयास किया। लेकिन, राष्ट्रपति ने इस विधेयक को खारिज करके लौटा दिया। इस बीच प्रशांत पटेल नाम के वकील ने राष्ट्रपति के पास इन विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका डाली। राष्ट्रपति ने यह याचिका चुनाव आयोग को भेजी और इस पर कार्रवाई करके रिपोर्ट देने को कहा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.