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आरटीआइ से खुलासा: एटीएम शुल्क से स्टेट बैंक की कमाई 378 फीसद बढ़ी

आरटीआइ से यह भी पता चलता है कि वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में एसबीआइ ने एटीएम व्यवहार शुल्क से 413.45 करोड़ रुपए की कमाई की। इसी तिमाही में आठ नवंबर को 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोट बंद किए जाने की घोषणा की गई थी।
Author इंदौर | August 8, 2017 00:47 am
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (File photo)

एटीएम व्यवहार के मुफ्त अवसर खत्म होने के बाद इसके इस्तेमाल पर खाताधारकों से वसूले जाने वाले शुल्क से देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) की होने वाली आय वित्त वर्ष 2016-17 में 378 फीसद के भारी उछाल के साथ 1484.10 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई। वित्त वर्ष 2015-16 में एसबीआइ ने एटीएम व्यवहार शुल्क से 310.44 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रशेखर गौड़ ने सोमवार को बताया कि उन्हें सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत यह जानकारी मिली है। आरटीआइ से यह भी पता चलता है कि वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में एसबीआइ ने एटीएम व्यवहार शुल्क से 413.45 करोड़ रुपए की कमाई की। इसी तिमाही में आठ नवंबर को 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोट बंद किए जाने की घोषणा की गई थी।

गौड़ ने कहा- नोटबंदी के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को सलाह दी थी कि वे 10 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 तक बचत खाता धारकों के लिए एटीएम व्यवहार शुल्क माफ कर सकते हैं। ऐसे में यह खुलासा अहम है कि पिछले वित्त वर्ष की जिस तीसरी तिमाही में विमुद्रीकरण का कदम उठाया गया, उसमें एसबीआइ ने पहली और दूसरी तिमाही से भी ज्यादा एटीएम व्यवहार शुल्क ग्राहकों से वसूलकर अपना खजाना भरा। आरटीआइ के तहत भेजे गए एक अन्य जवाब में गौड़ को बताया गया कि जिन एसबीआइ ग्राहकों के खातों में मासिक औसत जमा राशि 25,000 रुपए से अधिक है, वे बिना किसी प्रभार के एसबीआई के एटीएम से असीमित संख्या में निकासी या लेन-देन कर सकते हैं, जबकि दूसरे बैंकों के एटीएम से निकासी की मुफ्त मासिक सीमा महानगरों में तीन बार और अन्य स्थानों में पांच बार तय की गई है।

उन्होंने कहा- गरीब तबके के लोगों और घर से दूर रहकर पढ़ रहे युवाओं पर एसबीआइ का यह नियम भारी पड़ रहा है, क्योंकि अक्सर उनके खातों में मासिक औसत जमा 25,000 रुपए से कम होता है. उन्हें अपनी जरूरतों के मुताबिक एटीएम से बार-बार छोटी रकम निकालनी होती है। ऐसे में मुफ्त सीमा के अवसर समाप्त होने के बाद एटीएम व्यवहार शुल्क के रूप में उनके खाते से लगातार रकम कटती रहती है। गौड़ ने कहा कि मुफ्त सीमा के अवसर समाप्त होने के बाद एटीएम से गैर वित्तीय व्यवहार जैसे-पिन बदलना, जमा राशि पता करना, छोटा खाता ब्योरा (मिनी स्टेटमेंट) निकालना वगैरह पर भी एसबीआइ की ओर से शुल्क वसूली की जाती है। उन्होंने मांग की कि एसबीआइ को एटीएम के उपयोग के मुफ्त अवसर बढ़ाकर आम ग्राहकों को राहत देनी चाहिए।

 

 

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