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LOC पर तैनात जवानों का मंत्र होता है ‘दुश्मन शिकार, हम शिकारी’

नियंत्रण रेखा (LOC) पर पूरी मुस्तैदी से सरहदों की रखवाली कर रहे सेना के अचूक निशानेबाजों के लिए ड्यूटी का मंत्र ‘दुश्मन शिकार, हम शिकारी’ है।
Author October 11, 2016 20:39 pm
इंडियन आर्मी का एक जवान। (Representational photo)

नियंत्रण रेखा (LOC) पर पूरी मुस्तैदी से सरहदों की रखवाली कर रहे सेना के अचूक निशानेबाजों के लिए ड्यूटी का मंत्र ‘दुश्मन शिकार, हम शिकारी’ है। दरअसल, यहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से लगी सीमा पर गश्त लगा रहे जवानों के निकट लगे प्लाईबोर्ड पर ‘दुश्मन शिकार, हम शिकारी’ लिखा हुआ है। एलओसी पर तैनात निशानेबाजों और सैनिकों के हौसले पीओके में आतंकी ठिकानों पर लक्षित हमले होने के बाद से बुलंद हैं। वे पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन किए जाने का जवाब देने और आतंकवादियों और सीमा कार्रवाई दलों (बीएटी) के घुसपैठ के प्रयासों को नाकाम करने के लिए हर पल तत्पर हैं। सीमा पर तीन स्तरीय बाड़ के निकट देवदार के पेड़ पर टंगे प्लाईबोर्ड की ओर इशारा करते हुए निशानेबाज राम सिंह (बदला हुआ नाम) कहते हैं, ‘‘लक्ष्मण रेखा (एलओसी) के उस पार मौजूद दुश्मन मेरा शिकार है और मैं उसका शिकारी हूं। हम लक्ष्मण रेखा को पार करने की जुर्रत करने वालों के लिए इसी मकसद के साथ काम करते हैं।’’

सिंह और यहां तैनात दूसरे निशानेबाज बहुत अच्छी तरह प्रशिक्षित और सटीक निशाना लगाने वाले सैनिक हैं। निशानेबाजों की तरह दूसरे जवानों और अधिकारियों का लक्ष्य भी अलग नहीं है। वे राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में सीमा पर पैदल गश्त के साथ इलेक्ट्रानिक निगरानी भी बनाए हुए हैं। कभी नौशेरा सेक्टर सबसे अधिक घुसपैठ वाला इलाका था और इसके निकट सीमा के उस पार कई आतंकी ठिकाने और प्रशिक्षण शिविर थे। अग्रिम चौकी पर तैनात एक और सैनिक ने कहा, ‘‘हम एलओसी पर बहुत चौकस हैं। हम एक क्षण के लिए एलओसी को इलेक्ट्रानिक निगरानी और अपनी निगाहों से ओझल नहीं कर सकते। हम पाकिस्तानी सैनिकों पर विश्वास नहीं कर सकते। वे लक्षित हमले के बाद अपमानित हैं।’’

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एलओसी पर हो रही इलेक्ट्रानिक निगरानी को दिखाते हुए कंपनी कमांडर ने कहा, ‘‘हम एलओसी, अग्रिम चौकियों और सीमा पर मौजूद संवेदनशील खाली स्थानों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।’’

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