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‘पियक्कड़ चालकों को पहले गुनाह में ही छह माह की सजा’

सड़क हादसों में लगातार बढ़ती मौतों से चिंतित सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरी निर्देश दिए हैं।
Author August 21, 2015 09:27 am
सड़क हादसों में लगातार बढ़ती मौतों से चिंतित सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरी निर्देश दिए हैं। (फोटो: वसंत प्रभु)

सड़क हादसों में लगातार बढ़ती मौतों से चिंतित सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरी निर्देश दिए हैं। समिति ने यतायात नियम तोड़ने वालों को पकड़ने के अलावा जेल भेजने और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का निर्देश दिया है।

यातायात उल्लंघन में दी जाने वाली सजा के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाने और मोबाइल पर बात करने पर तीन माह के लिए लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान होगा। इसके अलावा शराब या ड्रग के नशे में गाड़ी चलाने पर छह माह तक की सजा हो सकती है, भले ही यह अपराध पहली बार किया गया हो।

राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो के आकड़ों के अनुसार, 2014 में एक लाख 41 हजार लोगों की जान सड़क हादसे में गई। यानी हर रोज 380 लोगों ने सड़क हादसे में जान गंवाई। इनमें से ज्यादातर मौतें अंधाधुध या तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई। समिति ने अधिकारियों से कहा है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर कोई नरमी न बरतें और पुलिस ऐसे गुनहगारों पर मुकदमा चलाए और जेल की सजा दिलाए। भले ही उसने शराब-ड्रग के नशे में यह अपराध पहली बार किया हो। इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश केएस राधाकृष्णन हैं।

मोटर वाहन कानून की धारा 185 के तहत कोई व्यक्ति अगर शराब के नशे या ड्रग के नशे में वाहन चलाता है और वाहन पर नियंत्रण रखने में असमर्थ है तो उसे छह माह तक की सजा हो सकती है। भले ही नशेबाज चालक का यह पहला अपराध हो। इस तरह के लगातर अपराध पर सजा दो साल तक हो सकती है।

वाहन चालकों की गलतियों के कारण बढ़ रहे इस तरह के हादसों पर चिंता जताते हुए समिति ने राज्य सरकारों से कहा कि ऐसे चालकों का लाइसेंस कम से कम तीन माह के लिए रद्द कर दिया जाए। इसके अलावा अंधाधुध वाहन चलाने, यातायात सिग्नल तोड़ने, ढुलाई वाहनों में लोगों को बैठाने, जरूरत से ज्यादा सामान लाद कर ले जाने पर लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए।

लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शाहिद बिलाल हसन ने सईद के वकील और सरकार के विधि अधिकारी की दलीलों को सुनने के बाद पाकिस्तान के सिनेमाघरों में सैफ अली खान अभिनीत इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। आगामी 28 अगस्त को रिलीज होने जा रही फिल्म पर संक्षिप्त आदेश जारी करने से पहले न्यायाधीश ने कहा था कि भारतीय फिल्में और अन्य फिल्में रिलीज होने के बाद आसानी से बाजार में उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, अगर सिनेमाघरों में फिल्म पर पाबंदी लगा भी दी जाती है तो इसे सीडी के रूप में बाजार में उपलब्ध होने से रोकने के लिए सरकार क्या कर सकती है। उच्च न्यायालय में आठ अगस्त को दाखिल याचिका में सईद के वकील एके डोगर ने आरोप लगाया, फिल्म के ट्रेलर की विषयवस्तु से याचिकाकर्ता और उसके साथियों की जान को सीधा खतरा है।

उन्होंने कहा, जाहिर है कि अनेक भारतीय अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के मुंह से निकले संवाद पाकिस्तान की जनता के दिमाग में जहर घोलेंगे और हाफिज सईद को आतंकवादी चित्रित करेंगे जबकि जमात-उद-दावा को प्रतिबंधित संगठन घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने अदालत से पाकिस्तानी सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की गुहार लगाई। न्यायमूर्ति शाहिद बिलाल हसन ने कहा कि भारतीय फिल्में और अन्य फिल्में रिलीज होने के बाद आसानी से बाजार में उपलब्ध हैं।

लेखक हुसैन जैदी के उपन्यास ‘मुंबई अवेंजर्स’ पर आधारित ‘फैंटम’ 26-11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद की स्थिति पर बनी है और वैश्विक आतंकवाद की बात करती है।

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