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SP ORG-अखिलेश सरकार के बीच लगातार बढ़ रही दूरियां, सिर्फ जिंदाबाद के लिए बचा संगठन

उत्तर प्रदेश के पुर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में सपा के जिला अध्यक्षों की हैसियत कैबिनेट मंत्री के बराबर थी, लेकिन अखिलेश यादव की सरकार में सपा के जिला अध्यक्षों की हैसियत नहीं के बराबर है।
Author अमेठी/ लखनऊ | February 18, 2016 02:21 am
UP सीएम अखिलेश यादाव

उत्तर प्रदेश के पुर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में सपा के जिला अध्यक्षों की हैसियत कैबिनेट मंत्री के बराबर थी, लेकिन अखिलेश यादव की सरकार में सपा के जिला अध्यक्षों की हैसियत नहीं के बराबर है। संगठन केवल जिंदाबाद के लिए बचा है। संगठन के हशिए पर जाने से गरीब जनता का काम लगभग रुक गया है।

साल 2012 में अखिलेश सरकार आने के बाद पिछली सरकारों के फर्जी मुकदमों को वापस लेने का एलान किया गया था, लेकिन अखिलेश की सरकार इन वादों को भूल चुकी है। मुख्यमंत्री ने फर्जी मुकदमों से प्रभावित लोगों की अर्जी लेने की जिम्मेदारी जिला अध्यक्षों को सौंपी थी। आरोप है कि जिला अध्यक्षों ने बोरी भर कर ऐसी अर्जियां मुख्यमंत्री को सौंपी थी। लेकिन चार साल पूरा होने के बाद भी जिला अध्यक्षों की अर्जियों पर कोई विचार नहीं हो पाया है।

संगठन का कहना है कि इससे संगठन पूरी तरीके से खुद को अपमानित महसूस करता है। क्योंकि उनके पास आने-जाने में फरियादियों के जूते घिस चुके हैं। लेकिन इस सरकार की नौकरशाही जनता से मुलाकात करने को तैयार नहीं है। फर्जी मुकदमों को वापस लेने के लिए पांच सौ अर्जी केवल अमेठी जिले की है। मुख्यमंत्री के आदेश पर जनता की अजिर्यों में जिला अध्यक्षों के हस्ताक्षरयुक्त लेटर पैड भेजे गए, लेकिन अब तक शासन में किसी भी पत्रावली पर विचार नहीं हो पाया है। जिससे जनता भी अखिलेश सरकार की नौकरशाही से त्रस्त है।
फर्जी मुकदमों की वापसी पर अमेठी के जिला अध्यक्ष छोटेलाल यादव ने कहा कि चार साल में दर्जनों बार मुख्यमंत्री कार्यालय को ज्ञापन सौंपे गए हैं। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। इससे जनता के बीच काम करने वाले कार्यकर्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बाद मुलायम सिंह यादव ने भी परशुराम जयंती पर फर्जी मुकदमों को वापस लेने का एलान किया था। देखा जा रहा है कि उनका आदेश भी इस सरकार में बैठे अफसर नहीं सुनते। वे इस सरकार के काम- काज पर आए दिन सवाल जबाब कर रहे हैं। लेकिन अब तक सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है।

जनता का आरोप है कि सपा अपने चुनावी एजंडे को भूल चुकी है, जिससे आम जनता विकास से दूर हो गई है। अमेठी में यादव महासभा के जिला अध्यक्ष शिव प्रताप यादव ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की बैठक में बनारस के जिला अध्यक्ष रो पड़े। मुलायम सिंह के पूछने पर उन्होंने उपेक्षित होने का दर्द बताया था। हालांकि अब तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। बनारस के जिला अध्यक्ष ने कहा था कि शासन में बैठे अफसर संगठन की बात नहीं सुनते, जबकि विधायकों और मंत्रियों के काम धड़ाधड़ करते हैं।

विधायक और मंत्रियों को संगठन से कोई सरोकार नहीं है। यादव ने कहा कि संगठन के उपेक्षित होने से वे यादव समाज को लेकर बसपा में चले गए हैं। बसपा ने उन्हें अमेठी से विधानसभा का टिकट देने का एलान कर दिया है। माना जा रहा है कि इससे अमेठी में अब यादव सपा के बजाय बसपा में चला गया है। समाजवादी पार्टी से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा कि प्रदेश भर में जिला अध्यक्ष केवल नाम के बचे हैं। वे कहते हैं कि सपा के विधायक और मंत्री बेलगाम हो चुके हैं।

वे जिला अध्यक्षों को किनारा कर खुद सरकार चला रहे हैं। इस पर अमेठी के पूर्व जिला अध्यक्ष मुन्ना सिंह ने कहा कि पहले मुलायम सिंह यादव की सरकार में जिला अध्यक्षों से हर काम पर राय मांगी जाती थी। लेकिन अखिलेश की सरकार में संगठन से कोई लेना देना नहीं है। पहले शासन में बैठे लोग जिला अध्यक्षों से कानून व्यवस्था की पड़ताल भी करते थे। अब डीएम और एसपी के काम काज पर राय भी नहीं मांगी जाती। जिला अध्यक्षों के लेटर पैड को मुख्यमंत्री कार्यालय किनारे कर देता है। मुख्यमंत्री को इसकी भनक तक नहीं है। साल 2017 में विधानसभा का चुनाव है। लेकिन विधायकों और मंत्रियों को पार्टी के नफा और नुकसान से भी कोई सरोकार नहीं है। अमेठी में इससे भी बुरा हाल कांग्रेस भाजपा और बसपा का है। इन दलों का संगठन भी पूरी तरीके से बिखर चुका है।

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