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कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने पर भाजपा-पीडीपी में मतभेद

कश्मीरी विस्थापितों को बसाने के बारे में पीडीपी-भाजपा गठबंधन के बीच से ही विभिन्न मत सामने आने के बीच केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज संकेत दिये कि घाटी में विस्थापित समुदाय को फिर से बसाने के लिए अलग से बस्ती बनाने की योजना से पीछे नहीं हटा जायेगा। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, […]
Author April 9, 2015 16:38 pm

कश्मीरी विस्थापितों को बसाने के बारे में पीडीपी-भाजपा गठबंधन के बीच से ही विभिन्न मत सामने आने के बीच केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज संकेत दिये कि घाटी में विस्थापित समुदाय को फिर से बसाने के लिए अलग से बस्ती बनाने की योजना से पीछे नहीं हटा जायेगा।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता। कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए केन्द्र सरकार द्वारा जो भी निर्णय किया गया है, वही निर्णय कायम है। हमारी जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री से अच्छी बातचीत हुई (इस मुद्दे पर)।’’

सिंह की यह टिप्पणी जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद द्वारा आज दिन में राज्य विधानसभा में किये गये इस दावे के बाद आयी कि कश्मीरी पंडितों के लिए अलग बस्ती की कोई योजना नहीं है।

मंगलवार को नयी दिल्ली में एक बैठक के दौरान सिंह ने सईद से कहा था कि कश्मीरी पंडितों के लिए समग्र टाउनशिप बसाने के मकसद से राज्य में भूमि मुहैया करायी जाये। मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को अश्वासन दिया था कि राज्य सरकार घाटी में समग्र टाउनशिप के लिए यथाशीघ्र जमीन अधिग्रहीत करेगी और मुहैया करायेगी।

सिंह ने कहा, ‘‘चिंता मत करिये, हम कश्मीरी पंडितों एवं वहां रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। हम इन सब बातों को ध्यान में रखकर एक कार्ययोजना तैयार करेंगे।’’ उन्होंने यहां सीआरपीएफ के समारोह से इतर बातचीत में सईद के बयान पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर कही।

विधानसभा में अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए सईद ने कहा, ‘‘मैंने केन्द्रीय गृह मंत्री से कहा कि वे (कश्मीरी पंडित) अलग से नहीं रह सकते (कश्मीरी घाटी में) और उन्हें मिलकर रहना होगा।’’

जम्मू कश्मीर के मुख्य विपक्षी दलों एवं अलगाववादी समूहों ने कहा कि यह कदम लोगों को बांट देगा और इससे सुरक्षा खतरे उत्पन्न होंगे। सिंह ने पूर्ववर्ती उमर अब्दुल्ला सरकार को एक पत्र लिखा था। इसके बाद राज्य के राज्यपाल एन एन वोहरा को एक अन्य सूचना भेजी जिसमें इस प्रकार के विस्थापितों के लिए जमीन की पहचान करने को कहा गया था।

फिलहाल देश में कश्मीरी विस्थापितों के 62 हजार पंजीकृत परिवार हैं। ये परिवार 1989 में राज्य में आतंकवाद के चलते घाटी से जम्मू, दिल्ली एवं देश के अन्य भागों में चले गये थे। राज्य के भाजपा-पीडीपी गठबंधन ने अपने साझा न्यूनतम कार्यक्रम में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास का उल्लेख किया है।

वर्ष 2015-16 के बजट में केन्द्र ने विस्थापित के पुनर्वास के लिए 580 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं।

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