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कांग्रेस में उठे विरोध के सुर: दिग्विजय बोले राहुल ने नहीं लिया एक्शन, थरूर ने कहा- बहुत हुआ

'आत्मनिरीक्षण बीते जमाने की बात हो गई है। अब एक्शन का वक्त है, 2014 में मिली हार के दो साल बाद तक हम लोग आत्मनिरीक्षण और चिंतन ही कर रहे हैं।'
Author नई दिल्ली | May 20, 2016 14:36 pm
कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी। (FILE PHOTO)

पांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनाव के बाद आए नतीजे कांग्रेस पार्टी के लिए अच्छे नहीं रहे। भले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हार स्वीकार करके लोगों ने निर्णय को मान लिया हो, पर अब पार्टी में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। पार्टी के दिग्गज नेता शशि थरूर और दिग्विजय सिंह आत्मचिंतन बंद करके अब एक्शन की मांग कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में शशि थरूर ने कहा, ‘आत्मनिरीक्षण बीते जमाने की बात हो गई है। अब एक्शन का वक्त है, 2014 में मिली हार के दो साल बाद तक हम लोग आत्मनिरीक्षण और चिंतन ही कर रहे हैं। अब ऐसे बदलाव करने का वक्त आ गया है जो लोगों को साफ तौर पर दिखाई दें।’

वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘हम लोगों ने बहुत आत्मनिरीक्षण कर लिया है। क्या अब हमें किसी बड़ी सर्जरी (बदलाव) के लिए नहीं जाना चाहिए।’

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इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में दिग्विजय ने कहा, ‘लोकसभा चुनाव के बाद हम सबसे अपने-अपने राज्य की एक रिपोर्ट तैयार करके जमा करवाने को कहा गया था। जिससे पार्टी आगे की रणनीति तैयार कर सके। रिपोर्ट देने की आखिरी तारीख 20 फरवरी 2015 थी। सभी लोगों के साथ मैंने भी रिपोर्ट जमा करवा दी। आज मई 2016 हो गई है, अबतक उस रिपोर्ट का कुछ पता नहीं है। सवाल यही है, पार्टी कब तक सिर्फ आत्मचिंतन में डूबी रहेगी।’

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इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने कहा कि असम की हार को हेमंत शर्मा को बाहर नहीं करके टाला जा सकता था। वहीं, असम से कांग्रेस के सीनियर नेता और केंद्र मंत्री रह चुके प्रबन सिंह घोटोवार का कहना है कि कांग्रेस अगर किसी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ती तो वह असम में नहीं हारती।

दोनों की बड़े नेताओं के बयान से साफ पता चलता है कि पार्टी में राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग अब जोर-शोर से उठने लगी है जिसे अब टाला नहीं जाना चाहिए। इन दोनों नेताओं के अलावा भी कई नेता ऐसे हैं जो मानते हैं कि राहुल को जल्द से जल्द अध्यक्ष बनकर पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए और अपनी एक नई टीम का निर्माण करना चाहिए।

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  1. J
    jai prakash
    May 20, 2016 at 8:31 am
    अभी उतर प्रदेश में चुनाब हे उसको भी देख लो फिर सोचना क्या करना हे विकास या फुट
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    Reply
    1. S
      sanjay
      May 20, 2016 at 10:00 am
      कांग्रेस का कमजोर होना बहुसंख्य समुदाय से किनारा करना वोटबैंक की चाल में फंसकर देश की सुरक्षा विकास से दूर होना और जनसंख्या वृद्दि पर कठोर कार्यवाही या निति नहीं बनाना उसकी हार के मुख्य कारण है ! यदि वह समय रहते इस पर कठोर निर्णय या कार्यवाही करती तो आज क्षे.पार्टिया वोटबैंक को अपने पाले में लेकर नहीं उभरती ! जिस वोटरों को कांग्रेस ने बढ़ाया आज वह कांग्रेस से रोटी कपड़ा मकान रोजगार सब्सिडी आदि मांग रहा है ! अब वह धीरे धीरे कांग्रेस से दुरी बना कर अन्य क्षे.दल से अपनी मांग को पूरा करवाना चाहते है !
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      Reply
      1. S
        sanjay
        May 20, 2016 at 8:22 am
        कांग्रेस को समझना पडेगा की यह देश हिन्दू संस्कृति हिन्दू समाज का है इस देश पर कई विदेशी लोगो ने विनाशकारी हे किये है और राज किया है और इस देश को बंधक बनाकर सोना चांदी और अन्य कीमती खजानों को लुटा है साथ ही इसकी पहचान इसकी संस्कृति को भी लुटा गया है!कांग्रेस ने इस देश को आजादी दिलाई है तो इस देश की संस्कृति सभ्यता हिन्दू समाज के लिए कांग्रेस ने क्या भूमिका अदा की है!यदि वह आज से ही इस पर काम करना आरम्भ करे तो उसकी सिट की संख्या ४०० तक पंहुच सकती है!आज कांग्रेस की छवि हिन्दू समाज में क्या बनी !
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        1. S
          sanjay
          May 20, 2016 at 7:59 am
          कांग्रेस जब तक वोटबैंक के जाल में फसती रहेगी तब तक वह जनता में पैंठ नहीं बना पाएगी ! कांग्रेस जिस वोटबैंक को अपना मान चुकी थी वह उसे धोखा देकर क्षेत्रपो के शरण में जा बसा है यह बात वह समझ नहीं रही है ! यदि कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी बनना है तो उसे अपनी छवि को बदलना होगी और उसे बहुसंखयक समुदाय के हितों की राजनीती करनी होगी ! यह समुदाय कभी भी वोटबैंक वाली पॉलिसी में नहीं पड़ता है जिसका फायदा सभी राजनैतिक दल उठा रहे है और जलील कर रहे है ! चुकी कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है उस पर जिंम्मेदारी है!
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          1. S
            sanjay
            May 20, 2016 at 9:33 am
            सभी पार्टिया लोकतंत्र को बचाने के लिए मतदान के अधिकार को देश सेवा से जोड़ने का पाठ जनता में पढ़ाए और उनको बताये की यह अधिकार आपकी निजी और धार्मिक महत्वकांशा हेतु नहीं है बल्कि देश की मजबूती के लिए देश की सुरक्षा के लिए है इसकी आड़ में जो भी लोग समूह बनाकर एकत्रित होकर वोटबैंक बनाएगा और देश को कमजोर करने का प्रयास करेगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा!जब तक सभी पार्टिया ऐसी प्रवर्ति के लोगो को सबक नहीं पढ़ाएगी तब तक देश और पार्टियों को ये लोग ब्लेकमेकिंग कर देश को कमजोर और अस्थिर करेंगे!पार्टिया इनसे दुरी बनाए !
            (0)(0)
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            सबरंग