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‬रेप केस में फैसले से पहले बोले बाबा राम रहीम- पीठ में दर्द है मगर कोर्ट जाएंगे, शांति बनाए रखें

Dera Sacha Sauda, Ram Rahim Singh News: उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, "हमने सदा क़ानून का सम्मान किया है।हालाँकि हमारी पीठ में दर्द है,फिर भी क़ानून की पालन करते हुए हम कोर्ट ज़रूर जाएंगे।हमें भगवान पर दृढ़ यकीन है।सभी शांति बनाए रखें।"
Dera Sacha Sauda, Ram Rahim Singh News: 25 अगस्त को कोर्ट में सुनवाई के लिए उनकी पेशी होनी है।(Source:Facebook/MSG)

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न के एक मामले में कोर्ट 25 अगस्त को फैसला सुनाएगी।गुरमीत राम रहीम सिंह की पेशी को लेकर हरियाणा में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य हाई अलर्ट पर है। बड़ी तादाद में उनके समर्थक हरियाणा के पंचकुला पहुंच रहे हैं और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन ने कई इंतजाम किए हैं। इसी बीच गुरमीत राम रहीम सिंह का बयान आया है। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से इसे पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा, “हमने सदा क़ानून का सम्मान किया है।हालाँकि हमारी पीठ में दर्द है,फिर भी क़ानून की पालन करते हुए हम कोर्ट ज़रूर जाएंगे।हमें भगवान पर दृढ़ यकीन है।सभी शांति बनाए रखें।” बता दें सरकार की सख्ती के बावजूद, निषेधाज्ञा होने के बाद भी पंचकुला में अब तक 1.5 लाख से ज्यादा डेरा समर्थक पहुंच चुके हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ने पर है।

राज्य सरकार ने बुधवार को कहा था कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए सेना की भी मदद ले सकती है। पंचकुला में इतनी बड़ी भीड़ को देखकर स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल है। पंचकुला और चंडीगढ़ में स्कूल, कॉलेज, दुकानें, और व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। बता दें कि अदालत ने डेरा प्रमुख राम रहीम को व्यक्ति रुप से सीबीआई की विशेष अदालत में पेश होने को कहा है।

हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राम निवास ने कहा कि राज्य में डेरा के ‘‘नाम चर्चा घर’’ में अनुयायियों के लाठी या हथियार लेने जाने पर रोक लगा दी गयी है। रामनिवास ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा ‘‘ यदि जरूरत हुई तो राज्य सरकार सेना बुलायेगी और समय तथा परिस्थितियों के अनुसार जरूरत होने पर कर्फ्यू भी लगायेगी तथा कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखने के लिए सभी कदम उठायेंगी।’’

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह के साथ कब-कब जुड़े विवाद

1998में गांव बेगू का एक बच्चा डेरा की जीप तले कुचला गया। गांव वालों के साथ डेरे का विवाद हो गया। घटना का समाचार छापने वाले समाचार पत्रों के नुमाइंदों को भी कथित तौर पर धमकाया गया। डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति व मीडियाकर्मियों की पंचायत हुई। इसमें डेरा सच्चा सौदा की ओर से लिखित माफी मांगी गई और विवाद खत्म हुआ।

2002 मई में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए डेरे की एक साध्वी ने गुमनाम पत्र प्रधानमंत्री को भेजा। इसकी एक प्रति पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई।

10 जुलाई 2002 को डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत की हत्या हुई। आरोप डेरा प्रबंधन पर लगे। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत के पिता ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की।

24सितंबर 2002 को हाईकोर्ट ने साध्वी यौन शोषण मामले में गुमनाम पत्र का संज्ञान लेते हुए डेरा सच्चा सौदा की सीबीआइ जांच के आदेश दिए। सीबीआइ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ के संपादक रामचन्द्र छत्रपति को गोली मारी गई। आरोप डेरा समर्थकों पर लगा।16 नवंबर, 2002 को सिरसा में मीडिया की महापंचायत बुलाई गई और डेरा सच्चा सौदा का बहिष्कार करने का प्रण लिया। 21 नवंबर, 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई। जनवरी 2003 में पत्रकार छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर छत्रपति प्रकरण की सीबीआइ जांच करवाने की मांग की। याचिका में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह पर हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया। उच्च न्यायालय ने पत्रकार छत्रपति व रणजीत हत्या मामलों की सुनवाई एक साथ करते हुए 10 नवंबर, 2003 को सीबीआइ को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश जारी किए। दिसंबर 2003 में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी। दिसंबर 2003 में डेरा के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच पर रोक लगाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया। नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डेरा की याचिका खारिज कर दी। सीबीआई ने डेरा प्रमुख सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया।

31जुलाई 2007 को सीबीआई ने हत्या मामलों व साध्वी यौन शोषण मामले में जांच पूरी कर चालान न्यायालय में दाखिल कर दिया। सीबीआई ने तीनों मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया। -तीनों मामले पंचकूला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में विचाराधीन हैं। 2007 से लेकर अब तक इन तीनों मामलों की अदालती कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए डेरा सच्चा सौदा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
डेरे के खिलाफ मामलों की स्थिति
रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड 16 सितंबर 2017
साध्वी यौन शोषण 26 अगस्त 2017
रणजीत सिंह हत्याकांड 16 सिंबर 2017
साधुओं को नपुंसक बनाने की कार्रवाई सीबीआई जांच जारी

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  1. J
    jameel shafakhana
    Aug 24, 2017 at 3:21 pm
    i). Is desi nuskhe ke sevan se Kuch hi dino me ho jayega aap ka lamba, mota or tight. ii). Nill skhukranu ki problem se pareshan hai to jyada sochiye mat khaye ye desi dawai. iii). 30 mint se pahle sambhog me nahi jhad sakte aap rukavat ka achook desi nuskha. : jameelshafakhana /
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    Reply
    1. M
      manish agrawal
      Aug 24, 2017 at 2:21 pm
      मनोहर लाल खट्टर हिंसक भीड़ से नि ने में नाकामयाब रहे हैं ! नवंबर 2014 में तथाकथित संत रामपाल को गिरफ्तार किया जाना था लेकिन उसके हज़ारों बेशर्म समर्थक , हिसार स्थित आश्रम के बाहर लामबंद होगये ! चीफ मिनिस्टर मनोहर लाल खट्टर कोई एक्शन नहीं ले पाए और लगभग 2 हफ्ते नौटंकी चली ! हाई कोर्ट ने हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को रामपाल को अरेस्ट करने के लिए रेस्पोंसिबल बनाया, तब जाकर रामपाल अरेस्ट हो पाया ! फिर, गत वर्ष , जाट आंदोलन के समय खूब लूटपाट, आगजनी, बलात्कार हुए और सैंकड़ों करोड़ की संपत्ति नष्ट हुयी लेकिन मनोहर लाल खट्टर की पुलिस, राजनीतिक दिशानिर्देश के अभाव में चुपचाप तमाशा देखती रही ! राम रहीम के वर्तमान केस में भी यही होता नज़र आ रहा है, क्योंकि जो बेशर्म समर्थक हथियार लेकर घूम रहे हैं या हथियार और ज्वलनशील पदार्थ यानि पेट्रोल, डीजल अपने घरों में जमा कर रहे हैं, उनके खिलाफ "राष्ट्रीय सुरक्षा कानून" के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही ?
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      1. M
        manish agrawal
        Aug 24, 2017 at 2:07 pm
        हिंसा पर उतारू भीड़ को हैंडल करने में हरियाणा सरकार की कार्यकुशलता का कोई मुकाबला नहीं ! गत वर्ष जाट आंदोलन के समय दंगाइयों ने जी भरकर लूटपाट, आगजनी और बलात्कार किये और हरियाणा सरकार ने फायरिंग तक नहीं करवाई ! कहीं ऐसा ना हो की इस बार भी हाट लुट जाए और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की पुलिस, जाट आंदोलन के वक़्त की तरह, मूक दर्शक बनकर सिर्फ तमाशा देखती रहे ! जब मंदसौर में क़र्ज़ में डूबे गरीब किसानों पर फायरिंग करवाई जा सकती है तो हरियाणा में किसी सज़ायाफ्ता मुजरिम के समर्थकों पर क्यों नहीं ? केंद्रीय गृहमंत्रालय को चाहिए para-military forces के जवानों कोआदेश दे की दंगाइयों की भीड़ को चारों तरफ से घेर कर फायरिंग की जाए , ताकि आगे से कोई मुजरिम भीड़ के द्वारा दंगा कराने की जुर्रत ना कर सके !
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