December 08, 2016

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जानिए क्या है विमुद्रीकरण, क्यों लेती हैं सरकारें इसका फैसला और अब तक भारत में कब-कब ऐसा हुआ है?

नरेंद्र मोदी सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोट बंद कर दिए हैं लेकिन भारत में पहले भी बड़े नोटों को बंद किया जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की। ((AP Photo/Saurabh Das, File Photo)

आठ नवंबर को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 500 और 1000 के नोटों को उसी रात 12 बजे से बंद किए जाने की घोषणा की। यानी नौ नवंबर से कुछ तय जगहों (पेट्रोल पंप, अस्पताल, रेलवे स्टेशन इत्यादि) को छोड़कर देश में कहीं भी 500 और 1000 के नोटों से लेन-देन पर रोक लग गई। इन जगहों पर भी इन नोटों के प्रयोग को तय समयसीमा (अब 24 नवंबर) तक ही इजाजत दी गई है। जिन लोगों के पास 500 और 1000 के नोट पड़े हैं वो उन्हें 30 दिसंबर तक देश के किसी भी बैंक या डाकघर में जाकर बदल सकते हैं या अपने खातों में जमा कर सकते हैं। सरकार ने पुराने नोटों की जगह 500 और 2000 के नए नोट जारी किए हैं जो लोगों को बैंकों और एटीएम के माध्यम से मिलने शुरू हो गए हैं। हालांकि लेन-देन के पूरी तरह सामान्य होने में कुछ हफ्ते और लगेंगे। आइए हम आपको बताते हैं कि क्या होता है विमुद्रीकरण, सरकारें इसका फैसला क्यों लेती हैं और भारत में ऐसा कब-कब हुआ है।

क्या है विमुद्रीकरण?- जब किसी देश की सरकार किसी पुरानी मुद्रा को कानूनी तौर पर बंद कर देती है तो इसे विमुद्रीकरण (डीमोनेटाइजेशन) कहते हैं। विमुद्रीकरण के बाद उस मुद्रा की कुछ कीमत नहीं रह जाती। उससे किसी तरह की खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती। सरकार द्वारा बंद किए गए नोटों को बैंकों में बदलकर उनकी जगह नए नोट लेने के लिए समयसीमा तय कर देती है। उस दौरान जिसने अपने नोट बैंकों में जाकर नहीं बदले या जमा नहीं किए उनके नोट कागज का टुकड़ा बनकर रह जाते हैं।

क्यों किया जाता है?- सरकार ऐसा कई कारणों से कर सकती है। सरकार पुराने नोटों की जगह नए नोट लाने पर पुराने नोटों का विमुद्रीकरण कर देती है। मुद्रा की जमाखोरी (कालाधन) को खत्म करने के लिए भी बड़े राशि के नोटों का विमुद्रीकरण किया जाता है। आतंकवाद, अपराध और तस्करी जैसे आपराधिक कामों में भी बड़े पैमाने पर नगद लेन-देन होता है। इन कामों में लिप्त लोग कई बार नगद राशि अपने पास जमा रखते हैं। बाजार में कई बार नकली नोट भी प्रचलन में आ जाते हैं। सरकार नकली नोटों से छुटकारा पाने के लिए पुराने नोट बदल देती है। जालसाजी से बचने के लिए नई तकनीकी से तैयार किए गए ज्यादा सुरक्षित नोट लाने पर भी सरकार पुराने नोटों का विमुद्रीकरण कर देती है। टैक्स चोरी के लिए किए जाने वाले नगद लेन-देन को हतोत्साहित करने के लिए भी सरकारें कई बार विमुद्रीकरण का रास्ता अपनाती हैं।

वीडियोः नोटबंदी के बाद सरकार ने एटीएम और बैंक से पैसे निकालने की सीमा बढ़ाई-

भारत में कब-कब हुआ है ऐसा विमुद्रीकरण?- पहली बार साल 1946 में 500, 1000 और 10,000 के नोटों का विमुद्रीकरण किया गया था।  1938 में गठित भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक 10 हजार रुपये से अधिका का नोट नहीं जारी किया है। 1970 के दशक में प्रत्यक्ष कर की जांच से जुड़ी वानचू कमेटी ने कालाधन बाहर लाने और उसे खत्म करने के लिए विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था। लेकिन इस सुझाव के सार्वजनिक हो जाने की वजह से कालाधन रखने वालों ने तत्काल अपने पैसे इधर-उधर निकाल दिए।

1977 में इमरजेंसी हटने के बाद चुनाव हुए और केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी। जनवरी, 1978 में मोरारजी सरकार ने एक कानून बनाकर 1000, 5000 और 10,000 के नोट बंद कर दिए। आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर आईजी पटेल सरकार के इस कदम से सहमत नहीं थे। पटेल के अनुसार ये फैसला कालाधन खत्म करने के बजाय पिछली भ्रष्ट सरकारों को पंगु बनाने के लिए लिया गया है।

अब तक भारत में किसी नोट को पूरी तरह बंद हो बार ही किया गया है लेकिन कई बार पुराने नोट को धीरे-धीरे बंद कर देती है और उसकी जगह उतने ही मूल्य के नए नोट जारी कर देती है। जैसे साल 2005 में मनमोहन सिंह की कांग्रेसनीत सरकार ने 500 के 2005 से पहले के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया। 2005 से पहले छापे गए 500 के नोटों के पीछे जारी किए जाने का साल नहीं लिखा होता था। सरकार ने बाजार में चल रहे 500 के नकली नोटों और नोटों की जमाखोरी को खत्म करने के लिए पुराने नोट बंद कर दिए। 500 के पुराने नोटों को बैंकों में नए नोटों से बदलने की सुविधा दी गई थी।

आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट को बंद करने की घोषणा की। हालांकि उन्हें आरबीआई के वर्तमान गवर्नर उर्जित पटेल का समर्थन हासिल है। उर्जित पटेल ने पीएम मोदी के फैसले को “बहुत साहसिक कदम” बताया है। हालांकि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन विमुद्रीकरण को कालाधन बाहर लाने के लिए ज्यादा कारगर नहीं मानते हैं। कई अन्य विशेषज्ञों ने भी इस कदम पर सवाल उठाए हैं। भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के प्रोफेसर अभिरूप सरकार के अनुसार कालाधन रखने वाले ज्यादातर लोग अपने पैसे विदेशी बैंकों में रखते हैं इसलिए देश में विमुद्रीकरण करने से ज्यादा बड़े मछलियों का कुछ नहीं बिगड़ेगा।

नोटबंदी से पहले 500 और 1000 के कितने नोट थे बाजार में?– आरबीआई के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रूपये  मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख रुपये 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार कुल देश में तब तक मौजूद कुल 9026 करोड़ नोटों में करीब 24 प्रतिशत नोट (करीब 2203 करोड़ रुपये) ही प्रचलन में थीं।

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First Published on November 14, 2016 1:50 pm

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