December 11, 2016

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सैकड़ों गोरक्षकों को संत महात्माओं ने दी श्रद्धांजलि

1966 को ठीक 50 साल पहले संसद के सामने गोरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग पर बलिदान देने वाले सैकड़ों गोभक्तों की याद में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।

Author नई दिल्ली | November 8, 2016 04:03 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

सात नवंबर 1966 को ठीक 50 साल पहले संसद के सामने गोरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग पर बलिदान देने वाले सैकड़ों गोभक्तों की याद में सोमवार को संसद मार्ग पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। इसमें देश के सनातन परंपरा के सैकड़ों साधु -सन्यासी समेत दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान से हजारों लोग इकट्ठा हुए। मंच पर धर्माचार्य स्वामी करपात्रीजी के शिष्य पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती, मलूकपीठ के राजेंद्र दासजी महाराज, महामंडलेश्वर गोविंद देवगिरी आचार्य हनुमत प्रसाद, विनय गिरी महाराज, विशालानंद महाराज, गोरखपुर प्रेस के राधेश्याम खेमका, विचारक केएन गोविंदाचार्य समेत दर्जनों संत महात्मा और राजनीतिक व्यक्तित्व मौजूद थे।

सभा के जरिए मंचासिन लोगों ने 1966 में तत्कालीन पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देवतीर्थ, सनातन धर्म के प्रमुख धर्माचार्य स्वामी करपात्रीजी, वैष्णव संत के प्रभुत्त ब्रह्मचारी, गोरखपुर प्रेस के प्रमुख हनुमान प्रसाद पोद्दार व आरएसएस के प्रमुख गोलवलकर की अगुआई में आंदोलन करने और बलिदान देने वाले गोभक्तों को श्रद्धांजलि देने के साथ केंद्र सरकार से गोरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग दुहराई।

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शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा कि भाजपा का उभार ही राम और गाय के मुद्दे पर हुआ है। साल 1966 के आंदोलन के बाद गोरक्षा को लेकर कांग्रेस विरोधी माहौल के साथ गोरक्षा को लेकर माहौल तैयार हुआ, जिसका सीधे फायदा जनसंघ को हुआ। एक दो सांसद वाली पार्टी प्रमुख विपक्षी दल बन गई। महामंडलेश्वर गोविंद देवगिरी ने कहा कि हो सकता है कि 51वें श्रद्धांजलि के पहले ही गोरक्षा पर केंद्रीय कानून बन जाए। भारतीय गोसेवा संकल्प समिति के बैनर तले हुई इस सभा की भूमिका केएन गोविंदाचार्य ने रखी। उनका कहना था कि भारत की समृद्धि और संस्कृति की चाभी गोमाता के पास है।

उनका कहना था कि दो सौ साल पहले भारत दुनिया का सबसे अमीर देश था। देश का आधार गोमाता थी आज आधार गोमाता से छूट गया है। गोविंदाचार्य का कहना था कि आज पर्यावरण प्रदूषण बड़ा कारण है। यह बात प्रमाणित है कि गोवंश के शरीर में बनने वाला रसायन गोबर, मूत्र, दूध विभिन्न माध्यमों से निकलता है और पर्यावरण का शोधन करता है। इस मौके पर सुब्रमिण्यम स्वामी ने कहा कि गोरक्षा हमारी अस्तित्व की रक्षा है। उन्होंने गोरक्षा के लिए अपने को कृतसंकल्पित कहा। संत समागम के बीच उन्होंने देश में एक आचार्य सभा होने का सुझाव दिया। जिसका काम संविधान का मार्ग दर्शन करना होना चाहिए। गोरखपुर प्रेस के राधेश्याम खेमका ने सात नवंबर 1966 के चश्मदीद गावाह के तौर पर बताया कि रामलीला मैदान से संसद भवन तक लोग भरे थे।

 

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First Published on November 8, 2016 4:03 am

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