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ग्रीनपीस कार्यकर्ता की याचिका पर केंद्र, आईबी को हाईकोर्ट का नोटिस

ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लै की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। प्रिया ने दिल्ली हवाई अड्डे पर लंदन जाने वाली उड़ान से उतारे जाने के संबंध में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने आईबी और आब्रजन विभाग को भी नोटिस जारी किया और […]
Author January 28, 2015 15:54 pm
अदालत ने गृह मंत्रालय की ओर से पेश वकील से कहा कि जहां तक वेतन और अन्य खर्चों का सवाल है, कुछ न कुछ तो करना होगा। इस संबंध में निर्देश लीजिए।

ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लै की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। प्रिया ने दिल्ली हवाई अड्डे पर लंदन जाने वाली उड़ान से उतारे जाने के संबंध में याचिका दायर की थी।

उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने आईबी और आब्रजन विभाग को भी नोटिस जारी किया और पिल्लै की याचिका पर जवाब मांगा जिसमें उन्होंने विमान से उतारने के कदम को अवैध और व्यक्गित एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकार का उल्लंघन बताया था।

अदालत की नोटिस कार्यकर्ता की उस याचिका पर दायर की गई जिसमें 11 जनवरी को उन्हें आव्रजन अधिकारियों द्वारा विमान से उतारने को संबंधित प्राधिकार के समर्थन को बंद करने का निर्देश देने की मांग की गई। प्रिया पिल्लै मध्यप्रदेश के माहन में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के संबंध में ब्रिटिश सांसदों के समक्ष प्रस्तुती देने लंदन जा रही थी।

अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से उपस्थित वकील को पिल्लै की अंतरिम याचिका पर निर्देश प्राप्त करने को कहा। पिल्लै की अंतरिम याचिका में इसी काम के लिए 11 फरवरी को लंदन जाने की अनुमति मांगी गई है।

अदालत ने कहा, ‘‘ प्रतिवादी (गृह मंत्रालय), आईबी और आव्रजन विभाग को नोटिस जारी करें। एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल हो। याचिकाकर्ता (प्रिया पिल्लै) की जवाबी हलफनामा छह फरवरी से पहले दाखिल हो।’’

कार्यकर्ता की ओर से उपस्थित होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अदालत से आग्रह किया कि उनके खिलाफ गृह मंत्रालय की ओर से जारी लुकआउट परिपत्र को रद्द किया जाए।

जयसिंह ने दलील दी कि कार्यकर्ता को विदेश जाने से रोकना उनकी छवि को खराब करने का सुनियोजित प्रयास है और गृह मंत्रालय के त्रुटिपूर्ण परिपत्र के आधार पर सरकारी एजेंसियों का अवैध कार्य है।

उन्होंने कहा कि परिपत्र का कोई कानूनी आधार नहीं है क्योंकि पिल्लै कभी किसी मामले में दोषी नहीं करार नहीं दी गई हैं और न ही उन्होंने कभी गिरफ्तारी या सुनवाई से बचने का प्रयास किया।

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