December 05, 2016

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विजय माल्या के खिलाफ कोर्ट ने जारी किए दो गैर-जमानती वारंट, कहा- उनका भारत लौटने का इरादा नहीं

माल्या के खिलाफ वारंट जारी करते हुए कोर्ट ने कहा कि माल्या का यह दावा गलत और प्रक्रिया का दुरूपयोग करने वाला है कि वह भारत लौटना चाहते हैं।

Author नई दिल्ली | November 4, 2016 16:56 pm
शराब के पूर्व बड़े कारोबारी विजय माल्या। (फाइल फोटो)

दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को विजय माल्या के खिलाफ दो गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। पहला वारंट फेरा के उल्लंघन के एक मामले में सम्मनों की कथित तौर पर तामील न करने पर जारी किया गया है, वहीं दूसरा 2012 में चेक बाउंस को लेकर दायर डीआईएएल की एक याचिका पर जारी किया गया है। माल्या के खिलाफ वारंट जारी करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘माल्या का यह दावा गलत और प्रक्रिया का दुरूपयोग करने वाला है कि वह भारत लौटना चाहते हैं लेकिन उनका पासपोर्ट निरस्त कर दिया गया है। माल्या में देश के कानून के प्रति सम्मान की कमी है और उनका भारत लौटने का कोई इरादा नहीं है।’ अदालत ने कहा कि शराब कारोबारी माल्या के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करनी होगी क्योंकि कई मामलों में उनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं और वह इनमें व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए हैं।

वीडियो में देखें- शराब कारोबारी विजय माल्या की मुश्किलें; सुप्रीम कोर्ट ने विदेश में संपत्ति का ब्यौरा देने को कहा

मुख्य मेट्रोपोलिटन मेजिस्ट्रेट सुमित दास ने यह भी कहा कि माल्या की याचिका, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह भारत लौटना चाहते हैं लेकिन ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि भारतीय अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है, वह ‘बदनियती’ और ‘कानून की प्रक्रिया का दुरूपयोग करने के उद्देश्य’ से दायर की गई है। जस्टिस दास ने कहा कि अदालत को महसूस होता है कि उनकी यहां आने और अदालत में पेश होने की कोई मंशा नहीं है और इस देश के कानून के प्रति उनके मन में जरा भी सम्मान नहीं है। अदालत ने कहा, आरोपी के आचरण को देखते हुए, उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देना पड़ेगा। आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।’

सुनवाई के दौरान माल्या की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता और अजय भार्गव ने कहा कि उनकी याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय की जो प्रतिक्रिया आई है उसका वे कोई जवाब नहीं देना चाहते। उन्होंने मामले को अंतिम बहस के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। अदालत ने कहा कि चार अक्तूबर को विशेष उल्लेख किया गया था कि माल्या अधिकारियों के संपर्क कर भारत लौटने के लिए आपात दस्तावेज प्राप्त कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया।

वहीं, 2012 में चैक बाउंस होने के एक मामले में विजय माल्या के खिलाफ दूसरा गैर जमानती वारंट जारी किया गया। यह वारंट माल्या के अदालत में हाजिर नहीं होने पर जारी किया गया है। मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट सुमित आनंद ने आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि इस गैर जमानती वारंट की तामील विदेश मंत्रालय के माध्यम से करवाई जाए क्योंकि रपटों के अनुसार माल्या लंदन में है। मामले में अगली सुनवाई चार फरवरी को होगी। गौरतलब है कि अदालत ने छह अगस्त को भी माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था और कहा था कि उनकी हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य कदम उठाए जाने की जरूरत है।

माल्या, जो संभवत: लंदन में हैं, उन्होंने नौ सितंबर को अदालत में कहा था कि वह भारत लौटना चाहते हैं और इस ‘सद्इच्छा’ के बावजूद वह यात्रा करने में ‘सक्षम नहीं हैं’ क्योंकि उनका पासपोर्ट रद्द किया जा चुका है। इसके जवाब में प्रवर्तन निदेशालय ने चार अक्तूबर को अदालत में कहा था कि माल्या का भारत लौटने का कोई इरादा नहीं है और उनका पासपोर्ट खुद उनके आचरण के कारण रद्द किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय के वकील एन के माट्टा ने माल्या की उस याचिका का विरोध किया किया था जिसमें उन्होंने पासपोर्ट रद्द किए जाने के आधार पर व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी थी। अदालत ने नौ जुलाई को माल्या को व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट खत्म कर दी थी और नौ सितंबर को उन्हें पेश होने का निर्देश दिया था। माल्या को व्यक्तिगत पेशी से छूट वर्ष 2000 में दी गई थी।

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First Published on November 4, 2016 12:40 pm

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