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सुनंदा पुष्कर मामला: अदालत ने पुलिस से होटल के कमरे की सील हटाने को कहा

दिल्ली की एक अदालत ने महानगर की पुलिस को निर्देश दिया कि पांच सितारा होटल के उस कमरे की सील हटाई जाए, जहां कांग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर रहस्यमयी परिस्थितियों में 2014 में मृत पाई गई थीं।
अदालत ने कहा था कि दिल्ली पुलिस के लचर रवैये के कारण शिकायतकर्ता (होटल) को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। (File photo)

दिल्ली की एक अदालत ने महानगर की पुलिस को निर्देश दिया कि पांच सितारा होटल के उस कमरे की सील हटाई जाए, जहां कांग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर रहस्यमयी परिस्थितियों में 2014 में मृत पाई गई थीं। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट धर्मेन्द्र सिंह ने पुलिस से कहा कि 26 सितम्बर तक इस बारे में अनुपालन रिपोर्ट पेश करें। साथ ही पुलिस को कमरे से जांच के लिए जरूरी सामान ले जाने की अनुमति भी दे दी। अदालत ने चार सितम्बर को पुलिस को सुनंदा की मौत की ‘लचर’ जांच के लिए लताड़ लगाई थी।

अदालत होटल प्रबंधन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उस कमरे की सील हटाने की मांग की गई थी, जहां उनकी मौत हुई थी।अदालत ने कहा था, ‘‘दिल्ली पुलिस के लचर रवैये के कारण शिकायतकर्ता (होटल) को काफी नुकसान झेलना पड़ा है।’’ इसने कहा कि जांच के नाम पर होटल को काफी वित्तीय नुकसान हुआ है।

दूसरी तरफ पुलिस ने जांच पूरी करने के लिए ज्यादा वक्त की मांग की थी और कहा था कि फोरेंसिक विशेषज्ञों ने हाल में इस कमरे का दौरा किया था और कई साक्ष्य जुटाए थे, जिनकी रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। पुलिस ने कहा, ‘‘जब तक रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से नहीं कह दिया जाता कि कमरे को बंद रखने की और जरूरत नहीं है, तब तक इस कमरे को नहीं खोला जा सकता।’’ वहीं,अदालत ने 21 जुलाई को चार हफ्ते के अंदर कमरे की सील हटाने का आदेश देते हुए कहा था कि पुलिस की लापरवाही के कारण होटल को परेशान नहीं किया जा सकता।

मालूम हो कि कांग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर का शव 17 जनवरी, 2014 को दिल्ली के एक आलीशान होटल में पाया गया था। राज्य सभा सांसद और भाजपा नेता सुब्रमणयम स्वामी ने 16 जुलाई को कोर्ट में एक याचिका दायर की थी और सुनंदा पुष्कर की मौत की अदालत की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग की थी। स्वामी ने न्यायालय से कहा था कि पुष्कर की मौत की जांच में बाधा पहुंचाने को लेकर नियमित प्रयास हुए हैं और आरोप लगाया था कि प्राथमिकी दर्ज करने में एक वर्ष का समय लगा और उसके बाद मामले में कोई प्रगति नहीं हुई।

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