December 03, 2016

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नासा की आंखों ने देखा जलती फसलों का धुआं छाया आसमान पर

ये तस्वीरें उसके उपग्रह सुओमी एनपीपी पर लगे विजिबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर ने खींची हैं।

Author नई दिल्ली | November 6, 2016 02:08 am
नासा (एपी फाइल फोटो)

दिल्ली में दमघोंटू धुआं शुक्रवार और शनिवार को और बढ़ गया। पंजाब में खरीफ फसल के जलाए जा रहे ठूंठ से निकला यह धुआं दिल्ली आकर इन दो दिनों में और घना हो चुका है। इस बात की तस्दीक नासा के उपग्रह द्वारा खींची गईं तस्वीरों से भी हो रही है।  नासा वर्ल्ड व्यू में शनिवार शाम साढ़े पांच बजे तक क ी तस्वीरों में दिल्ली और आसपास के इलाकों में छाया धुआं साफ दिखाई दे रहा है। अगर एक और दो नवंबर से चार और पांच नवंबर की तस्वीरों की तुलना क ी जाए तो धुएं की मोटी चादर देखकर सिहरन हो जाती है।वैसे नासा ने शनिवार को नासा अर्थ आब्जरबेटरी वेबसाइट पर भारत में स्मॉग की स्थिति पर दो नवंबर को खींची गई दो तस्वीरें जारी की हैं। ये तस्वीरें उसके उपग्रह सुओमी एनपीपी पर लगे विजिबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर ने खींची हैं। एक फोटो में पंजाब में एक बड़े दायरे में खरीफ फसलों के ठूंठ जलते हुए दिख रहे हैं जबकि दूसरे फ ोटो में धुआं गहराता दिखाई दे रहा है।

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देश के उत्तरी भाग विशेषकर पंजाब और हरियाणा में हर साल अक्तूबर और नवंबर में यही सूरत रहती है। अक्तूबर शुरू होते ही ठूंठ जलाने का सिलसिला किसान शुरू करते हैं और नवंबर तक यह अपने चरम पर पहुंच जाता है। इसके बाद वे रबी फसलों की बुआई में लग जाते हैं। नासा के मुताबिक अक्तूबर की शुरुआत में उसके उपग्रह ने पंजाब के ऊपर जब तस्वीरें खींची थीं, तब बहुत कम दायरे में ठूंठ जलाए जा रहे थे। लेकिन इसके बाद ठूंठ जलाने वाले खेतों की संख्या लगातार बढ़ती गई और नवंबर में तो समूचे राज्य में ये ठूंठ जलाए जा रहे हैं। नतीजतन, समूचे उत्तर भारत में धुएं की मोटी चादर पसर गई है।नासा के विज्ञानियों के मुताबिक ये ठूंठ कम तापमान में जलते हैं और ज्यादा समय तक नहीं जल पाते, लिहाजा धुआं धरती की सतह के आसपास टिका रहता है। यही दिल्ली और उत्तरी भारत में फैले धुएं की वजह भी है।

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नासा के अनुसार 2 नवंबर को हवाएं धुएं की चादर को दिल्ली ले आर्इं। इसमें मिट्टी के महीन कण, धूल और संयंत्रों में अधजले कणों क ा मिश्रण शामिल है। विज्ञानियों के मुताबिक पंजाब से आए इस धुएं में वाहनों, उद्योगों और आतिशबाजी से निकले धुएं के मिलने से ही दिल्ली में पार्टिकुलेट मैटर इतने उच्चस्तर पर पहुंच गया है।

 

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First Published on November 6, 2016 2:08 am

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