December 09, 2016

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रक्षा खरीद परिषद की बैठक सोमवार को

जापान में निर्मित यूएस-2 आइ एंफीबियंस प्लेन की खरीद का एजंडा भी जोड़ा जा रहा है। दो चरणों में कुल 12 विमानों की खरीद का प्रस्ताव है।

Author नई दिल्ली | November 6, 2016 05:07 am
एफ 16 लड़ाकू विमान। (एपी फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के पहले भारत ने ठंडे बस्ते में डाल दी गई एंफीबियंस (जमीन और पानी से उड़ सकने वाला) लड़ाकू विमान खरीद सौदे के लिए मन बनाना शुरू कर दिया है। आधिकारिक तौर पर रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की सोमवार को होने जा रही बैठक में जापान से आए इस प्रस्ताव के नए मसौदे पर बातचीत होगी और मुहर लगने की संभावना है। नरेंद्र मोदी की 11-12 नवंबर की जापान यात्रा में जिन विषयों पर वहां बातचीत होनी है, उसमें जापान में निर्मित यूएस-2 आइ एंफीबियंस प्लेन की खरीद का एजंडा भी जोड़ा जा रहा है। दो चरणों में कुल 12 विमानों की खरीद का प्रस्ताव है।

जापान के साथ सुरक्षा, खुफिया तंत्र विकसित करने की योजना और कारोबार से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत चल रही है। इसमें खास है : परमाणु ऊर्जा संधि, जिसके लिए भारत अरसे से प्रयासरत है। मोदी के दौरे में इस संधि पर दस्तख्त हो जाने की उम्मीद भारतीय राजनयिकों ने लगा रखी है। इसके जरिए भारत को कम खर्च में परमाणु बिजलीघर निर्माण के उपकरण और रेडियोधर्मी पदार्थ मिलने लगेंगे। ऐसे होने पर जापानी निवेश वाली अमेरिका की दो बड़ी कंपनियों ‘वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन’ (डब्ल्यूईसी) और ‘जीई एनर्जी इनकॉरपोरेशन’ को भारत में काम करने की इजाजत मिल जाएगी। भारत को लाभ यह होगा कि ये कंपनियां कम कीमत में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाएंगी। इसके लिए अत्याधुनिक जापानी तकनीक उपलब्ध होगी। अभी तक भारत की रूसी कंपनियों पर निर्भरता बनी हुई है। परमाणु ऊर्जा संधि और एंफीबियंस सौदे की संभावना को लेकर विदेश मंत्रालय ने कानूनी और तकनीकी पहलुओं को लेकर मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है।

जिस यूएस-2 आई एंफीबियंस प्लेन खरीद का विषय प्रधानमंत्री के एजंडे में जोड़ा गया है, वह नया ट्विस्ट है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर सोमवार को डीएसी की बैठक की अगुआई करेंगे। उन्होंने नौसेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड के विशेषज्ञ अफसरों को इस बैठक में तलब किया है। नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए छह-छह विमान खरीदे जाने का प्रस्ताव है। डीएसी का आधिकारिक अप्रूवल मिलने के बाद इस एजंडे पर प्रधानमंत्री के साथ जाने वाला प्रतिनिधिमंडल जापान में अगली बातचीत करेगा। जापान ने 2011 में इस विमान का प्रस्ताव भारत को भेजा था। लेकिन चार इंजन वाले इन विमानों के बेहद महंगे होने के चलते प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया था।

जापान ने 2014 से इसको लेकर नए सिरे से प्रयास शुरू किया, तब प्रधानमंत्री मोदी जापान की पहली यात्रा पर गए थे। उसके बाद पिछले साल दिसंबर में वहां के प्रधानमंत्री शिंजो एबे की भारत यात्रा के दौरान जापान ने नया प्रस्ताव दिया। इसकी 1.6 बिलियन डालर (लगभग 11 हजार करोड़ रुपए) की कीमत में 10 फीसद की कमी करने और 20 फीसद छूट देने की पेशकश की गई। साथ ही, इसे बनाने वाली जापानी कंपनी ‘शिनमेवा इंडस्ट्रीज’ भारत में इस विमान की मेंटीनेंस- रिपेयर- ओवरहॉलिंग (एमआरओ) यूनिट लगाने और निर्यात केंद्र स्थापित करने की पेशकश कर रही है।
ऐसे फायदेमंद है यह लड़ाकू विमान

चार बड़े टर्बो- प्रोपेलर इंजन वाले यूएस2-आई विमान जमीन के साथ-साथ पानी से भी टेक-आॅफ कर सकते हैं। मूल रूप से तलाश और बचाव अभियानों के लिए तैयार किए गए ये विमान एक साथ 30 सैनिकों को जरूरी इलाके तक पहुंचा सकते हैं। ये विमान एक बार में 4700 किलोमीटर तक उड़ान भर सकते हैं। जापान ने अपने देश में निर्मित किसी सैन्य सामग्री को निर्यात करने को लेकर स्वप्रतिबंध लगाया हुआ था, जिसे पांच दशक के बाद पिछले साल खत्म किया गया।

प्रधानमंत्री के दौरे से पहले जापान के प्रस्ताव के नए मसौदे पर मुहर लगने की संभावना

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First Published on November 6, 2016 5:07 am

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