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भारत में डार्कनेट और बिटकॉइन के जरिए हो रहा नशे का कारोबार

बिटकॉइन डिजीटल करंसी या मुद्रा होती है जिसकी मदद से वैध बैंकिंग चैनल से बचकर इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन किया जा सकता है।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 15:15 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।

भारत में नशे का कारोबार तेजी से बढ़ा है। मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों ने पता लगाया है कि इस कारोबार को गूढ़ ‘डार्कनेट’ और अनियंत्रित तथा अवैध मुद्रा बिटकॉइन के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। मादक पदार्थों की तस्करी और इनके अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए जिम्मेदार प्रमुख कानूनी तथा खुफिया एजेंसी स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने देश में सक्रिय इस तरह के दो अपराधिक तंत्रों को प्रतिबंधित किया है।

एनसीबी के महानिदेशक आर आर भटनागर ने बताया, ‘यह पहली बार है जब हमें देश में सक्रिय ऐसे दो अवैध ड्रग रैकेटों का पता चला है जो डार्कनेट और बिटकॉइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारी जांच में पता चला है कि इनमें से कुछ लोग भारत में मौजूद हैं और हम उनकी जांच कर रहे हैं।’ डार्कनेट इंटरनेट का बेहद गुप्त नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल विशेष सॉफ्टवेयर, कॉन्फिगरेशन और प्राधिकार के जरिए ही किया जा सकता है और सामान्य कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल और पोर्ट के जरिए इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है। बिटकॉइन डिजीटल करंसी या मुद्रा होती है जिसकी मदद से वैध बैंकिंग चैनल से बचकर इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन किया जा सकता है।

एनसीबी प्रमुख ने बताया है कि प्रथम दृष्ट्या लगता है कि ये दोनों गिरोह पार्टियों में इस्तेमाल होने वाले नशीले पदार्थों का तस्करी में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर नशीले पदार्थों के इन अपराधों के लिए बेहद गोपनीय तरीकों का अपनाया जाना चिंताजनक है लेकिन ऐसे अपराधों की समय रहते पहचान करने और उनसे प्रभावी ढंग से निबटने के लिए हम भी अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं। भटनागर ने यह भी कहा कि सीमा पार से होने वाली हेरोइन की तस्करी में कमी आई है।

महानिदेशक भटनागर ने बताया, ‘हमारे आकलन के मुताबिक, नशे के कारोबार पर लगाम कसने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की ओर से की गई कड़ी कार्रवाई के चलते पंजाब में होने वाली तस्करी में 30 फीसदी तक की कमी आई है।’ हाल ही में हुई एजेंसी की समीक्षा बैठक में भटनागर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को बताया था कि पारंपरिक नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती होने के कारण पंजाब में नशेड़ी नशा करने के लिए दवा आधारित मिश्रणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2015 के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि देशभर में सबसे ज्यादा अफीम और हेरोइन पंजाब से जब्त की गई है। हाल के चलन से पता चलता है कि कृत्रिम नशीले पदार्थ दशकों से इस्तेमाल होते आ रहे प्राकृतिक और अर्द्ध कृत्रिम नशीले पदार्थों की जगह लेते जा रहे हैं।

एनसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कुछ फार्मास्युटिकल उत्पादों पर सख्त नियंत्रण और निगरानी के बावजूद इस बात के सबूत मिले हैं कि उनका नशे के लिए इस्तेमाल हो रहा है।’ उन्होंने कहा कि इसी बात ने कानूनी एजेंसियां को चिंता में डाल दिया है। भटनागर ने बताया कि राज्य पुलिस और बीएसएफ तथा एसएसबी जैसे सीमा सुरक्षा बलों के साथ मिलकर एनसीबी ने इस साल के पहले छह महीनों में देश के पूर्वी हिस्से से कोडीन आधारित सिरप (जैसे फेनसेडाइल ब्रांड) की दो लाख बोतलें जब्त की हैं।

एनसीबी की रिपोर्ट में बताया गया कि देशभर से विभिन्न एजेंसियों ने 2015 में 1,687 किलो अफीम, 1,416 किलो हेरोइन, 94,403 किलो गांजा, 3,349 किलो हशीश, 113 किलो कोकेन, 827 किलो इफ्रेडिन या सूडोएफेड्रिन समेत कई नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। डीजी ने कहा, ‘देशभर में 5,000 एकड़ इलाके में हो रही अफीम की अवैध खेती को नष्ट किया गया है। यह बीते कुछ वर्षों के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा है।’

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