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दलित उत्पीड़न: विपक्ष का केंद्र पर मौन रहने का आरोप, भाजपा का विचारधारा तोड़ने पर जोर

उदित राज ने दलित नेता मायावती के खिलाफ आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने दलितों के हितों की ठेकेदारी ले रखी है।
Author नई दिल्ली | August 11, 2016 20:17 pm
लोकसभा की कार्यवाही। (पीटीआई फाइल फोटो)

देश के विभिन्न हिस्सों में दलितों पर अत्याचार पर केंद्र सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए विपक्षी कांग्रेस, वामदलों एवं अन्य पार्टियों ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए बजटीय आवंटन में कटौती की गई है और देश की एक चौथाई आबादी वाले इन वर्गों के लोग आज भय के वातावरण में जी रहे हैं। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि केवल आंकड़ों का उल्लेख करने से दलितों के उत्पीड़न को खत्म नहीं किया जा सकता है क्योंकि आजादी के बाद से कांग्रेसी और गैर भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर जघन्य अत्याचार के मामले बढ़े हैं। जरूरत इस बात की है कि हम सब मिलकर दलितों के उत्पीड़न के स्रोत और विचारधारा को तोड़ें।

लोकसभा में दलितों पर अत्याचार के बारे में पी करुणाकरण और शंकर प्रसाद दत्ता के प्रस्ताव पर नियम 193 के तहत चर्चा की शुरुआत करते हुए माकपा के पी के बीजू ने कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है लेकिन दलितों पर अत्याचार की घटना बदस्तूर जारी हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक 18 मिनट में दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामले आते हैं। दलितों की हत्या, दलित महिलाओं के बलात्कार के मामले भी लगातार आते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में गुजरात के उना में दलितों पर हमला, उत्तरप्रदेश और बिहार में दलित उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र किया।

बीजू ने कहा कि 33 प्रतिशत थानों में दलित नहीं जा पाते हैं, काफी स्कूलों में दलित छात्रों को अलग बैठना पड़ता है, 21 प्रतिशत दलित बच्चे कम वजन के हैं और बड़ी संख्या में कुपोषित हैं। फिर भी इनकी अनदेखी गंभीर विषय है। माकपा सदस्य ने कहा कि संविधान में दलितों की सुरक्षा एवं उनके अधिकारों का प्रावधान किया गया है। लेकिन गौरक्षा एवं अन्य मुद्दों पर उनके खिलाफ अत्याचार जारी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस विषय पर हाल ही में कहा कि दलितों को नहीं मारो, मारना है तो मुझे गोली मार दो। साथ ही प्रधानमंत्री ने गौरक्षा से जुड़े लोगों में असामाजिक तत्वों के होने का जिक्र किया। लेकिन ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

बीजू ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास ऐसी जानकारी है लेकिन फिर भी दलितों की सुरक्षा के लिए ठोस पहल केंद्र सरकार क्यों नहीं कर रही है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान नहीं बल्कि कठोर कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके साथ ही वर्तमान सरकार के दौरान अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए बजटीय आवंटन में कटौती की गई है। कांग्रेस के के एच मुनियप्पा ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के दौरान देश में दलितों के खिलाफ अत्याचार के अब तक के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। और यदि इस तरह दलितों पर अत्याचार पर सरकार मौन रही तो 2019 के चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनना तय है।

उन्होंने कहा कि आज दलितों पर अत्याचार के मामले इतने बढ़ गए हैं कि वे भय के वातावरण में जी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में दलित भयमुक्त होकर जीवनयापन कर रहे थे। मुनियप्पा ने इस संदर्भ में गुजरात के उना में दलितों पर अत्याचार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार में दलित उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र किया। ओडिशा में दलितों की हत्या का जिक्र करते हुए कांग्रेस सदस्य ने आरोप लगाया कि ओडिशा सरकार इस मामले में पूरी तरह से विफल रही है और गृह मंत्री को इस बारे में संज्ञान लेना चाहिए। इसका बीजद सदस्य भर्तृहरि महताब ने विरोध किया और कहा कि दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा।

कर्नाटक से भाजपा सदस्यों को भी कांग्रेस शासित इस राज्य में दलितों के उत्पीडन के विषय को उठाते सुना गया। भाजपा के उदित राज ने कहा कि दलितों के उत्पीड़न के मामले में वह भाजपा बनाम कांग्रेस या कांग्रेस बनाम बीजद के जाल में नहीं पड़ना चाहते हैं। आरोप-प्रत्यारोपों से दलितों के उत्पीड़न को कम नहीं किया जा सकता है। आंकड़े कम या अधिक हो सकते हैं लेकिन हमें उत्पीड़न के स्रोत और उत्पीड़न की विचारधारा को तोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यह केवल कानून एवं व्यवस्था का प्रश्न नहीं बल्कि सामाजिक सोच का प्रश्न है। और हमे इस जड़ता को समाप्त करना होगा। ऐसी घटनाएं इसलिए भी बढ़ रही हैं क्योंकि दलित आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं और हमें उनके इस प्रयास में सहयोगी बनना होगा। उदित राज ने कहा कि दलित उत्पीड़न के आंकड़ों की बात करें तो आजादी के बाद से कांग्रेसी और गैर भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर जघन्य अत्याचार के मामले हुए हैं।

उदित राज ने दलित नेता मायावती के खिलाफ आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने दलितों के हितों की ठेकेदारी ले रखी है जबकि बतौर मुख्यमंत्री उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में दलित विरोधी काम अधिक किए गए। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में दलितों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने की जिम्मेदारी राजनीतिक दलों ने अपने सिर पर ले रखी है, फिर चाहे वह कांग्रेस हो, भाजपा हो, वाम दल हों या कोई अन्य दल हों। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था ने दलितों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने में भूमिका क्यों नहीं निभाई ?

उदित राज ने निजी क्षेत्र में अनुसूचित जातियों को आरक्षण की व्यवस्था की मांग के साथ ही कहा कि धर्माचार्यो को इस भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए। अनुसूचित ईसाइयों का मामला उठाते हुए अन्नाद्रमुक के डा. के गोपाल ने इस समुदाय के लोगों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की मांग की। उन्होंने दक्षिण भारत के पेरियार आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इस आंदोलन से पूर्व समाज में दलित समुदाय के लोगों के लिए जलाशय, कुएं और यहां तक कि श्मशान घाट तक अलग होते थे। उन्हें मंदिरों में प्रवेश की मनाही थी। डॉ. गोपाल ने कहा कि दलितों के साथ भेदभाव को समाप्त करने के लिए आर्थिक और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की जरूरत है।

तृणमूल कांग्रेस के प्रोफेसर सौगत राय ने आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में दलितों के खिलाफ अत्याचार के 47 हजार मामले सामने आए और इनमें उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 8075, राजस्थान में 8028 जबकि पश्चिम बंगाल में बाकी राज्यों के मुकाबले 500 गुना कम यानी केवल 159 मामले ही प्रकाश में आए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार नहीं बल्कि वहां की सामाजिक व्यवस्था को श्रेय जाता है जिसने विनोबा भावे, रामकृष्ण परमहंस जैसे महापुरुष दिए।

विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय गौ रक्षक दल पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए सौगत राय ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हैदराबाद में सात अगस्त को दिए गए बयान का स्वागत करते हैं लेकिन सवाल यह है कि उन्हें गुजरात की दलित उत्पीड़न की घटना के बाद प्रतिक्रिया देने में 26 दिन का समय क्यों लग गया? तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा कि इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने अपने बयान में मुस्लिमों का जिक्र कहीं नहीं किया। उन्होंने कहा कि आज देश में असहिष्णुता का माहौल बन रहा है।

उन्होंने कहा कि चुनाव का दौर बीत चुका है और देश में नया माहौल बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने भाजपा से कहा कि अब यह पार्टी सत्ता में है और इसे सहिष्णुता का माहौल बनाना होगा। सौगत राय ने सरकार से कहा, ‘ऐसा कुछ करिए जिससे दलितों के आंसू पोंछने का काम हो। अब आप सत्ता में हैं जिम्मेदारी से काम करें।’ बीजद के भर्तृहरि महताब ने कहा कि आज देश में चैतन्य महाप्रभु, कबीर, गुरु नानक देव, दयानंद सरस्वती जैसे समाज सुधारक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आज उनकी पार्टी समेत कोई भी राजनीतिक दल नहीं है जो समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए काम कर रहा हो। भारतीय समाज वोट बैंक की राजनीति में बंट गया है।

महताब ने कहा कि क्या हम राजनीतिक दलों के एजेंडा में सामाजिक सुधारों के विषय को शामिल करने पर जोर दे सकते हैं। सांसदों को भी इस दिशा में काम करना चाहिए। शिवसेना के सदाशिव लोखंडे ने कहा कि दलितों पर अत्याचार राजनीति से प्रेरित अधिक होते हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में दलित बच्चों को शिक्षा दी जानी चाहिए। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि दलित समाज के पिछड़ेपन के पीछे मुख्य वजह है कि हमने राजनीतिक विषमता को दूर करने का प्रयास तो किया लेकिन सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्हें समानता नहीं दे पाए।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार ने मु्रदा लोन योजना, वेंचर केपिटलिस्ट फंड योजना जैसी योजनाएं लाकर अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को रिण देकर आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया है। मेघवाल ने कहा कि दलित समाज डॉ भीमराव अंबेडकर को अपना आदर्श मानता है और कांग्रेस ने डॉ अंबेडकर को भुला दिया इसलिए यह समाज कांग्रेस से दूर होता जा रहा है और भाजपा के करीब आ रहा है इसलिए विपक्षी पार्टी को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्यों में दलित समाज पर अत्याचार की कितनी घटनाएं हो रहीं हैं, उससे अधिक महत्वपूर्ण है कि इन्हें कैसे रोका जाए।

कांग्रेस सदस्यों को मेघवाल के बयान पर विरोध दर्ज कराते हुए भी देखा गया और एक विपक्षी सदस्य ने गुजरात में दलितों पर अत्याचार की घटना पर बोलने की बात कही। इस पर मेघवाल ने कहा, ‘गुजरात के दलित कांग्रेस के साथ नहीं हैं। इसका कारण है कि जब गुजरात के गोधराकांड में मारे गये सारे लोग दलित थे तो कांग्रेस ने कुछ नहीं कहा और बाद में जब दंगों में लोग मारे गए तो उसे चिंता हुई।’ उन्होंने आरोप लगाया कि जब राज्यों में चुनाव होने होते हैं तो विपक्ष इस तरह के मुद्दे उठाता है।

कांग्रेस के ज्यातिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि सुख के समय में नहीं बल्कि दुख के समय में जनता के साथ रहे। दलितों के उत्पीड़न पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बयान बेबसी भरा है जबकि उन्होंने स्वयं को चौकीदार बताया था। सिंधिया ने कहा कि गुजराज के उना में दलितों का उत्पीड़न शर्मनाक है और भाजपा के शासन में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए और दोषियों को न्याय के कठघरे में खड़ा करना चाहिए। चर्चा में वाईएसआर कांग्रेस के वाराप्रसाद राव, जदयू के कौशलेंद्र कुमार और राजद से निष्कासित राजेश रंजन आदि सदस्यों ने भी भाग लिया।

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