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10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी, शीर्ष बैंकरों, नौकरशाहों के खिलाफ मामलों की फास्ट ट्रैक जांच करेगा सीवीसी

अगले छह महीने के अंदर सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़े मामलों की जांच समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उन्हें प्राथमिकता पर रखा जाएगा।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 11:41 am
केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी)।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने 10 करोड़ से अधिक रुपए की धोखाधड़ी और शीर्ष बैंक अधिकारियों एवं बाबुओं के खिलाफ मामलों में त्वरित जांच करने का फैसला किया है। इसके अलावा अगले छह महीने के अंदर सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़े मामलों की जांच समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उन्हें प्राथमिकता पर रखा जाएगा।

उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों ने इन मामलों को भ्रष्टाचार रोधी संस्थाओं को भेज दिया है, जो इन्हें देख रहे हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री कार्यालय या संसदीय समिति की ओर से भेजी गई विशेष रिपोर्ट या ध्यानाकर्षण मांग वाले मामलों को भी प्रमुखता दी जाएगी। ‘सतर्कता मामलों को अंतिम रूप देने में हो रही देरी को गंभीरता से लेने’ के बाद आयोग का यह फैसला सामने आया है, जिसने त्वरित निपटाए जाने वाले महत्वपूर्ण मामलों में इन्हें शामिल किया है।

सीवीसी ने केन्द्र सरकार के सभी विभागों के सचिवों को भेजे औपचारिक संदेश में कहा कि रिश्वत, सरकारी धन के गबन, फर्जीवाड़ा, 10 करोड़ से अधिक रुपए की धोखाधड़ी और घोटाला सम्बंधी गंभीर अनियमितता से जुड़े ऐसे मामले, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर जनता का ध्यान खींचा और जिनका अन्य कर्मियों या अधिकारियों पर गंभीर प्रभाव पड़ा, ऐसे तमाम मामलों को त्वरित मामलों के तौर पर समझा जाएगा।

इसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों, बीमा कम्पनियों और स्वायत्त संस्थाओं के बोर्ड-स्तर के अधिकारियों तथा केन्द्र सरकार में अतिरिक्त सचिव स्तर एवं उससे ऊपर रैंक के अधिकारियों एवं सभी भारतीय सेवाओं — भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) अधिकारियों के खिलाफ मामलों को त्वरित गति से निपटाया जाएगा।

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