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आर्ट गैलरी में दंगों के इर्द-गिर्द दिखाई गई गाय, कलाकार ने कहा- क्या खाएं ये बताने का हक किसी को नहीं

उनकी रचनाओं में पौराणिक किरदारों का ही दबदबा है लेकिन कलाकार दीप्ति गुप्ता का कहना है कि वह धार्मिक नहीं हैं।
Author नई दिल्ली | July 27, 2016 13:40 pm
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भारतीय पुराणों में नवरस का चित्रांकन करने वाली तस्वीरों का संग्रह और गायों पर एक श्रृंखला यहां जारी पिक्टोरल एक्जोटिका नाम की प्रदर्शनी में देखा जा सकता है।
त्रिवेणी कला संगम में कलाकार दीप्ति गुप्ता की रचनाओं की प्रदर्शनी लगी है। गुप्ता कहती हैं, ‘‘गाय के संरक्षण के नाम पर हमारे इर्द-गिर्द के लोग आखिर क्यों लड़ रहे हैं। दंगों के रंग में मैंने गाय का चित्रण किया है।’’ उनके काम में नृत्य के प्रकार, छोटी फिगर और चटक रंगों के बड़े बड़े ब्लॉक प्रमुख हैं।

वे कहती हैं, ‘‘गाय श्रृंखला उस समाज का आईना है जिसमें मैं रहती हूं। मैंने देखा है कि मेरी मां सुबह उठते ही जो सबसे पहला काम करती थीं, वह था गाय को खाना खिलाना। इस मासूम पशु की हालात बेहद दयनीय है, खासकर शहरों में। लेकिन इसके साथ ही मुझे लगता है कि किसी को भी हमें यह आदेश देने का हक नहीं है कि हमें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। गाय के नाम पर लोगों को निशाना बनाना बर्बरता है।’’

इस प्रदर्शनी में कई पौराणिक किरदारों का चित्रण किया गया है। इसमें बुद्ध, राधा, महिषासुर, काली, गणेश और हनुमान शामिल हैं।  हालांकि उनकी रचनाओं में पौराणिक किरदारों का ही दबदबा है लेकिन दिल्ली कॉलेज आॅफ आटर् की पूर्व विद्यार्थी इस 32 वर्षीय कलाकार का कहना है कि वह धार्मिक नहीं हैं।

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