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आधार की अनिवार्यता पर अभी कोई अंतरिम आदेश नहीं: कोर्ट

सरकार ने भरोसा दिया है कि किसी भी व्यक्ति को इस पहचान के अभाव में वंचित नहीं किया जाएगा।
Author नई दिल्ली | June 28, 2017 01:34 am
देश में एक अरब लोगों के आधार कार्ड बन चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने समाज कल्याण की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार की अनिवार्यता संबंधी केंद्र की अधिसूचना पर अंतरिम आदेश देने से मंगलवार को इनकार कर दिया। इस बीच सरकार ने भरोसा दिया है कि किसी भी व्यक्ति को इस पहचान के अभाव में वंचित नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा के अवकाशकालीन पीठ ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं की महज इस आशंका के आधार पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता है कि आधार के अभाव में किसी भी व्यक्ति को विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सकता है। वह भी ऐसी स्थिति में जब कोई भी प्रभावित व्यक्ति अदालत नहीं आया है। जजों ने कहा-महज बाकी आशंका के आधार पर कोई भी अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता है। आपको एक हफ्ते इंतजार करना होगा। यदि किसी व्यक्ति को इस लाभ से वंचित किया जाता है तो आप अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित कर सकते हैं। तीन याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ वकील श्याम दीवान से पीठ ने कहा-हम ऐसे आदेश नहीं दे सकते जो अनिश्चित हैं। आप कह रहे हैं कि किसी को इससे वंचित किया जा सकता है परंतु हमारे सामने तो ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है।

अतिरिक्त महान्यायवादी तुषार मेहता ने आठ फरवरी की अधिसूचना का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कहा गया है कि यदि किसी के पास आधार नहीं है तो भी उसे मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और पैन कार्ड जैसे पहचान पत्रों का इस्तेमाल करने पर इन योजनाओं का लाभ मिलेगा। इन पहचान का मतलब यह है कि कोई भी छद्म व्यक्ति इन योजनाओं का लाभ न ले सके। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए दस अन्य दस्तावेज वैध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने जिन लोगों के पास आधार नहीं है और वे विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, उनके लिए आधार के लिए पंजीकरण कराने वास्ते 30 जून की तारीख बढ़ा कर 30 सितंबर कर दी है। इस अवधि में किसी भी व्यक्ति को इन लाभों से वंचित नहीं किया जाएगा। पीठ ने दस जून के शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इसने पैन कार्ड और आयकर रिटर्न के लिए आधार अनिवार्य करने संबंधी आयकर कानून के प्रावधान को वैध ठहराया है परंतु उसने निजता के अधिकार के मुद्दे पर संविधान पीठ द्वारा विचार होने तक इसके अमल पर आंशिक रोक लगा दी है। अदालत ने इस फैसले में की गई टिप्पणियों का जिक्र करते हुए इस मामले को सात जुलाई को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया।

 

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