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फर्जी डिग्री विवाद: अदालत ने चुनाव आयोग से स्मृति ईरानी के सर्टिफिकेट प्रमाणित करने के लिए कहा

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी पर चुनाव आयोग के हलफनामे में अपनी शिक्षा के बारे मे गलत जानकारी देने का आरोप है।
केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की फाइल फोटो। (PTI Photo by Nand kumar)

दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग को केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के शैक्षणिक सर्टिफिकेटों को प्रमाणित करने के लिए कहा है। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई  15 अक्टूबर को करेगी। स्मृति ईरानी पर चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में अपनी शिक्षा के बारे में भ्रामक जानकारी देने का आरोप है। ईरानी ने 2004 में हुए लोक सभा चुनाव  में दायर हलफनामे में खुद को स्नातक बताया था। अदालत ने पिछले साल 20 नवंबर को शिकायतकर्ता अहमर खान की अर्जी मंजूर कर ली थी जिसमें चुनाव आयोग और डीयू के अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि ईरानी की योग्यता के रिकॉर्ड को दिखाया जाए। चुनाव आयोग की तरफ से मौजूद एक अधिकारी ने इससे पहले अदालत से कहा था कि शैक्षणिक योग्यता के संबंध में ईरानी द्वारा दायर दस्तावेज का पता नहीं चल रहा है।

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ईरानी पर आरोप है कि पिछले दो चुनावों में दिए गए उनके शपथ पत्रों में अलग-अलग सूचनाएं दी गई है। दावा है कि स्मृति ने राज्यसभा में परचा भरते समय जो शपथ पत्र दिया था उसमें और लोकसभा चुनाव में दिए शपथ पत्र में शिक्षा (स्नातक) को लेकर भ्रांति है। यह सूचना एक दूसरे से मेल नहीं खाती है। इन सूचना में से एक में स्मृति ने खुद को बीकॉम तो दूसरे में बीए पास बताया है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय को आदेश दिया है कि स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर स्थिति साफ हो सके। इसके लिए उनके स्नातक में दाखिले के दस्तावेज और चुनाव में दिए गए शपथ पत्र का अदालत के सम्मुख आना जरूरी है। याचिकाकर्ता अहमर खान ने अप्रैल 2015 में स्मृति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने ईरानी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर आरोप लगाया है कि वे देश को गुमराह कर रही हैं।

खान का आरोप है कि ईरानी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में दी सूचना में खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्राचार से 1996 बैच का बीए स्नातक बताया है। तब स्मृति ने चांदनी चौक से कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने सूचना में खुद को बीए पास (कला स्नातक ) बताते हुए 1996 में डिग्री पूरी करने की बात की थी। इसके बाद 2011 में राज्यसभा में परचा भरते समय दिए उन्होंने खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ करसपांडेंट (पत्रचार) से बीकॉम बताया था। इतना ही नहीं पिछले (2014) लोकसभा चुनाव अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए दाखिल अपने तीसरे हलफनामे में ईरानी खुद को दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्रचार से बी कॉम बताया है। आरोप लगाया गया है कि स्मृति ईरानी की ओर से पेश हलफनामे की विषयवस्तु से स्पष्ट है कि उनकी ओर से शैक्षणिक योग्यता के बारे में केवल एक शपथ ही सही है। शिकायत में दावा किया गया है कि स्मृति ईरानी के इस हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत और भिन्न-भिन्न बयान दिया गया। खान ने अदालत से स्मृति के 10वीं और 12वीं परीक्षा के बारे में जानकारी लेने के लिए सीबीएसई को भी निर्देश देने की मांग की है, जिसे फिलहाल अदालत ने इस मामले से सीधा जुड़ा नहीं पाया।

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