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केदारनाथ हादसे में बच्चों को मरा बातकर मुआवजा लेने वाले दंपत्ति गिरफ्तार

केदारनाथ आपदा में अपने बच्चों के लापता होने की फर्जी सूचना देकर करीब सात लाख रुपए का मुआवजा लेने वाले दंपति को हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
Author हरिद्वार | November 25, 2015 02:07 am

केदारनाथ आपदा में अपने बच्चों के लापता होने की फर्जी सूचना देकर करीब सात लाख रुपए का मुआवजा लेने वाले दंपति को हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दंपति छतरपुर मध्यप्रदेश का रहने वाले है। इन्होंने 11 सितंबर 2013 को हरिद्वार कंट्रोल रूम को अपने बच्चों ममता और अजय के केदारनाथ आपदा में लापता होने की सूचना दी थी, जिसके आधार पर थाना ऊखीमठ जनपद रुद्रप्रयाग में मुकदमा दर्ज किया गया था। जबकि दोनों बच्चे जीवित हैं, मगर उनके नाम बदल कर आधारकार्ड और अन्य अभिलेख तैयार करवा लिए गए थे।

हरिद्वार पुलिस विभाग के सर्किल आफिसर चंद्र मोहन सिंह नेगी के अनुसार सोमवार को हरिद्वार कोतवाली क्षेत्र में रोडी बेलवाला में झगड़ा होने की सूचना मिलने पर जब पुलिस वहां पहुंची तो पूछताछ करने पर यह खुलासा हुआ कि रामनगर बबूला थाना राजनगर जिला छतरपुर मध्यप्रदेश के रहने वाले रामकृपाल ने 11 सितंबर, 2013 को आपदा नियंत्रण कक्ष-हरिद्वार में अपनी बेटी ममता (15) और बेटे अजय (6) के केदारनाथ आपदा में लापता होने की सूचना दी थी। इसके आधार पर थाना ऊखीमठ में धारा 363 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

पुलिस ने जांच में यह पाया कि उत्तराखंड व मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इन लापता हुए बच्चों को मरा मान कर रामकृपाल के परिवार को आर्थिक सहायता के लिए सात लाख रुपए दिए जा चुके हैं। जबकि उसके दोनों बच्चे जीवित पाए गए। जो दोनों उसके अन्य तीन बच्चों विजय (13), राहुल (4), पंकज (3) के साथ ही मौजूद पाए गए हैं।

रामकृपाल व उसकी पत्नी विद्या द्वारा अपने गृह जनपद की तहसील से ममता व अजय के नाम बदलकर पूजा व अमर नाम से वर्ष 2015 में आधार कार्ड व अन्य अभिलेख भी बनवाए गए। पुलिस ने रामकृपाल व उसकी पत्नी विद्या को तत्काल गिरफ्तार कर लिया। रामकृपाल ने पुलिस के सामने यह कबूला कि उसने अपने दो बच्चों के केदारनाथ आपदा में लापता होने के नाम पर उत्तराखंड सरकार और मध्यप्रदेश सरकार से सात लाख रुपए का मुआवजा लिया है।
पुलिस इस मामले की और भी ज्यादा गहराई से जांच पड़ताल कर रही है।

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