December 03, 2016

ताज़ा खबर

 

लहरा रहे थे 500 और हजार के नोट, पर ठप थे बाजार

अस्तव्यस्तता का नजारा था मेट्रो स्टेशन पर, जहां 500 रुपए से कम के रिचार्ज नहीं हो रहे थे।

Author नई दिल्ली | November 10, 2016 01:21 am
सरकार ने बंद किए 500 और 1000 रुपए के नोट। (PTI Photo)

दिल्ली में बुधवार सुबह की पहली किरण के साथ अफरातफरी का माहौल रहा। आॅटो वाले को सवारी नहीं मिल रही थी तो सवारियों को आॅटो नहीं मिल रहे थे। गाजीपुर की मंडी में खेतों से आर्इं ताजा सब्जियां ग्राहकों की बाट जोह रही थीं मगर दुकानदार ग्राहकों को सब्जियां नहीं बेच पा रहे थे। लोगों के हाथों में 500 से लेकर 1000 तक के नोट लहरा रहे थे लेकिन खरीद-फरोख्त नहीं थी। पेट्रोल पंपों, सीएनजी गैस स्टेशनों पर वाहनों की लंबी कतार थी और सड़कें सूनी। खाड़ी बावली, चांदनी चौक और शाहदरा के थोक बाजार भी सूने थे। केंद्रीय भंडार 500 और 1000 के नोट स्वीकार तो कर रहे थे लेकिन खुल्ले वापस नहीं कर रहे थे। प्रधानमंत्री के मंगलवार शाम किए एलान के अनुसार पुराने बड़े नोट 31 मार्च तक कानूनी बने रहेंगे लेकिन दिल्ली और एनसीआर के आम जीवन में ये बड़े नोट बुधवार से ही महज कागज के टुकड़े बना दिए गए थे।

वैशाली मेट्रो स्टेशन पर जब साझा आॅटो से सवारियां उतरीं तो गाजियाबाद के एक प्रबंधन कॉलेज की छात्रा ने आॅटो वाले को 500 रुपए का नोट पकड़ाते हुए सकुचाते हुए कहा कि अंकल आप तो ले लो, सुबह से आॅटो, रिक्शे और कैंटीन में सारे खुल्ले पैसे खर्च हो गए। आॅटो वाले ने सीधे कहा कि दस रुपए ही दीजिए, मैं आपको बाकी पैसे कहां से वापस करूंगा। तभी उसी आॅटो से उतरे एक अन्य युवक ने लड़की के बदले दस रुपए देते हुए कहा कि आप बुरा मत मानिए, जब सरकार बेबस कर देगी तो हमें एक साथ होना पड़ेगा। प्रबंधन की उस छात्रा की आंखों में बेबसी थी। बुदबुदाते हुए बोली कि सोचा न था कि कभी सड़क पर एक अजनबी से दस रुपए की मदद लेनी पड़ेगी। और इसके बाद अस्तव्यस्तता का नजारा था मेट्रो स्टेशन पर, जहां 500 रुपए से कम के रिचार्ज नहीं हो रहे थे।

एक नीलामी कंपनी में एवीपी के पद पर कार्यरत मनीष त्रिपाठी ने कहा कि बुधवार का दिन निजी से लेकर व्यावसायिक तौर पर परेशानियों भरा रहा। सबसे पहली मार तो मेट्रो स्टेशन पर पहुंचने के लिए रिक्शेवाली से खानी पड़ी, उनके पास तो मोबाइल वालेट जैसी कोई चीज नहीं होती। उसका इंतजाम किया तो दिलशाद गार्डन स्टेशन पर मेट्रो कार्ड रिचार्ज करवाने की दिक्कत हुई। मेट्रो 500 रुपए से कम का रिचार्ज कर नहीं रहा था, और इस चक्कर में हो रही किचकिच में लाइन लंबी होती चली गई। मनीष त्रिपाठी ने बताया कि खुले पैसे नहीं होने के चक्कर में आज हमारे दफ्तर के लोग चाय पीने नीचे नहीं उतरे और चाय वाले की कमाई भी आधी हो गई। त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को उनकी कंपनी को चने की नीलामी करनी थी, लेकिन बाजार में नकदी नहीं होने के कारण यह भी नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि मेरी मां को पटना जाना है और मैं उनके लिए चिंतित हूं कि उनके हाथों में खुले पैसे कहां से लाकर दूं। दिल्ली जैसे महानगर में तो बहुत से कामों में प्लास्टिक मनी चल जाती है लेकिन छोटे शहरों में आपको हर काम नकद देकर ही करना होता है।

500 और 1000 रुपए के नोट बंद- मोदी सरकार के फैसले पर क्‍या सोचती है जनता

मीडियाकर्मी सुजाता मधोक ने कहा कि बुधवार सुबह घर के सारे सदस्यों ने अपने-अपने छोट नोट निकाले तो कुल छह सौ रुपए इकट्ठा हुए। तभी घरेलू सहायक ने आकर कहा कि दीदी मेरे पास खुले पैसे तो 36 रुपए ही बचे हैं, दो दिन खर्चा कैसे चलेगा तो सौ रुपए उसे दे दिए। अब देखते हैं कि कल तक हमारा गुजारा कैसे चलता है।खारी बावली और शहादरा के बाजार की तरह साहिबाबाद के शालीमार गार्डेन में बुधवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भी खरीदार गायब रहे। यहां सब्जियों की रेहड़ी लगाने वाले अब्दुल ने कहा कि इस बाजार से तो लोग दो-तीन सौ का ही सामान खरीद कर ले जाते हैं, लेकिन अब लोग अपने छोटे नोट खरचने से पहले सौ बार सोच रहे हैं। जो सामान बहुत जरूरत का नहीं है उसे खरीदने से बचना चाह रहे हैं। आम तौर पर कंधे से कंधे टकराने वाले भीड़ होने वाले साप्ताहिक बाजार की इस सड़क पर बुधवार को गाड़ियां भी फर्राटे से दौड़ रही थीं।

बाजार के जानकारों का कहना है कि दो दिन बैंकों और एटीएम की बंदी के बाद भी सब कुछ बहुत जल्दी सामान्य होने वाला नहीं है। कंफेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडलेवाल का कहना है कि अभी कुछ दिनों तक ग्राहकों और उपभोक्ताओं की एक-दूसरे से बनी रहेगी क्योंकि अब ग्राहकों के हाथों से छोटे नोट भी खर्च हो चुके हैं। लेकिन उन्होंने इस बात की भी उम्मीद जताई कि जल्द ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 10, 2016 1:21 am

सबसे ज्‍यादा पढ़ी गईंं खबरें

सबरंग