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राहुल गांधी को प्रधानी सौंपने पर कांग्रेस में मतभेद

राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलों के बीच पार्टी में इसे लेकर अलग-अलग स्वर सुनाई देने लगे हैं। पार्टी की संचार इकाई के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को इसे गलत और अनावश्यक अटकल करार देते हुए खारिज कर दिया कि पार्टी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र को सितंबर के […]
राहुल से मुलाकात करने वाले शिष्टमंडल में भट्टा परसौल गांव के किसान भी शामिल थे

राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलों के बीच पार्टी में इसे लेकर अलग-अलग स्वर सुनाई देने लगे हैं। पार्टी की संचार इकाई के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को इसे गलत और अनावश्यक अटकल करार देते हुए खारिज कर दिया कि पार्टी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र को सितंबर के लिए टाल दिया है और इससे शीर्ष पद पर बदलाव और छह महीने के लिए टल गया है। जबकि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ने जोर देकर कहा कि पार्टी को अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी की जरूरत है।

कांग्रेस की संचार इकाई के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मीडिया के एक वर्ग में कांग्रेस का सत्र सितंबर के लिए टलने की बात करने वाली खबर गलत है और अनावश्यक अटकल है जिसका उद्देश्य राजनीतिक भ्रम पैदा करना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सत्र की तारीख पर जैसे ही निर्णय होगा हम सभी संबंधित लोगों को सूचित कर देंगे। सुरजेवाला की यह प्रतिक्रिया इस खबर के बाद आई कि कांग्रेस में शीर्ष स्तर पर परिवर्तन सितंबर से पहले होने की संभावना नहीं है क्योंकि पार्टी आलाकमान ने कांग्रेस के सत्र को टाल दिया है जो पहले इस महीने आयोजित होने वाला था।

खबरों में एक अज्ञात नेता के हवाले से कहा गया था कि कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव करने के लिए एक विशेष सत्र टालने का प्रस्ताव लाया गया था जो कि कांग्रेस में एक बड़े वर्ग की भावनाओं को प्रतिबिंबित करता। नेता ने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष विशेष सत्र आहूत करने के लिए अपनी विवेकाधीन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती हैं। लेकिन अब ऐसी कोई योजना नहीं है। खबर में कहा गया था कि राहुल के छुट्टी से जल्द वापस आने की उम्मीद है। वे चाहेंगे कि मुद्दों से अद्यतन होने के लिए उन्हें पांच छह महीने का समय मिले।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव सोनी ने सोमवार को जोर देकर कहा कि पार्टी को अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी की जरूरत है। उन्होंने पिछले एक महीने से ज्यादा समय से अवकाश पर चल रहे राहुल गांधी का भी जोरदार बचाव करते हुए कहा कि एक की कीमत पर दूसरे के होने का कोई सवाल ही नहीं है। पार्टी के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित की ओर से एक दिन पहले दिए गए एक बयान के बाद सोनी का यह बयान आया है।

दीक्षित ने कहा था कि पार्टी में 99 फीसद लोगों की नेता सोनिया हैं और पार्टी के केंद्र में उनकी जरूरत हमेशा से कहीं ज्यादा है। सोनी ने कहा कि एक की कीमत पर दूसरे के होने का कोई सवाल ही नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष हमारी अध्यक्ष हैं। हमें उनकी जरूरत है। और आप कुछ दिनों से देख रहे होंगे कि वे राज्यों में जाकर किसानों से मिल रही हैं, पार्टी में जान फूंक रही हैं। पूरी पार्टी जोश में है।

उन्होंने इन सवालों को भी दरकिनार किया कि दीक्षित की टिप्पणी इस बात का संकेत है कि पार्टी में कुछ लोग राहुल को नहीं चाहते। पिछले कुछ समय से ऐसी अटकलें जोरों पर हैं कि राहुल को कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है। सोनी ने कहा कि उनका (दीक्षित का) मतलब यह नहीं था। मीडिया से उनकी बातचीत से मुझे ऐसा कुछ नहीं लगा। आप उनसे पूछें कि उनके कहने का क्या मतलब था। वे यही बात बोलेंगे। हमें कांग्रेस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों की जरूरत है।

अंबिका सोनी ने कहा- हम जानते हैं कि सोनिया अपने नेतृत्व के गुणों के जरिए कांग्रेस को सत्ता में वापस लेकर आईं। यूपीए का गठन तब हुआ जब उन्होंने धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के नेताओं से संपर्क साधा और फिर हमने यूपीए-1 और यूपीए-2 की सरकार बनाई। आज हम एक बार फिर विपक्ष में हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि सोनिया गांधी हमारी अध्यक्ष हैं। यह पूछने पर कि क्या वे मानती हैं कि राहुल को अध्यक्ष बनाने का यह सही समय है, सोनी ने कहा- यह एक ऐसा फैसला है जो कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ता उचित समय पर करेंगे।
ऐसी अटकलें हैं कि मई में संभावित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है। हालांकि उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने और नए तरीके से काम करने व कई चुनावों में हार के बाद संगठनात्मक बदलाव की उन्हें छूट देने को लेकर अलग-अलग आवाजें लगातार उठ रही हैं। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि यह बिल्कुल सही समय है जब राहुल को शीर्ष पद पर आसीन हो जाना चाहिए। वहीं संदीप दीक्षित के अलावा अमरिंदर सिंह ने सोनिया गांधी के नेता बने रहने पर जोर दिया है। अब अंबिका सोनी ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी को अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी की जरूरत है। इससे स्पष्ट है कि राहुल गांधी के वापस आने के बाद अगले कांग्रेस अध्यक्ष के मुद्दे पर चर्चा के एक बार फिर तेज होने की संभावना है।

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  1. V
    VIJAY LODHA
    Apr 7, 2015 at 11:36 am
    कांग्रेस की कमान चाहे किसी भी हाथ में हो, पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण और जरुरी यह है भारतीय लोकतंत्र में सरकारें बनाने और गिराने वाले जिस आम आदमी की सुध लेने में उससे कोताही हुई है और जिसका गंभीर खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ रहा है, ईमानदारी से उसी आम जन के पास पार्टी को अपनी नीतियों को लेकर फिर से जाना होगा. जनता को यह विश्वास भी दिलाना होगा कि पिछली गलतियों से पार्टी ने सबक और नसीहत ली है. बस यही एक दवा है जो पार्टी में नव-जीवन का संचार कर सकती है.
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