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“मोदी सरकार ने क‍िया सदी का सबसे बड़ा घोटाला, छापे दो तरह के नोट”

कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड ने राज्यसभा में इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा किया, जिस वजह से कार्यवाही चार बार स्थगित हुई।
कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने शून्यकाल के शुरू होने पर दो प्रकार के नोटों की छपाई का मुद्दा उठाया (PTI Photo)

विपक्ष ने मंगलवार को राज्यसभा में केंद्र सरकार पर 500 और 1000 रुपए के नोट दो अलग-अलग रूप में छापने का आरोप लगाया। कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड ने राज्यसभा में इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा किया, जिस वजह से कार्यवाही चार बार स्थगित हुई। विपक्ष ने दो प्रकार के नोट छापने को ‘मोदी सरकार का सदी का सबसे बड़ा घोटाला’ बताया। कांग्रेस के सदस्यों ने बार बार आसन के समक्ष आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सदन के नेता एवं वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि विपक्ष आए दिन बिना नोटिस दिए महत्वहीन मुद्दे उठाता रहता है।

डेरेक ओ’ब्रायन समेत कई विपक्षी सांसदों ने दो अलग-अलग प्रकार के नोटों का प्रिंट आउट लहराते हुए दिखाया। अरुण जेटली ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत कोई कागज लहरा कर व्यवस्था का प्रश्न उठाया जाए। उन्होंने कहा कि यह शून्यकाल का दुरूपयोग हो रहा है। जेटली ने कहा कि कांग्रेस ने पहले राज्यसभा चुनाव में नोटा का मुद्दा उठाया था। लेकिन बाद में पता लगा कि यह प्रावधान उनके ही शासनकाल में बनाया गया था।

इससे पूर्व कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने शून्यकाल के शुरू होने पर दो प्रकार के नोटों की छपाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने व्यवस्था के प्रश्न के तहत यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि दो प्रकार के नए नोट छापे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक प्रकार का नोट सत्तारूढ दल के लिए है वहीं दूसरा अन्य लोगों के लिए है। सिब्बल ने कहा कि हमें आज पता लगा कि सरकार ने क्यों नोटबंदी की थी। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह देश का सबसे बड़ा घोटाला है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के प्रतिवाद के बीच उन्होंने कहा कि दो प्रकार के नोट छापे जा रहे हैं और इस सरकार को पांच मिनट भी सत्ता में बने रहने का हक नहीं है। उपसभापति पी जे कुरियन ने कहा कि अगर दो प्रकार के भी नोट हैं तो भी इस मुद्दे को व्यवस्था के प्रश्न के तहत नहीं उठाया जा सकता।

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