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सरबत खालसा के पीछे कांग्रेस का हाथ, राहुल करें कार्रवाई: शिअद

सुखबीर बादल द्वारा ‘सरबत खालसा’ के पीछे कांग्रेस द्वारा ‘‘बड़ी भूमिका’’ निभाए जाने का आरोप लगाने के एक दिन बाद सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने..
Author चंडीगढ़ | November 15, 2015 01:24 am
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल द्वारा ‘सरबत खालसा’ के पीछे कांग्रेस द्वारा ‘‘बड़ी भूमिका’’ निभाए जाने का आरोप लगाने के एक दिन बाद सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शनिवार को राहुल गांधी से कहा कि वह समागम आयोजन की ‘‘योजना बनाने और निर्देश देने’’ के लिए अपने पार्टी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करें। शिअद नेताओं ने एक संवाददाता सम्मेलन में कुछ कांग्रेस नेताओं की सिख कट्टरपंथी समूह यूनाइटेड अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता से कथित बातचीत और उसे समागम के लिए भीड़ जुटाने का आश्वासन देने संबंधी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी सुनाई।

पंजाब के शिक्षा मंत्री एवं वरिष्ठ शिअद नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा, ‘‘कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने 10 नवंबर को सरबत खालसा के आयोजन में भाग लिया और इसकी योजना बनाई। उन्होंने जमावड़े में प्रस्ताव पारित करने और लोगों को लाने के निर्देश भी दिए।’’

उन्होंने शनिवार को यहां संवाददता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम राहुल गांधी से पूछते हैं कि वह राज्य में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द में खलल डाल रहे अपने पार्टी नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगे।’’

हालांकि, लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता अमरिंदर सिंह ने चब्बा में ‘सरबत खालसा’ के आयोजन में कांग्रेस का हाथ होने के शिअद के आरोपों को खारिज किया। चीमा ने कांग्रेस पर करारा हमला करते हुए कहा कि पार्टी आलाकमान को देश को बताना चाहिए कि वह चब्बा कार्यक्रम में इसकी खुली भागीदारी पर ‘‘साजिशपूर्ण मौन’’ क्यों साधे हुए है।

यह पूछे जाने पर कि इस बातचीत की रिकॉर्डिंग कहां से आई, चीमा ने कहा कि कथित बातचीत सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि सरकार द्वारा फोन टैप किए गए। अकाली नेता ने कहा, ‘‘यह रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। यदि आवश्यकता हुई तो सरकार इसकी जांच करा सकती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पहले उन्हें इनकार करने दीजिए कि यह उनकी बातचीत नहीं है।’’

चीमा ने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ और निर्वाचित नेता, संगठन में जिम्मेदार पद रखने वालों ने 10 नवंबर को कार्यक्रम की योजना और आयोजन का काम ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने इसमें खुलेआम भाग भी लिया और मंच से कार्यवाही का समर्थन करते हुए भाषण भी दिए।’’

उन्होंने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि क्या उसका इरादा पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के प्रमुख वाधवा सिंह का ‘‘धन्यवाद’’ व्यक्त करने का है जिसका बधाई संदेश ‘सरबत खालसा’ में पढ़ा गया।

शिअद नेता ने कहा, ‘‘शिअद-भाजपा सरकार ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। हम बदले की कार्रवाई करने वाले नहीं हैं, लेकिन राज्य में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द में खलल डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे चाहे वह कोई भी हो।’’

चीमा ने कहा कि अगर कोई खुफिया विफलता हुई है तो राज्य सरकार इसे भी देखेगी। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को दोषमुक्त ठहराने की कोशिश करने के लिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा पर भी हमला बोला। चीमा ने कहा, ‘‘आपको अपने पार्टी नेताओं को बचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।’’

शुक्रवार को बाजवा ने उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को चुनौती दी थी कि वह या तो 10 नवंबर के ‘सरबत खालसा’ में कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता साबित करके दिखाएं या फिर राजनीति छोड़ दें। इस बीच, अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से कहा कि वह ‘‘अपनी सीतनिद्रा से बाहर आएं और अपनी चुप्पी तोड़ें।’’

उन्होंने दावा किया कि ‘‘असल में स्थिति से भागकर और अपने तथा अपनी सरकार के बचाव में दूसरी कतार के नेताओं को छोड़कर’’ मुख्यमंत्री ने एक बार फिर राज्य को धोखा दिया है। कथित फोन रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए अमरिंदर ने एक बयान में कहा कि ‘‘यह पूरी तरह मनगढंत है और हमारे नेता इन आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं।’’

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हमारे नेताओं की बातचीत की टेलीफोन रिकॉर्डिंग होने का दावा कर क्या सरकार ने यह स्वीकार नहीं किया है कि वह राजनीतिक विरोधियों के फोन टैप कर रही है जो एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।’’

उन्होंने पूछा कि अन्यथा यह रिकॉर्डिंग उनके पास कहां से आ गई? इस बीच, रविवार को मंत्रियों और अकाली दल के विधायकों के घेराव के कट्टरपंथी नेताओं के आह्वान पर पंजाब के शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यदि विरोध लोकातंत्रिक तरीके से होता है तो राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन यदि कोई हिंसा का सहारा लेगा और शांति में खलल डालेगा तो सरकार निश्चित रूप से कार्रवाई करेगी।

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