ताज़ा खबर
 

राहुल गांधी की ‘राजनीतिक जासूसी’ पर भड़की कांग्रेस

कांग्रेस ने शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर राहुल गांधी की ‘राजनीतिक जासूसी’ कराने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके स्टाफ ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को उनके बारे में अवांछित और बेतुकी पूछताछ करते पकड़ा था। गांधी की जासूसी और निगरानी के मुद्दे को संसद में उठाने की घोषणा करते हुए […]
राहुल से मुलाकात करने वाले शिष्टमंडल में भट्टा परसौल गांव के किसान भी शामिल थे

कांग्रेस ने शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर राहुल गांधी की ‘राजनीतिक जासूसी’ कराने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके स्टाफ ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को उनके बारे में अवांछित और बेतुकी पूछताछ करते पकड़ा था।

गांधी की जासूसी और निगरानी के मुद्दे को संसद में उठाने की घोषणा करते हुए कांग्रेस ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से व्यापक स्पष्टीकरण की मांग की और पुलिस के इस दावे को खारिज किया कि यह महज रुटीन सुरक्षा जांच का मुद्दा है। पिछले महीने संसद का बजट सत्र शुरू होने के समय से ही राहुल गांधी छुट्टी पर हैं।

एक पुलिसकर्मी के राहुल गांधी के कार्यालय जाने और उनके नैन नक्श के बारे में सवाल पूछे जाने को लेकर मीडिया में एक खबर आने के बाद पार्टी प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए कहा कि इस तरह की जासूसी पहले गुजरात में संपन्न हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीतिक जासूसी, निगरानी, राजनीतिक विरोधियों के जीवन में इस तरह की घुसपैठ, यह गुजरात माडल हो सकता है। यह भारत का माडल नहीं है। ट्रैक रिकार्ड यह दर्शाता है कि यह गुजरात में संपन्न माडल है, खासकर राजनीतिक विरोधियों, न्यायाधीशों, पत्रकारों और निजी व्यक्तियों के लिए। सिंघवी ने कहा- हम सरकार पर आरोप लगा रहे हैं और इस तरह के व्यवहार की निंदा कर रहे हैं। यह सिर्फ कांग्रेस के लिए और राहुल गांधी के लिए विशेष नहीं है बल्कि सामान्यतौर पर सभी राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ है।

सिंघवी ने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले तुगलक रोड थाने से नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस मुख्यालय से दिल्ली पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक शमशेर सिंह को जासूसी करते, अनावश्यक और अजीब पूछताछ करते और कांग्रेस उपाध्यक्ष के निवास के आसपास घूमते पाया गया। सिंघवी ने इसे महज दिल्ली पुलिस से जुड़ा मुद्दा मानने से इनकार किया और इसे एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बताया। उन्होंने इसकी तुलना गुजरात के कथित फोन टैपिंग की घटना से की और कहा कि यह ऐसा मामला है जिसके खिलाफ सभी दलों को खड़ा होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि कोई कानून इस तरह की प्रक्रिया कि इजाजत नहीं देता। उन्होंने भाजपा के उस दावे को हास्यास्पद बताते हुए खारिज किया कि यह दिल्ली पुलिस का कोई सुरक्षा सर्वेक्षण हो सकता है। सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद सहित सभी मंचों पर उठाएगी। इस कथित जासूसी के पीछे की मंशा के बारे में पूछे जाने पर सिंघवी ने कहा कि वे यहां अटकलें लगाने के लिए नहीं हैं लेकिन झट से जवाब दिया कि राजनीतिक जासूसी इसलिए नहीं होती क्योंकि आप राजनीतिक विरोधियों से हाथ मिला रहे हैं या उनके साथ भोजन किया है।

सिंघवी ने आरोप लगाया कि पुलिस अफसर अजीब किस्म के सवाल पूछ रहा था। मसलन राहुल गांधी के बाल और आखों का रंग क्या है, उनके जूते और वे क्या करते हैं और कहां जाते हैं जैसे ब्योरे और साथ ही उनके और उनके सहयोगियों के फोन नंबर और पते के बारे में पूछताछ कर रहा था। इस पुलिस अफसर को स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के कर्मियों ने सबसे पहले देखा था।

सिंघवी ने कहा कि जो व्यक्ति एसपीजी के घेरे में है उसके बारे में इस तरह के सवाल पूछना विचित्र बात है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि राहुल गांधी के दफ्तर जाकर पूछताछ कोई अलग-थलग या पहली घटना न हो। आने वाले समय में शायद ऐसी और घटनाएं उजागर हो सकती हैं।
नियमित सुरक्षा जांच का हिस्सा

यह नियमित सुरक्षा जांच का हिस्सा है। हमारे बीट अधिकारी रामेश्वर दयाल 12 मार्च को राहुल गांधी के घर पर गए थे और उनके बारे में जानकारी मांगी थी। चूंकि, बीट अधिकारी ऐसे लोगों से सीधे नहीं मिल पाते इसलिए वे उनके दफ्तर से संपर्क करते हैं और जरूरी जानकारी संबंधी प्रारूप छोड़ आते हैं। उसी दिन पुलिस सांसद कृष्ण पाल गुज्जर, नरेश अग्रवाल, एम वीरप्पा मोइली और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के घर भी गई थी। बीट अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में रह रहे महत्त्वपूर्ण लोगों के कर्मचारियों से मिलने और उनके बारे में निजी जानकारी रखने का निर्देश है। पुलिस प्रधानमंत्री, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जैसे सभी नेताओं और सात रेसकोर्स रोड के बारे में भी जानकारी रखती है। कई मामलों में ऐसे विवरण महत्त्वपूर्ण साबित होते हैं, खासतौर से जब किसी बड़े नेता के घर के सामने विरोध प्रदर्शन जैसी कोई चीज हो रही हो। -भीमसेन बस्सी, पुलिस आयुक्त

कैसे दिखते हैं…

कांग्रेस के मुताबिक पुलिस अफसर अजीब किस्म के सवाल पूछ रहा था। मसलन राहुल गांधी के बाल और आखों का रंग क्या है, उनके जूते और वे क्या करते हैं और कहां जाते हैं और उनके और उनके सहयोगियों के फोन नंबर और पते क्या हैं।
प्रारूप में होगा बदलाव

दिल्ली पुलिस के आयुक्त बीएस बस्सी ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आवास पर जाकर पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर सुरक्षा से जुड़ी सूचनाएं हासिल करने के लिए जो फार्म दिया था, उसमें कई बदलाव किए जाएंगे क्योंकि उसमें पूछे जाने वाले कई सवाल अब ‘अप्रासंगिक’ हो चुके हैं। कांग्रेस ने फार्म में पूछे गए कुछ सवालों को ‘हास्यास्पद’ करार दिया था।

बताते चलें कि इस फार्म में 18 सवाल पूछे जाते हैं जिसमें नाम, पिता का नाम, जन्म-स्थान, उम्र, रंग, शरीर पर जन्म के समय का कोई निशान, बालों का रंग, आंखों का रंग, लंबाई, चेहरे का ब्योरा, जूते की साइज इत्यादि शामिल होते हैं। दिल्ली पुलिस के दो कर्मी – रामेश्वर दयाल और शमशेर सिंह – हाल ही में यह फार्म लेकर राहुल के आवास पर गए थे और पूछा था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष का हुलिया कैसा है और उनकी आंखों का रंग कैसा है।

बस्सी ने कहा- मैंने कांग्रेस प्रवक्ता का बयान सुना जो कह रहे थे कि फॉर्म में पूछे गए कुछ सवाल हास्यास्पद हैं। मौजूदा संदर्भ में आप जरूर इन सवालों को सुनकर हंस सकते हैं। इस फार्म पर बहस के लिए मैं उनका धन्यवाद देता हूं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग