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तमिलनाडु चुनाव मिल कर लड़ेंगे द्रमुक व कांग्रेस

तीन साल पहले द्रमुक ने कांग्रेस पर श्रीलंकाई तमिलों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए उससे संबंध तोड़ लिए थे।
Author चेन्नई | February 14, 2016 00:47 am
डीएमके प्रमुख करुणानिधि से मिलते कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद।

कांग्रेस और द्रमुक ने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर अपना मतभेद खत्म करते हुए शनिवार को तमिलनाडु का आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए साथ आने का फैसला किया। 2013 में इस मुद्दे पर दोनों दलों का नौ साल पुराना गठबंधन टूट गया था। कांग्रेस ने द्रमुक को सबसे विश्वसनीय सहयोगी बताया। इसके साथ गुलाम नबी आजाद ने यहां द्रमुक के अध्यक्ष एम करुणानिधि के साथ बैठक में गठबंधन को अंतिम रूप दिया। तीन साल पहले द्रमुक ने कांग्रेस पर श्रीलंकाई तमिलों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए उससे संबंध तोड़ लिए थे। आजाद ने द्रमुक अध्यक्ष के गोपालपुरम स्थित घर में बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि पार्टी ने हमारे राष्ट्रीय स्तर पर फैसला कर लिया है। करुणानिधि और द्रमुक के दूसरे माननीय नेताओं के स्तर पर फी फैसला कर लिया गया है कि हम यह चुनाव साथ लड़ेंगे, हमारा गठबंधन होगा।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता आजाद ने करुणानिधि व द्रमुक की तारीफ करते हुए कहा कि करुणानिधि माननीय नेता हैं और उनकी पार्टी सबसे विश्वसनीय है। आजाद से पूछा गया कि 2013 से 2016 के बीच क्या बदला है जिसके कारण दोनों दलों ने हाथ मिलाने का फैसला किया, उन्होंने कहा कि राजनीतिक मजबूरियां और दबाव है। उन्होंने जयललिता के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक के खिलाफ विधानसभा चुनाव में द्रमुक नीत गठबंधन को जीत मिलने का विश्वास जताते हुए कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है जब हम द्रमुक के साथ गए हैं। हमारे बीच पूर्व में भी ऐसी साझेदारियां रही हैं। राजनीति में कई बार मजबूरियां और दबाव होते हैं।

आजाद ने कहा कि गठबंधन में शामिल होने वाले कांग्रेस और द्रमुक व दूसरे संभावित सहयोगी एक दुर्जेय गठबंधन बनाएंगे। यह पूछने पर कि क्या दूसरे सहयोगियों से संकेत अभिनेता-नेता विजयकांत की डीएमडीके से है जिन्हें द्रमुक और भाजपा दोनों लुभाने में लगे हैं, कांग्रेस नेता ने कहा कि इस पर फैसला द्रमुक को करना है। द्रमुक प्रधान सहयोगी है। उसके नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। वे ही इस पर फैसला करेंगे। आजाद ने कहा कि और भी दल गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। कांग्रेस तमिलनाडु में करीब पांच दशकों से सत्ता से दूर है और आमतौर पर द्रविड़ दलों- द्रमुक या अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन करती रही है।

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