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तीन बार माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले कर्नल का बड़ा आरोप- गलत काम का विरोध करने पर दो पूर्व सेना प्रमुखों ने सिलसिलेवार सताया

20 दिसंबर 2011 की आधी रात सैन्य इंटेलिजेंस यूनिट के कर्मियों ने असम के जोरहाट में सुरजीत गोगोई नाम के एक व्यापारी के घर पर छापा मारा था। उस पर अलगवावादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रॉन्ट ऑफ असम के लिए काम करने का शक था।
कर्नल सौरव सिंह शेखावत ने दो पूर्व सेना प्रमुखों, जनरल बिक्रम सिंह, जनरल दलवीर सिंह सुहाग और लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्णा पर शोषण का आरोप लगाया है। (फाइल फोटो)

भारतीय सेना के कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित पाराशूट रेजिमेंट के 21वीं बटालियन के कर्नल सौरव सिंह शेखावत ने दो पूर्व सेना प्रमुखों, जनरल बिक्रम सिंह, जनरल दलवीर सिंह सुहाग और लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्णा पर शोषण का आरोप लगाया है। 45 वर्षीय शेखावत का आरोप है कि साल 2011 के दिसंबर में जोरहाट में एक सैन्य ऑपरेशन किया गया था जिसमें नियमों को ताक पर रखा गया था। इसके खिलाफ शेखावत ने आर्मी हेडक्वार्टर को पत्र लिखा था। एचटी मीडिया के मुताबिक, शेखावत के पत्र में साफ-साफ लिखा गया है कि सेना के टॉप मोस्ट अधिकारियों द्वारा उन्हें बार-बार और लंबे समय तक परेशान किया गया।

शेखावत के आरोपों ने छह साल पहले हुए जोरहाट ऑपरेशन पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। इस ऑपरेशन की वजह से भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच एक तरह से युद्ध की स्थिति पैदा हो गई थी और एक समय पर सेना के सक्सेसन प्लान को बेपटरी कर दिया था। जब एचटी मीडिया ने इस बारे में दलबीर सिंह सुहाग और लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्णा से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उनलोगों ने कई फोन कॉल्स और मैसेजेज का कोई जवाब नहीं दिया जबकि जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि उन्हें कुछ याद नहीं है। जनरल सिंह ने कहा कि उन्हें रिटायर हुए तीन साल से ज्यादा हो गए।

शेखावत जो फिलहाल स्टडी लीव पर हैं और दिल्ली स्थित इन्स्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडी एंड एनालिसिस में रिसर्च कर रहे हैं, उन्होंने भी इस मामले पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शेखावत द्वारा शिकायत इस साल अप्रैल में की गई है। सेना के सूत्रों का कहना है कि ऐसी शिकायतों का निपटारा करने में अमूमन छह से सात महीने का वक्त लगता है।

बता दें कि 20 दिसंबर 2011 की आधी रात सैन्य इंटेलिजेंस यूनिट के कर्मियों ने असम के जोरहाट में सुरजीत गोगोई नाम के एक व्यापारी के घर पर छापा मारा था। उस पर अलगवावादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रॉन्ट ऑफ असम के लिए काम करने का शक था। गोगोई मिलिट्री इंजीनियरिंग कॉर्प में ठेकेदारी करते थे। जिस वक्त उनके घर पर छापेमारी की गई थी, उस वर्त गोगोई 300 किलोमीटर दूर गुवाहाटी में थे। घर पर उनकी पत्नी रेणु, दोनों बेटे और एक बेटी थे। आरोप है कि सैन्य इंटेलिजेंस के लोगों ने छापेमारी के दौरान कैश, ज्वेलरी, लाइसेंसी रिवॉल्वर और कई अहम कागजात लूट लिए। इसके अलावा नियमों को ताक पर रखकर की गई छापेमारी से पहले सेना ने लोकल पुलिस को भी सूचना नहीं दी थी।

शेखावत उस वक्त जोरहाट में ही 21वीं बटालियन का नेतृत्व कर रहे थे। सेना ने उन्हें भी इस छापेमारी के बारे में कोई सूचना नहीं दी थी। जब शेखावत ने इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारी तत्कालीन ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ अभय कृष्णा को दी तो उन्होंने सेना द्वारा छापेमारी की घटना से इनकार कर दिया था। कहा जाता है कि उस वक्त इंटेलिजेंस यूनिट कृष्णा के तहत ही था। इसके अलावा बिक्रम सिंह सेना के पूर्वी अंग के कमांडर थे जबकि दलबीर सिंह 3कॉप्स के कमांडर थे।

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