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कोयला घोटाला: CBI के पूर्व निदेशक की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, SIT के गठन को वापस लेने की थी मांग

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाले तीन जजों के पीठ ने कहा कि इस साल 23 जनवरी के आदेश को वापस लेने का कोई कारण नहीं है।
Author नई दिल्ली | March 25, 2017 01:40 am
कोयला खदान में काम करता मज़दूर। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा की याचिका खारिज कर दी। इसमें कोयला घोटाले के मामलों में जांच को प्रथम दृष्टया बिगाड़ने के आरोपों की जांच करने के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित करने के शीर्ष अदालत के आदेश को वापस लेने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाले तीन जजों के पीठ ने कहा कि इस साल 23 जनवरी के आदेश को वापस लेने का कोई कारण नहीं है। इसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि सिन्हा के सीबीआइ निदेशक रहते उनके द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए प्रथम दृष्टया मामला निश्चित रूप से बनता है। पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति एके सीकरी भी शामिल हैं।

जजों ने कहा, ‘हमें अपने आदेश को वापस लेने की कोई वजह नहीं दिखाई देती। आवेदन खारिज किया जाता है।’ शीर्ष अदालत ने कोयला ब्लॉक आबंटन मामलों में जांच को बिगाड़ने के लिए सिन्हा द्वारा पहली नजर में अधिकारों का दुरुपयोग करने के आरोपों की जांच के लिए 23 जनवरी को विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीबीआइ के मौजूदा निदेशक एसआइटी के प्रमुख होंगे, जो एजंसी के पूर्व विशेष निदेशक एमएल शर्मा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति की रिपोर्ट को देखेंगे। समिति ने पहली नजर में पाया था कि सिन्हा ने पद पर रहते हुए अनियमितताओं के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार कुछ लोगों की तरफदारी करने का प्रयास किया था।

सिन्हा की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि पूर्व सीबीआइ निदेशक को उनके आवास पर रखी विजिटर्स डायरी में उल्लेखित नामों के आधार पर आरोपों पर जवाब देने का अवसर नहीं दिया गया। इन नामों से संकेत मिला था कि उन्होंने घोटाले के कुछ आरोपियों से मुलाकात की थी। विकास सिंह ने कहा कि यह डायरी एमएल शर्मा या किसी एसआइटी द्वारा जांच का आदेश देने के लिए स्वीकार्य साक्ष्य नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, ‘मुझे डायरी पर जवाब देने का अवसर कभी नहीं दिया गया।’ इस पर पीठ ने कहा कि 23 जनवरी का आदेश डायरी पर आधारित नहीं था। यह एमएल शर्मा की रिपोर्ट पर आधारित था। हालांकि सिंह ने दलील दी कि सिन्हा को एमएल शर्मा की रिपोर्ट तक नहीं मुहैया कराई गई जिसके आधार पर शीर्ष अदालत ने एसआइटी जांच का आदेश दिया है।

एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने सिन्हा की दलील का विरोध किया और कहा कि पूर्व सीबीआइ प्रमुख को आरोपों पर जवाब देने का अवसर नहीं दिया गया। भूषण ने आरोप लगाया कि सिन्हा ने जांच को बिगाड़ने का प्रयास किया था और कुछ ऐसे आरोपियों से मुलाकात की थी जिन पर कोयला घोटाले के मामलों में जांच चल रही थी। शीर्ष अदालत ने 23 जनवरी के अपने आदेश में साफ किया था कि वह याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के गुण-दोषों या एमएल शर्मा समिति की ओर से तैयार रिपोर्ट की विषयवस्तु के आधार पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही।

 

 

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