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भारत से चार गुना ज्‍यादा चीनी युद्धपोतों का जमावड़ा: चीन के दुश्‍मनों से दोस्‍ती बढ़ा रहा भारत, व‍ियतनाम से म‍िला तेल ब्‍लॉक का ठेका

चीन ने हिन्द महासागर में 283 सरफेस कॉम्बैट युद्धपोत तैनात रखे हैं। वहीं भारत ने ऐसे 66 युद्धपोत तैनात किए हैं।
साल 2015 में चीन दौरे में भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी। (तस्वीर- पीटीआई)

सिक्किम स्थित भारत चीन सीमा पर जारी तनाव, हिन्द महासागर और अदन की खाड़ी में चीनी युद्धपोतों का बढ़ती संख्या, दोनों देशों के नेताओं और मीडिया की बयानबाजियों के बीच वियतनाम ने दक्षिणी चीन सागर में तेल के एक ब्लॉक के अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) का ठेका दोबारा भारत को दे दिया है। दक्षिण चीन सागर स्थित वियतनामी जल क्षेत्र पर चीन भी दावा करता है। चीन का दक्षिण चीन सागर की जलसीमा को लेकर वियतनाम समेत फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और ताईवान इत्यादि देशों से विवाद है।

जाहिर है वियतनाम का ये फैसला जहां भारत की भूराजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा वहीं चीन को इससे कड़ा कूटनीतिक संदेश भी जाएगा। भारत सरकार द्वारा संचालित ओनजीएसी  विदेश को वियतनाम ने दक्षिण चीन सागर स्थित ब्लॉक 128 के अन्वेषण का दो साल के लिए ठेका दिया है। ओएनजीसी विदेश के मैनेजिंग डायरेक्टर के वर्मा ने ये जानकारी समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दी।

चीन के विस्तारवादी नीति का जवाब देने के लिए भारत ने पूर्वी एशिया के कई देशों के संग अपने संबंध पिछले कुछ सालों में बेहतर बनाए हैं। वियतनाम का ताजा फैसला उसी सिलसिले की एक कड़ी है। पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी वियतनाम गए थे। वो पिछले 15 साल में वियतनाम जाने वाले पहले भारतीय पीएम थे। पीएम मोदी ने वियतनाम को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज हथियार खरीदने के लिए दिया था।  वियतनाम, म्यांमार, फिलीपींस के अलावा जापान के साथ भी भारत के रिश्ते बहुत अच्छे हैं।

पिछले महीने भारतीय सेना अध्यक्ष बिपिन रावत म्यांमार के दौरे पर गए थे। म्यांमार के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी कमांडर इन चीफ आंग लियांग शुक्रवार (सात जुलाई) को भारत पहुंचे। अपने आठ दिन के भारत दौरे में म्यांमार के सैन्य कमांडर कई अहम समझौते करेंगे। दक्षिणपूर्व एशिया के देशों से भारत के बेहतर रिश्तों से चीन पर दबाव बढ़ गया है। जाहिर चीन के दादागिरी वारे रवैये के खिलाफ इन देशों का भारत के साथ आ जाने से चीन इलाके में अकेले पड़ जाएगा।

इन देशों के अलावा जापान और दक्षिण कोरिया भी चीन के खिलाफ भारत की झुके नजर आते हैं। जापान को चीन अपना परंपरागत प्रतिद्वंद्वी मानता है। 10 जुलाई से भारत, जापान और अमेरिका की नौसेनाएं एक साझा युद्ध अभ्यास करने वाली हैं। भारत ने इस अभ्यास के लिए अपनी अब तक का सबसे बड़ा दल भेजा रहा है। वहीं दक्षिण कोरिया के कट्टर दुश्मन उत्तर कोरिया के चीन से बेहद करीबी संबंध हैं। दक्षिण कोरिया अमेरिका का करीबी है। इन भूराजनीतिक समीकरणों से चलते दक्षिण कोरिया स्वाभाविक रूप से चीन के खिलाफ भारत का साथ देगा। अभी पिछले हफ्ते ही दक्षिण कोरिया के एक राजनयिक ने भारत से उत्तर कोरिया के संग विवाद में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी।

इंडिया स्पेंड वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार चीन ने हिन्द महासागर में भारत से चार गुना ज्यादा युद्धपोत तैनात कर रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन ने हिन्द महासागर में 283 सरफेस कॉम्बैट युद्धपोत तैनात रखे हैं। वहीं भारत ने ऐसे 66 युद्धपोत तैनात किए हैं। चीनी सेना ने 26 डिस्ट्रायर तैनात रखे हैं, वहीं भारत ने केवल 11 डिस्ट्रायर लगाए हैं। हिन्द महासागर में इस समय चीन के 52 फ्रिजेट तैनात हैं जबकि भारत ने केवल 14 फ्रिजेट नियुक्त किए हैं। चीन ने हिन्द महासागर में 106 कॉर्वेटे और मिसाइल बोट तैनात किए हैं। वहीं भारत ने 25 कॉर्वेटे और मिसाइल बोट नियुक्त किए हैं।

वीडियो- चीनी नेता ने दिया सीमा विवाद सुलझाने का अजब प्रस्ताव

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