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डीटीएच नीति में बदलाव, राज्यों को भी मिलेगा लाइसेंस बांटने का अधिकार

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने केबल टीवी आॅपरेटरों को चैनल दिखाने के अधिकार से संबंधित लाइसेंस नीति में बदलाव को हरी झंडी दे दी है।
Author July 30, 2017 01:47 am

दीपक रस्तोगी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने केबल टीवी आॅपरेटरों को चैनल दिखाने के अधिकार से संबंधित लाइसेंस नीति में बदलाव को हरी झंडी दे दी है। बदले नियमों के अनुसार, अब राज्य सरकारों को डीटीएच (डायरेक्ट टू होम) का लाइसेंस जारी करने का अधिकार होगा। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में राज्य सरकार की कंपनियों को केबल वितरण के अधिकार मिले हैं। केंद्र ने डीटीएच की लाइसेंस फीस घटा दी है और सेवा अवधि बढ़ा दी है।  लाइसेंस नीति में बदलाव के फैसले का अभी तक आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव एनके सिन्हा के अनुसार, नीतिगत फैसले के बारे में कैबिनेट की आधिकारिक मंजूरी मिलनी बाकी है। हालांकि, नई नीति के मद्देनजर काम शुरू कर दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दो राज्यों में राज्य सरकार की कंपनियों- तमिलनाडु में ‘तमिलनाडु अरासू केबल टीवी कॉरपोरेशन लिमिटेड’ और ‘आंध्र प्रदेश एपीएसएफ लिमिटेड’ को केबल वितरण के अधिकार सौंप दिए हैं।

ये कंपनियां तकनीकी सरंजाम जुटाने में लग गई हैं। दोनों कंपनियां 17 अगस्त से अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के द्वारा दिए गए कई सुझावों में लाइसेंस नीति में बदलाव के सुझाव को अमल में लाया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत लोगों को कम खर्च में  ज्यादा चैनल देखने की सुविधा दिए जाने का तर्क दिया जा रहा है। लेकिन इन नीति पर सवाल उठाने वाले जानकार टेलीविजन चैनलों के प्रसारण पर राज्यों में सत्ताधारी राजनीतिक दलों के नियंत्रण की संभावना जता रहे हैं। दूसरी ओर, वित्तीय नुकसान का हवाला देते हुए पहले से राष्ट्रीय स्तर पर मैदान में डटीं डीटीएच कंपनियों ने सूचना व प्रसारण मंत्रालय के द्वार खटखटाने शुरू कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत डीटीएच कंपनियों को 20 साल के लिए लाइसेंस मिलेगा और सालाना फीस घटाकर कुल समेकित राजस्व (एजीआर) का आठ फीसद कर दिया गया है।

अभी तक सकल राजस्व का 10 फीसद लाइसेंस फीस के रूप में डीटीएच कंपनियां चुकाती रही हैं। 10 साल के लिए लाइसेंस दिया जाता है। डीटीएच आॅपरेटरों को 10 करोड़ रुपए की इंट्री फी चुकानी होती है। ट्राई के एक आला अधिकारी के अनुसार, मंत्रालय ने हमारी सिफारिशें मान ली हैं और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। जुलाई, 2014 में ट्राई ने डीटीएच नीति की समीक्षा की थी और लाइसेंस और सालाना शुल्क में बदलाव के साथ ही एक और प्रावधान सुझाया था कि एक आॅपरेटर को एक ही प्लेटफॉर्म पर काम करने की अनुमति हो- या तो डीटीएच या केबल कंपनी।

अभी भारत में छह डीटीएच कंपनियां हैं- जी समूह की डिश टीवी, रिलायंस बिग टीवी, टाटा स्काई, वीडियोकॉन डीटूएच लिमिटेड, सन डाइरेक्टटीवी प्राइवेट लिमिटेड और भारती टेलीमीडिया लिमिटेड व राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन की डिश टीवी। 2016-17 में सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने डीटीएच कंपनियों से लाइसेंस फीस के बाबत 747.78 करोड़ रुपए कमाए थे। पिछले तीन वित्त वर्ष में कुल 2,400.45 करोड़ की कमाई हुई है।

अब डीटीएच लाइसेंस नीति में बदलाव से असहज राष्ट्रीय कंपनियों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के द्वार खटखटाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, इस बाबत आधिकारिक तौर पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। तमिलनाडु में सरकारी कंपनी अरासू ने मुफ्त में सेट टॉप बॉक्स देने की घोषणा कर दी है। इस बाबत एआइएडीएमके ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया है। अरासू को अभी केंद्रीय मंत्रालय ने ‘प्रोविजनल डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (Þडीएएस)’ लाइसेंस उपलब्ध कराया गया है। आंध्र प्रदेश में इसकी प्रक्रिया चल रही है। पंजाब समेत कई राज्य इस कतार में बताए जा रहे हैं।

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