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केंद्र सरकार ने संसद में फिर कहा, खत्म नहीं होगा आरक्षण

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि आरक्षण समाप्त करने की कोई बात नहीं है और अगर किसी के दिमाग में ऐसी कोई दुर्भावना है, तो वे सोचते रहें।
लोकसभा में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत (फाइल फोटो)

अनुसूचित जाति, जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को लेकर पिछले कुछ समय से छिड़ी बहस के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार (2 मई) को फिर दोहराया कि इन वर्गों के लिए आरक्षण था, है और रहेगा। साथ ही सरकार पदोन्नति में आरक्षण के लिए माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने 2016-17 के लिए सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय की अनुदानों की मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए लोकसभा में कहा कि सरकार की नीयत और नीति साफ है। भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण समाप्त करने की कोई बात नहीं है और अगर किसी के दिमाग में ऐसी कोई दुर्भावना है, तो वे सोचते रहें। आरक्षण था, है और रहेगा। पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में गहलोत ने लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के इन विचारों से सहमति जताई कि विभिन्न सचिवालयों में स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि सरकार पदोन्नति में आरक्षण की पक्षधर है। उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि इस संबंध में माहौल बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस हमें लिखित में दे दे तो हम इस पर जरूर विचार करेंगे। इस मामले में सभी दलों को मिल कर प्रयास करना होगा और इसके लिए एक माहौल बनाना होगा। जातिगत जनगणना के आंकड़ों के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समय आने पर इसके आंकड़े जारी किए जाएंगे और इस समय यह मामला गृह मंत्रालय के विचाराधीन है। उनके मंत्रालय के लिए विभिन्न मदों में बजट में कटौती के विपक्षी सदस्यों के आरोपों को नकारते हुए कहा कि सरकार भीमराव आंबेडकर की सोच के आधार पर दलित और वंचित वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के बजट का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा- मैं स्वीकार करता हूं कि छात्रवृत्ति के लिए मांग के अनुरूप बजट आबंटन नहीं किया गया। लेकिन पिछले सालों की तुलना में किसी मद में कटौती नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जहां तक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उपयोजनाओं की बात है तो इसमें मामूली कमी की गई है लेकिन इस बार कई मदों में कुल मिला कर 17 फीसद ज्यादा राशि राज्यों को दी गई है। राज्यों से भी इस बढ़ी हुई राशि से सहयोग करने का आग्रह किया गया है।

गहलोत ने अपने मंत्रालय के अधीन विकलांग कल्याण, नशामुक्ति, वृद्धजन और अन्य वर्गों के कल्याण की योजनाएं भी गिनार्इं। उन्होंने कहा कि देश में नशामुक्ति योजना के लिए नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है और अगले छह महीने में नशामुक्ति नीति बनने की उम्मीद है। गहलोत ने विश्वास जताया कि किन्नर समुदाय के कल्याण के लिए एक कानून इस साल पारित हो जाएगा। सरकार का प्रयास है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों के प्रति भेदभाव और ऊंच-नीच का वातावरण जल्द समाप्त हो और इसके लिए भीमराव आंबेडकर की सोच पर अमल तेज करने के प्रयास किए जा रहे हैं जो अब तक धीमी गति से हो रहे थे।

गहलोत ने कहा कि सालों से भेदभाव के कारण ही वर्ग-संघर्ष की बात उठती है लेकिन सरकार समता और समरसता लाने के लिए समन्वय के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने दलितों के उत्थान की दिशा में केंद्र के उठाए गए कदमों को गिनाते हुए बताया कि आंबेडकर की 125वीं जयंती के साल में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए और आजादी के बाद पहली बार आंबेडकर के चित्र वाला 10 रुपए और 125 रुपए का सिक्का जारी किया गया।

चर्चा में भाग लेते हुए इनेलो के दुष्यंत चौटाला ने केंद्र से वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने की मांग की। उन्होंने छात्रवृत्ति में भेदभाव का आरोप लगाते हुए इसे खत्म करने की मांग भी की। भाजपा की सावित्रीबाई फुले और यशवंत सिंह, आरएलएसपी के अरुण कुमार, जद (एकी) के कौशलेंद्र कुमार और एआइएमआइएम के असदुद्दीन ओवैसी ने भी अनुसूचित जाति-जनजाति वर्गों से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए।

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