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घोटाले से जुड़े सवालों से मुंह चुराती दिखीं मायावती

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में करोड़ों के घोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर सीबीआइ ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से पूछताछ की। एजंसी ने इससे पहले मायावती के खिलाफ ‘नए सबूत’ मिलने का दावा किया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस घोटाले की अहम कड़ियों का पर्दाफाश करने के लिए सीबीआइ ने सोमवार को मायावती से पूछताछ की।
Author नई दिल्ली | October 3, 2015 10:07 am
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में करोड़ों के घोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर सीबीआइ ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से पूछताछ की। (फोेटो: प्रेम नाथ पांडे)

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में करोड़ों के घोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर सीबीआइ ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से पूछताछ की। एजंसी ने इससे पहले मायावती के खिलाफ ‘नए सबूत’ मिलने का दावा किया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस घोटाले की अहम कड़ियों का पर्दाफाश करने के लिए सीबीआइ ने सोमवार को मायावती से पूछताछ की।

एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने अब तक 74 प्राथमिकियां दर्ज की हैं और 48 आरोपपत्र दाखिल किए हैं। सीबीआइ अधिकारियों की पूछताछ के दौरान मायावती ने महत्त्वपूर्ण सवालों से कथित तौर पर बचने की कोशिश की और मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ फैसलों के बारे में अनभिज्ञता तक जाहिर की। सूत्रों के अनुसार, जांच एजंसी ने स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के विभाजन और जिला परियोजना अधिकारियों के 100 पद सृजित करने को लेकर मायावती के खिलाफ नए सबूत मिलने का दावा किया था जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि एनआरएचएम योजनाओं के कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के पीछे जिला परियोजना अधिकारियों की कथित भूमिका बताई जाती है।

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय का बंटवारा मायावती के कार्यकाल में किया गया था। प्रतिक्रिया के लिए उनसे या उनकी पार्टी के किसी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र पर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए सीबीआइ का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि मामले में उनकी संलिप्तता है ही नहीं।

सीबीआइ ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय का विभाजन इसलिए किया गया ताकि एनआरएचएम के कोषों को परिवार कल्याण विभाग के प्रभार के अंतर्गत सीधे तौर पर रखा जा सके। यह विभाग तब मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा के पास था, जिनके खिलाफ एजंसी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। एजंसी का दावा है कि परिवार कल्याण विभाग में उन लोगों को ही जिला परियोजना अधिकारियों के पद पर पदस्थ किया गया जिन्होंने चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को कथित तौर पर ठेके दिए और इसके बदले में आरोपी लोकसेवकों को कथित भ्रष्टाचार की भारी रकम मिली।

प्राथमिकी में सीबीआइ ने आरोप लगाया है कि आपराधिक साजिश के तहत स्वास्थ्य विभाग के विभाजन का प्रस्ताव दिया गया और एनआरएचएम के लिए केंद्र सरकार की ओर से तय मानकों के खिलाफ जाकर मंजूरी ली गई। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने पाया है कि राज्य में जिला परियोजना अधिकारियों के 100 पदों का सृजन अनियमित तरीके से किया गया।

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  1. Ajay Sharma
    Oct 3, 2015 at 1:10 pm
    भारत से पहली बार 2265 वर्ष पुराने आर्किमिडीज सिद्धान्त 330 वर्ष पुराने न्यूटन के नियमों और 110 वर्ष पुराने आइस्टीन के E=m2 संषोधन हुआ है.माननीय साइंस एंड टैक्नोलोजी मंत्री डां हर्षवर्धन ने अजय शर्मा का उत्साह वर्धन किया है। और शर्मा को दो पुस्तकें ..बिंयोड न्यूटन एंड आर्किमिडीज और बियोंड आंइस्टीन एंड E=Mc2 .. सैकरैटरी प्रोफैसर आषुतोष शर्मा को भेजी है।...मंत्री डाॅ. हर्षवर्धन से प्रार्थना है। कि वे इस शोधकार्य पर खुले से मंच करवायें. वे भारत सरकार केे विषेषज्ञो के सवालों का लिखित रूप से देंगे …
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