ताज़ा खबर
 

चिदंबरम की भूमिका की जांच हो रही है : सीबीआइ

नई दिल्ली। एअरसेल-मैक्सिस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत को सीबीआइ ने बताया है कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की ओर से सौदे में एफआइपीबी की मंजूरी देना गलती थी। जांच अधिकारी ने विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी को बताया कि 80 करोड़ डॉलर का निवेश था जो 35 सौ करोड़ रुपए (अनुमानित) होता […]
Author September 23, 2014 10:03 am
मुद्रास्फीति में गिरावट का श्रेय वैश्विक जिंस मूल्य में गिरावट को देते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार से किए सवाल

नई दिल्ली। एअरसेल-मैक्सिस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत को सीबीआइ ने बताया है कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की ओर से सौदे में एफआइपीबी की मंजूरी देना गलती थी। जांच अधिकारी ने विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी को बताया कि 80 करोड़ डॉलर का निवेश था जो 35 सौ करोड़ रुपए (अनुमानित) होता है। एफआइपीबी को मंजूरी देना गलती थी। इसकी जांच हो रही है।

जांच एजंसी ने सोमवार को अदालत को बताया कि वह जांच कर रही है कि 2006 में एअरसेल-मैक्सिस सौदे में चिदंबरम ने कैसे विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआइपीबी) की मंजूरी दी थी। इसने कहा कि वित्त मंत्री को 600 करोड़ रुपए तक की मंजूरी देने का अधिकार था। लेकिन चिदंबरम ने 80 करोड़ डॉलर की मंजूरी दी जो करीब 35 सौ करोड़ रुपए होता है। इसने कहा कि मामले को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) के पास भेजा जा सकता था। उन्होंने बताया कि इस बात की जांच चल रही है कि चिदंबरम ने मंजूरी कैसे दी।

सीबीआइ के अभियोजक केके गोयल ने अदालत से कहा,‘आप ने एफआइपीबी मंजूरी के बारे में पूछा था। हम ऐसे दस्तावेज दिखा रहे हैं, जो तत्कालीन वित्त मंत्री की शक्तियां दर्शाते हैं। तत्कालीन वित्त मंत्री के पास 600 करोड़ रुपए तक की एफआइपीबी मंजूरी देने का अधिकार था। इससे अधिक के निवेश को मंजूरी देने का अधिकार सीसीईए के पास था। इसकी जांच चल रही है, जो अभी तक पूरी नहीं हुई है।’

एजंसी ने अपने आरोपपत्र में कहा था कि मॉरिशस के मेसर्स ग्लोबल कम्युनिकेशन सर्विसेज होल्डिंग्स लिमिटेड ने 80 करोड़ डॉलर की मंजूरी मांगी थी। इसके लिए सीसीईए सक्षम था। यह कंपनी मैक्सिस की सहायक कंपनी है। सीबीआइ ने पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन, उनके भाई कलानिधि मारन, टी आनंद कृष्णन, मलेशियाई नागरिक अगस्टस राल्फ मार्शल और चार कंपनियों सन डायरेक्ट टीवी प्राइवेट लिमिटेड, मैक्सिस कम्युनिकेशन बेरहाड, साउथ एशिया एंटरटेनमेंट होल्डिंग लिमिटेड और एस्ट्रो आॅल एशिया नेटवर्क पीएलसी को आरोपी बनाया था। उन लोगों पर भादंसं की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाया है।

कलानिधि मारन की पत्नी कावेरी मारन की भूमिका के सवाल पर एजंसी ने कहा कि भले ही आरोपी कंपनी सन डायरेक्ट टीवी प्राइवेट लिमिटेड में उनकी 82 फीसद हिस्सेदारी है। लेकिन दस्तावेजों के मुताबिक हर निर्णय उनके पति ने किया था। सीबीआइ ने कहा कि दस्तावेज में उनकी सीधी भूमिका का पता नहीं चलता है। अगर अदालत हमें आगे का काम देती है तो निश्चित रूप से इस पहलू की जांच करेंगे। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख 13 अक्तूबर तय की है।

सीबीआइ ने पूर्व दूरसंचार सचिव जेएस शर्मा को भी आरोपी बनाया है। उनका निधन हो चुका है। बहरहाल उनका नाम आरोपियों के ऐसे कॉलम में रखा गया है, जिनके खिलाफ सुनवाई नहीं चल सकती। 72 पन्ने के आरोपपत्र में सीबीआइ के 151 गवाहों के नाम और 655 दस्तावेज हैं।

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग