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ईसाइयों के सबसे बड़े संगठन ने पीएम मोदी से की शिकायत- नफरत फैला रहे हैं आपके सीएम रघुवर दास

इससे एक महीने पहले झारखंड सरकार ने धर्म परिवर्तन रोकने के लिए 12 अगस्त को एक बिल पास किया था।
एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (File Photo)

भारत में ईसाइयों के सबसे बड़े संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिकायत की है कि झारखंड के मुख्यमंत्री सीएम रघुवर दास नफरत फैला रहे हैं। पीएम मोदी को खत लिखकर उनसे इस मामले में दखल देने और नफरत को खत्म करने की अपील की है। भारत में रोमन कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े संगठन कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने पीएम मोदी से यह अपील की है। कड़े शब्दों में लिखे खत में इस संगठन के सेक्रेट्री जनरल थिओडोर मास्कारेंहस ने कहा कि वह झारखंड में हो रही नफरत की राजनीति से परेशान हैं, जिसकी वजह से उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा। बता दें, इससे एक महीने पहले झारखंड सरकार ने धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए 12 अगस्त को एक बिल पास किया था।

अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक मास्कारेंहस ने कहा कि झारखंड में 2014 के चुनाव में पीएम मोदी ने खुद चुनाव प्रचार किया था, उस दौरान इन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात कही थी। इसके बाद रघुवर दास राज्य के मुख्यमंत्री बने। लेकिन उन्होंने ‘ईसाई समुदाय के खिलाफ विकृतिगत हमलों’ शुरू कर दिए। साथ ही उन्होंने कहा, ‘अगर मुख्यमंत्री विचारधारा की नफरत को रोकने में नाकाम हैं तो अब उनके जाने का समय आ चुका है।’ पिछले सप्ताह हिंदू जागरण मंच द्वारा रांची के पादरी का पुतला जलाने की घटना का जिक्र करते हुए चिंता जाहिर की। साथ ही उन्होंने कहा कि ईसाइयों के खिलाफ फैलाई गई यह नफरत, जल्द ही हिंसा में भी बदल सकती है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद दिलाया कि जब उन्होंने इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कहा था कि ‘धर्म नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जाएगा तो पूरे देश ने उनकी तारीफ की थी। मास्कारेंहस ने कहा, ‘रघुवर दास और उनके सलाहकारों में पिछले कुछ महीनों से देखने को मिला है कि जिस विचारधारा की आपने घोषणा की थी, उससे वे लोग संबंध नहीं रखते। प्रधानमंत्री जी,  मैं आपसे अपील करता हूं कि आप झारखंड के मुख्यमंत्री द्वारा फैलाई गई नफरत के मामले में दखल दें और इस नफरत को खत्म कर दें।’

एंटी-कन्वर्जन बिल पास करने से एक महीने पहले सरकार द्वारा अखबारों में दिए गए फुल पेज के विज्ञापन का जिक्र करते हुए कहा कि ‘ईसाई समुदाय को बदनाम करने के लिए स्रोत का नाम दिए बिना महात्मा गांधी का नकली उद्धरण विज्ञापन में’ दिया गया था।

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