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देश ने नकदीरहित वेतन भुगतान की ओर बढ़ाया कदम

केंद्र सरकार वेतन भुगतान के बारे में रेलवे, हवाई परिवहन सेवाओं, खान, तेल क्षेत्र और स्वयं के प्रतिष्ठानों के मामले में नियम बना सकती है।
Author नई दिल्ली | December 22, 2016 00:47 am
सरकार ने अर्थव्यवस्था में नकदी को बढ़ावा देने के इरादे से वेतन भुगतान में संशोधन के लिए अध्यादेश को बुधवार को मंजूरी दे दी।

सरकार ने अर्थव्यवस्था में नकदी को बढ़ावा देने के इरादे से वेतन भुगतान में संशोधन के लिए अध्यादेश को बुधवार को मंजूरी दे दी। इसके तहत कंपनियां और औद्योगिक प्रतिष्ठान अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके या चेक से कर सकेंगे। हालांकि नियोक्ताओं के पास नकद में वेतन देने का विकल्प होगा। नोटबंदी के फैसले के कारण चौतरफा हमले झेल रही मोदी सरकार काले धन के संभावित स्रोतों को बंद करने की चिंता में है। हालांकि उसके नए फैसलों को कारोबार जगत में इंस्पेक्टर राज की वापसी के खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। छोटे और मंझले व्यापारी भाजपा का वोट बैंक रहे हैं। नोटबंदी को सफल दिखाने की हड़बड़ी में भाजपा सरकार इस वोट बैंक की नाराजगी की भी परवाह नहीं कर रही। श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2016 लोकसभा में 15 दिसंबर को पेश किया था, लेकिन नोटबंदी के कारण हंगामे के कारण इसे पास नहीं कराया जा सका। मंत्रिमंडल की बैठक में कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश का रास्ता अपनाने का फैसला किया गया। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद दत्तात्रेय ने चीजों को साफ करते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों उद्योगों की अधिसूचना के बाद नियोक्ताओं के पास नकद में वेतन देने का विकल्प होगा।

इससे पहले, इस बात को लेकर भ्रम थी कि क्या केंद्र और राज्यों द्वारा अधिसूचित नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को वेतन चेक या संबंधित कर्मचारी के बैंक खाते में डालना अनिवार्य होगा। हालांकि विधेयक में साफ तौर पर कहा गया है कि ‘उपयुक्त सरकार’ राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उद्योग या अन्य प्रतिष्ठान को अधिसूचित करेंगी और उसके नियोक्ता अपने प्रत्येक कर्मचारी को वेतन केवल चेक या उसके बैंक खाते में ही देंगे।बार-बार सवाल पूछे जाने पर भी मंत्री ने कहा कि अध्यादेश के साथ-साथ विधेयक के जरिये कानून में संशोधन के बाद नियोक्ताओं के पास नकद में वेतन देने का विकल्प होगा। दत्तात्रेय ने कहा कि सरकार ने अध्यादेश का रास्ता इसलिए अपनाया है क्योंकि यह ट्रेड यूनियनों की बहु-प्रतीक्षित मांग है।

सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के महासचिव तपन कुमार सेन ने कहा, ‘वे झूठ बोल रहे हैं। संसद में जो विधेयक पेश किया गया है, उसमेंं साफ तौर पर केंद्र और राज्यों द्वारा अधिसूचित उद्योगों द्वारा नकद में वेतन के भुगतान पर रोक है। वे केवल प्रधानमंत्री नरें्रद मोदी को खुश करना चाहते हैंं।’
उन्होंने यह भी कहा, ‘नकदी की समस्या के बीच कर्मचारियों का वेतन नकद में मांगने का अधिकार छीनना ठीक नहीं है…।’ सेन ने कहा, ‘ऐसे समय जब नकदी की समस्या से कर्मचारी नकदी की कमी के कारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं, अध्यादेश लाना उपयुक्त नहीं है।’ विधेयक में कहा गया है कि यह नई प्रक्रिया डिजिटल और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था के उद्देश्य को पूरा करती है। यह कानून 23 अप्रैल, 1936 को अस्तित्व में आया था। इसके तहत वेतन का भुगतान सिक्के और मुद्रा नोटों या दोनों में किया जा सकता है। इसमें वेतन का भुगतान चेक या बैंक खाते के जरिये करने के प्रावधान को 1975 में शामिल किया गया। फिलहाल इस कानून के दायरे में प्रतिष्ठानों के कुछ श्रेणियों के वे कर्मचारी आते हैं जिनका वेतन 18 हजार रुपए मासिक से अधिक नहीं है।
केंद्र सरकार वेतन भुगतान के बारे में रेलवे, हवाई परिवहन सेवाओं, खान, तेल क्षेत्र और स्वयं के प्रतिष्ठानों के मामले में नियम बना सकती है। अन्य मामलों में राज्यों को फैसला करना होता है।

केंद्र सरकार वेतन भुगतान के बारे में रेलवे, हवाई परिवहन सेवाओं, खान, तेल क्षेत्र और स्वयं के प्रतिष्ठानों के मामले में नियम बना सकती है। अन्य मामलों में राज्यों को फैसला करना होता है। कानून में राज्य स्तर पर संशोधन के जरिए आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, केरल और हरियाणा ने पहले ही चेक और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वेतन भुगतान का प्रावधन कर दिया है। फिलहाल कर्मचारी से लिखित में लेकर उसका वेतन चेक के जरिये या उसके खाते में सीधे डाला जा सकता है।

 

 

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