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कैबिनेट विस्तार: अठावले को मंत्री बनाया जाना दलितों तक पहुंचने की मोदी की कोशिशों का हिस्सा

खुद को ‘भारत का निडर चीता’ बताते हुए 56 वर्षीय नेता रामदास अठावले ‘दलित पैंथर मूवमेंट’ का नेतृत्व करने का दावा करते हैं। यह आंदोलन पूरी दुनिया में समानता, न्याय और मानवाधिकारों के लिए एक सामाजिक आंदोलन है
Author नई दिल्ली | July 5, 2016 15:52 pm
रामदास अठावले को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी।

महाराष्ट्र के प्रमुख दलित नेता रामदास अठावले का मोदी सरकार में शामिल किया जाना उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण दलित समुदाय तक पहुंचने की भाजपा की कोशिशों का नतीजा है। अठावले अपने कॉमिक सेंस के लिए मशहूर हैं। अठावले ट्रेड यूनियन नेता रहे हैं और संसद तथा संसद के बाहर अपनी धारदार टिप्पणियों और हास्य पैदा करने वाला भाषण देने के लिए लोकप्रिय हैं। वह राजग के सहयोगी दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के अध्यक्ष हैं।

वह राकांपा-कांग्रेस गठबंधन से हटने के बाद से 2011 से ही राजग का हिस्सा हैं। वह फिलहाल राज्यसभा में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और तीन बार लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। आरपीआई (ए) नेता ने पिछली बार 2004 से 2009 तक मुंबई उत्तर मध्य संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वह 1998 में पहली बार निचले सदन के लिए निर्वाचित हुए थे। अठावले पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार में मंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे थे। उन्हें ऐसे समय में मंत्री बनाया गया है जब भाजपा ने दलित आदर्श बी आर अंबेडकर की विरासत पर दावा किया है।

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खुद को ‘भारत का निडर चीता’ बताते हुए 56 वर्षीय नेता ‘दलित पैंथर मूवमेंट’ का नेतृत्व करने का दावा करते हैं। यह आंदोलन पूरी दुनिया में समानता, न्याय और मानवाधिकारों के लिए एक सामाजिक आंदोलन है। अठावले ने यह कहकर विवाद पैदा किया जब उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय में एक दलित शोधार्थी के आत्महत्या की पृष्ठभूमि में आत्मरक्षा के लिए दलितों के लिए आग्नेयास्त्रों की मांग कर डाली।

महाराष्ट्र के सांगली जिले में अगलगांव से स्नातक अठावले को 1990 में महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए निर्वाचित किया गया था और वह 1990 में कैबिनेट मंत्री बने। अठावले ने मराठवाड़ा विद्यापीठ नामांतरण में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। यह मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम अंबेडकर के नाम पर रखने के लिए एक दलित आंदोलन था। अंबेडकर स्मारक के निर्माण के लिए मुंबई में इंदु मिल की जमीन दिए जाने के लिए चलाए गए आंदोलन में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी।

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अठावले ने मुंबई से निकलने वाली साप्ताहिक पत्रिका ‘भूमिका’ का संपादन भी किया। वह परिवर्तन प्रकाशन के लिए प्रकाशक रहे हैं। उन्होंने मराठी फिल्म ‘अन्य याचा प्रतिकार’ और ‘जोशी की कांबले’ जैसी फिल्मों में भी भूमिका निभाई। उन्होंने मराठी ड्रामा ‘एकचा प्याला’ और कुछ अन्य में भी अभिनय किया।

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