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कैबिनेट विस्तार: अपनी पार्टी की अंदरूनी चुनौतियां पार कर मंत्री बनीं अनुप्रिया, पूर्वांचल वोटों पर मोदी की नजरें

अनुप्रिया को मंत्रिमण्डल में शामिल किया जाना इस बात की तरफ साफ इशारा है कि भाजपा अगले साल विस चुनाव के दौर से गुजरने जा रहे उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए आतुर है
Author दिल्ली/लखनऊ | July 5, 2016 16:29 pm
भाजपा के सहयोगी ‘अपना दल’ की सांसद अनुप्रिया पटेल (पीटीआई फाइल फोटो)

नरेन्द्र मोदी मंत्रिमण्डल में मंगलवार (5 जुलाई) को शामिल की गयीं भाजपा के सहयोगी ‘अपना दल’ की सांसद अनुप्रिया पटेल अपनी पार्टी के अंदर ही उपजी चुनौतियों पर विजय प्राप्त करके आगे बढ़ी हैं और उन्होंने उत्तर प्रदेश के मजबूत कुर्मी नेता के तौर पर पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से सटे मिर्जापुर से सांसद 35 वर्षीय अनुप्रिया को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल किया जाना इस बात की तरफ साफ इशारा है कि भाजपा अगले साल विधानसभा चुनाव के दौर से गुजरने जा रहे उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए आतुर है, खासकर पूर्वांचल के उस इलाके के मतदाताओं को, जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के लिए सम्भावनाएं तलाश रहे हैं।

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प्रदेश में कुल मतदाताओं में कुर्मी बिरादरी की करीब आठ प्रतिशत हिस्सेदारी है, लिहाजा चुनाव के लिहाज से यह अहम वोटबैंक है। वर्ष 2012 में वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट से विधायक भी चुनी गई अनुप्रिया ने लेडी श्रीराम कॉलेज, एमिटी यूनीवर्सिटी और कानपुर विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है। उन्होंने मनोविज्ञान में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा वह एमबीए डिग्रीधारी भी हैं। वर्ष 2014 में भाजपा के साथ गठबंधन करके अपना दल के टिकट पर सांसद चुनी गयी तत्कालीन पार्टी महासचिव अनुप्रिया को जल्द ही अपने पिता और पार्टी संस्थापक सोनेलाल पटेल की विरासत को लेकर अपनी मां कृष्णा पटेल से टकराव का सामना करना पड़ा।

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विवाद बढ़ने पर अनुप्रिया की मां ने उन्हें तथा छह अन्य लोगों को पिछले साल पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दल से निकाल दिया था। ऐसी खबरें हैं कि कृष्णा ने भाजपा से कहा था कि अगर वह अनुप्रिया को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल करती है तो वह उससे नाता तोड़ लेंगी, लेकिन भगवा दल के नेता अपने रुख पर कायम रहे और अनुप्रिया को काबीना में जगह दी। भाजपा द्वारा अनुप्रिया को पिछड़े वर्ग की प्रमुख नेता के तौर पर पेश किए जाने की मंशा तभी जाहिर कर दी गयी थी जब हाल में अपना दल संस्थापक सोनेलाल पटेल की 67वीं जयन्ती पर वाराणसी में आयोजित ‘जन स्वाभिमान रैली’ में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिरकत की थी।

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