December 05, 2016

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बॉर्डर पर तैनात जवानों से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े- लड़ाई में नहीं बीमारी और हर्ट अटैक से होती है ज्यादातर की मौतें

पिछले दो वर्षों में सीमा पर कार्रवाई और नक्सल विरोधी अभियान की तुलना में दिल का दौरा पड़ने और अन्य बीमारियों की वजह मरने वाले बीएसएफ कर्मियों की संख्या अधिक है।

Author November 27, 2016 14:38 pm
बीएसएफ के जवान आरएस पुरा सेक्टर में तलाशी अभियान के दौरान। (File/PTI Photo)

पिछले दो वर्षों में सीमा पर कार्रवाई और नक्सल विरोधी अभियान की तुलना में दिल का दौरा पड़ने और अन्य बीमारियों की वजह मरने वाले बीएसएफ कर्मियों की संख्या अधिक है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2015 और सितंबर 2016 के बीच की अवधि में मरने वाले कुल 774 बीएसएफ कर्मियों में सिर्फ 25 कर्मियों की मौत सीमा पर संघर्ष में हुई है। हाल के समय में पाकिस्तान के साथ शत्रुता के बीच देश के सबसे बड़े सीमा चौकसी बल बीएसएफ कर्मियों को दुश्मनों की गोलियों और मोर्टार का सामना करना पड़ा है।

आंकड़ों में बताया गया है कि सीमा पर संघर्ष की वजह से मरने वाले बीएसएफ कर्मियों की संख्या 25 है जबकि कई अन्य बीमारियों की वजह से 316 कर्मियों और दिल का दौरा पड़ने से 117 कर्मियों की मौत हुई है। इस अवधि में अर्धसैनिक बल में एचआईवी:एड्स और मलेरिया की वजह से होने वाली मौतों में कमी आई है।

रेल, सड़क और बाइक दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में स्थिति पहले जैसी ही है। अधिकारियों ने कहा कि यह चिंता का कारण बना हुआ है।

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First Published on November 27, 2016 2:38 pm

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