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ब्रिक्स सम्मेलन: शी जिनपिंग के भारत पहुंचते ही शुरू हुआ प्रदर्शन, लगे ‘आजादी’ के नारे

आठवें ब्रिक्स सम्मेलन के बीच शनिवार (15 अक्टूबर) को गोवा में चीन के खिलाफ प्रदर्शन हुआ।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फाइल फोटो)

आठवें ब्रिक्स सम्मेलन के बीच शनिवार (15 अक्टूबर) को गोवा में चीन के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। ये प्रदर्शन तिब्बत के प्रदर्शकारियों ने किया है। प्रदर्शन कर रहे लोग तिब्बत में चीन के गैरकानूनी कब्जे का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शन कर रहे लोगों के हाथ में ‘तिब्बत को आजाद करो’ और ‘चीन तिब्बत से बाहर हो’ के पोस्टर थे। ये लोग प्रदर्शन करते हुए गोवा के मारगो इलाके में आ गए थे। इसी के पास ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा था। हालांकि, बाद में प्रदर्शन कर रहे उन लोगों को गोवा पुलिस ने पकड़ लिया। मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे लोग तिब्बत यूथ कांग्रेस (TYC) के सदस्य थे। इन लोगों ने बुधवार से ही इस प्रदर्शन की तैयारी कर ली थी। इकनोमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, TYC के अध्यक्ष टेनजिंग जीम ने एक बयान जारी करके कहा था, ‘जब तक अधिग्रहण नहीं हटेगा, जब तक कम्यूनिस्ट सरकार अपनी पॉलिसी में बदलाव नहीं करेगी, जब तक तिब्बत के लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तबतक यह जंग जारी रहेगी।’

गौरतलब है कि गोवा में ब्रिक्स सम्मेलन चल रहा है। इसके लिए शी चिनपिंग शुक्रवार को ही गोवा पहुंचे हैं। यह सम्मेलन 15 से 17 अक्टूबर तक चलेगा। शुक्रवार को 5:40 पर वह मोदी से मिलेंगे। जानकारी के मुताबिक, चीन पाकिस्तान की तरफ से भारत को बॉर्डर पर ‘संयम’ बरतने और खटास में चल रहे रिश्तों को सुधारने के लिए मनाने की कोशिश कर सकता है। सूत्रों ने यह भी बताया कि अगर चीन ने पाकिस्तान का राग छेड़ा तो मोदी भी चुप नहीं रहेंगे। मोदी भी चीन को कहेंगे कि वह पाकिस्तान को समझाए ताकि दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधर सकें। भारत की तरफ से चीन को यह भी बताया जाएगा कि अगर पाकिस्तान में आंतकवाद का खात्मा नहीं हुआ तो उसका चीन-पाक कॉरिडोर भी खतरे में पड़ सकता है। मोदी आतंकी मसूद अजहर की बात भी छेड़ सकते हैं। शी जिनपिंग को उसके खिलाफ सबूत दिखाए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा न्यूक्लियर स्पलायर्स ग्रुप (NSG) में एंट्री को लेकर भी भारत बात कर सकता है।

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First Published on October 15, 2016 3:18 pm

  1. कबीर
    Oct 15, 2016 at 10:28 am
    चीन को एक ही भाषा समझ मे आती है और वह है ताकत की भाषा या व्यापारिक हितों के खिलाफ कोई बडा कदम यदि आप यह नहीं कर सकते तो बाकी सब कोरी जारी रखिये
    Reply
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