January 23, 2017

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ब्रिक्स सम्मेलन: आतंकवाद पर पीएम मोदी को मिला पुतिन का साथ, चीन ने फिर किया निराश

गोवा में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की।

गोवा में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग, नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन। (फोटो-पीटीआई)

गोवा में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों शीर्ष नेताओं से मोदी ने आंतकवाद के खिलाफ एकजुट होने के लिए भी कहा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पुतिन ने आतंक के खिलाफ चल रही लड़ाई में भारत के साथ खड़े होने की बात कही। वहीं शी जिनपिंग ने फिलहाल इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। इसपर मोदी ने उन्हें साफ किया कि आंतक के मुद्दे पर दो देशों को अलग सोच नहीं रखनी चाहिए और चीन को आतंक पर अपना स्टेंड क्लीयर करना चाहिए। मीटिंग में पुतिन ने उरी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में घुसकर की गई कार्रवाई (सर्जिकल स्ट्राइक) को भी सही बताया। मोदी ने रूस के साथ हुए समझौते के दौरान कहा था कि दो नए दोस्तों के मुकाबले एक पुराना दोस्त बेहतर होता है। खबर के मुताबिक, मोदी और शी इस बात पर तो एकमत थे कि आतंकवाद एक बड़ी समस्या है। शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन हर तरीके के आतंकवाद के खिलाफ है। लेकिन जब मौलाना मसूद अजहर का जिक्र आया तो शी जिनपिंग ने कुछ नहीं कहा। चीन की तरफ से इस बात को लेकर भी कोई इशारा नहीं दिया गया कि वह मौलाना मसूद अजहर का बचाव करना बंद करेंगे।

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गौरतलब है कि शनिवार (15 अक्टूबर) को भारत और रूस ने मिसाइल प्रणालियों, जंगी जहाजों की खरीद और हेलीकॉप्टरों के संयुक्त उत्पादन सहित कई बड़े रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा दोनों देशों ने कई सारे अहम क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर फैसला किया और एकजुट होकर आतंकवाद की बुराई से लड़ने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई मुद्दों पर वार्ता की। इनमें समूचे द्विपक्षीय संबंध पर वार्ता शामिल हैं। इसके बाद दोनों देशों ने व्यापार एवं निवेश, हाइड्रोकार्बन, अंतरिक्ष तथा स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने के लिए 16 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की इकाई दो को भी समर्पित किया और इसकी यूनिट 3 एवं चार की आधारशिला रखे जाने को देखा। रक्षा सौदों में भारत का पांच अरब डॉलर से अधिक की लागत से एस 400 ट्रिफ वायु रक्षा प्रणाली की खरीद शामिल है। दोनों देश चार अत्याधुनिक जंगी जहाज बनाने में सहयोग भी करेंगे। इसके अलावा कामोव हेलीकॉप्टर बनाने का संयुक्त उत्पादन प्रतिष्ठान भी स्थापित करेंगे।

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First Published on October 16, 2016 7:36 am

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